Monday, January 31, 2011

करमापा को 'जासूस' बताने पर भड़का चीन, कहा- भरोसे लायक नहीं है भारत

धर्मशाला. तिब्बती धर्मगुरु करमापा लामा पर हिमाचल प्रदेश पुलिस का शिकंजा कसता ही जा रहा है। मठ में मिली विदेशी मुद्रा और विदेशी सिमकार्डों पर पुलिस ने करमापा से सीधी पूछताछ की है लेकिन करमापा के जवाब से पुलिस संतुष्‍ट नहीं है और उनसे फिर पूछताछ हो सकती है।

पूरे मामले में जहां दलाई लामा ने करमापा का साथ दिया है, वहीं चीन ने भारत को निशाने पर ले लिया है। दलाई लामा का कहना है कि करमापा के मामले की पूरी जांच हो, लेकिन उन्‍होंने करमापा को बदले जाने की संभावना से साफ इनकार कर दिया। करमापा बौद्ध धर्म गुरू हैं और आने वाले समय में 75वर्षीय दलाई लामा का स्‍थान ले सकते हैं।

उधर, चीन ने इस बात से इनकार किया है कि करमापा उसका जासूस है। चीन का कहना है कि भारत ने करमापा पर चीन के लिए जासूसी करने का शक जाहिर कर यह दिखा दिया है कि उसे चीन पर भरोसा नहीं है। ऐसे में भारत भी चीन के भरोसे के लायक नहीं रह जाता।

रविवार को सिद्धबाड़ी स्थित ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय के अस्थायी निवास में ऊना के एएसपी केजी कपूर और डीएसपी सुरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम की पूछताछ के दौरान करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे ने कहा कि उन्‍हें यह रकम चढ़ावे के तौर मिली है। उन्‍होंने कहा, ‘मैं बौद्ध भिक्षु हूं। बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने और अनुयायियों को आशीर्वाद देने तक ही मेरी दिनचर्या सीमित है। अनुयायियों के चढ़ावे और उपहारों का हिसाब मैं नहीं, बल्कि लवरंग तशरुफू में तैनात अधिकारी और कर्मचारी रखते हैं।’

पुलिस ने करमापा दोरजे से विदेशी मुद्रा और जमीन खरीद-फरोख्त मामले में 50 सवाल पूछे। अधिकतर सवालों के जवाब में करमापा ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा, इनके जवाब वित्त अधिकारियों को ही मालूम होंगे। करमापा ने पुलिस को स्पष्ट कहा कि हिसाब में गड़बड़ी है तो इसके लिए वित्त शाखा जिम्मेदार है। किस अनुयायी ने कब कितनी राशि उपहार या दान में दी, मैंने कभी इसका हिसाब नहीं किया। एएसपी कपूर ने करमापा के जवाबों पर असंतोष जताते हुए कहा कि उनसे इस मामले में दोबारा पूछताछ की जा सकती है।

करमापा दोरजे हैं चीनी एजेंट!

इस बीच करमापा के चीनी कनेक्शन के भी पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं। इस मामले में अबतक दो लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
मठ में मिली विदेशी करेंसी और विदेशी सिमकार्ड ने तिब्बती धर्म गुरु करमापा को शक के पुख्ता घेरे में खड़ा कर दिया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक करमापा के चीन से संबंध पर शक करने के लिए कई वजहें हैं।

करमापा का पीएलए यानी चीनी सेना के तीन रसूखदार लोगों से संबंध हैं। खुफिया एजेंसियों ने करमापा की बातचीत भी इंटरसेप्ट की है। करमापा के पास 5 अलग-अलग नामों से सिमकार्ड मिले हैं, उनमें 2 सिमकार्ड चीन के हैं।

करमापा के पास जो पैसा आया, वो म्यांमार और नेपाल के जरिए हवाला से आया, जहां पर चीन लगातार हावी हो रहा है। मठ से बरामद लैपटॉप और दस्तावेजों में दलाई लामा की यात्रा, उनकी मीटिंग का ट्रैक रिकॉर्ड है. साथ ही भारत की विदेश नीतियों का भी जिक्र है।  

हालांकि करमापा को चीनी एजेंट बताने के आरोपों को निराधार करार देते हुए करमापा कार्यालय प्रशासन के सलाहकार एवं मंगोलिया के पूर्व राजदूत और सिक्किम के पूर्व सांसद करमा टोपदेन ने रविवार को कहा कि चीनी दबाव के चलते ही करमापा वर्ष 2000 में चीन अधिकृत तिब्बत से चोरी-छिपे शरण लेने भारत पहुंचे थे। चीन सरकार का उन पर दबाव था कि वह दलाईलामा की इच्छाओं के विरुद्ध चीन सरकार की ओर से निर्वाचित पंचेन लामा को मान्यता की घोषणा करें। ऐसे में उन पर एक दशक बाद यह आरोप लगाना सरासर गलत है। रविवार को सिद्धबाड़ी परिसर में करमा टोपदेन और सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेश माथुर ने प्रेस वार्ता में माना कि ऊना पुलिस द्वारा गाड़ी से बरामद एक करोड़ रुपए का भुगतान करमापा कार्यालय की ओर से गठित कारमे गारचिन ट्रस्ट के जरिये करमापा के लिए सिद्धबाड़ी में भूमि खरीदने की खातिर दिल्ली में किया गया था, जिसकी उनके पास रसीद है।

अक्टूबर 2010 में सिद्धबाड़ी में भूमि खरीदने का सौदा ढाई करोड़ रुपए में हुआ था, जिसमें से 90 और 75 लाख रुपए का भुगतान चेक के माध्यम से और एक करोड़ रुपए का भुगतान नकद किया गया था। इन्होंने माना कि करमापा ने भूमि खरीदने और उनको दान में मिलने वाली विदेशी मुद्रा को बैंक खातों में जमा करवाने के लिए फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट 1976 (एफसीआरए) के तहत आवेदन किया है, लेकिन अभी तक गृह मंत्रालय ने इसकी अनुमति नहीं दी है। सिद्धबाड़ी में भूमि खरीदने के लिए एसेंसिलिटी सर्टिफिकेट और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ टैनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट की धारा 118 के तहत जिला राजस्व अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था, जिसकी अनुमति अपेक्षित थी। इसके चलते ही भूमि बेचने वाले को राशि का भुगतान किया गया है।

करमापा ने वर्ष 2003 में चंदे के रूप में मिलने वाली विदेशी मुद्रा के सरस्वती ट्रस्ट का गठन कर आवेदन किया था, जिसे भारत सरकार ने रिजेक्ट कर दिया था। करमापा मठ से बरामद विदेशी और भारतीय मुद्रा की जानकारी प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी थी। मठ में आने वाले एक-एक रुपए का हिसाब-किताब लवरंग तर्शुफू द्वारा रखा जाता है। उन्होंने कहा, करमापा कारोबारी नहीं हैं जो मठ में आने वाली राशि का लेखा-जोखा खुद रखें। करमापा ने धार्मिक शिक्षा पूरी करने और दलाईलामा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ही भारत में शरण ली थी। प्रेस वार्ता में दलाईलामा केंद्रीय प्रशासन के वित्त मंत्री छेरिंग थुंडुप और सिक्किम स्थित रुमटेक लवरंग के प्रबंधक भी उपस्थित थे।

फर्जी था अथॉरिटी लैटर

उना के मैहतपुर बैरियर पर स्कोर्पियो गाड़ी से बरामद एक करोड़ रुपए को बिना किसी दिक्कत धर्मशाला पहुंचाने के लिए कॉपरेरेशन बैंक के सीनियर मैनेजर डी.के. धर ने कारोबारी के.पी. भारद्वाज के नाम से फर्जी अथॉरिटी लैटर जारी किया था। 25 जनवरी को बैंक से भारद्वाज के नाम कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुई है। एसपी संतोष पटियाल ने बताया कि जांच में पता चला है कि लैटर फर्जी था। इस सिलसिले में पुलिस ने अंबाला के कॉपरेरेशन बैंक के सीनियर मैनेजर डी.के. धर और धर्मशाला के कारोबारी के.पी. भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है।

धर को पुलिस शनिवार देररात अंबाला से पकड़ कर ऊना लाई। जबकि भारद्वाज को बगलामुखी के पास से हिरासत में लिया गया। इनके खिलाफ सदर थाने में भादंसं की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत केस दर्ज किया गया है। इससे पहले पुलिस संयोग दत्ता, आशुतोष और कारमे गारचिन ट्रस्ट के प्रबंधक रावजी चौसांग को गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में अब तक पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस ने दिल्ली स्थित मजनू का टीला से एक तिब्बती महिला को पूछताछ के लिए तलब किया है। इसके नाम का अभी खुलासा नहीं किया है। एसपी संतोष पटियाल के मुताबिक धर्मशाला के कारोबारी के आवास तथा अन्य प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की छापामारी में महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं। इनकी जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी और गिरफ्तारियां होने के संकेत दिए हैं।

मजनूं टीला से हुआ था भुगतान
सूत्रों के मुताबिक मैहतपुर बैरियर पर पकड़ी एक करोड़ की नगदी का भुगतान 25 जनवरी को कारमे गारचिन ट्रस्ट के प्रबंधक रावजी चौसांग ने मजनू का टीला से किया था। इस मामले में पुलिस ने दिल्ली के एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और पीएनबी बैंकों की डिटेल को खंगाला।

चीन पर दागे आरोप

तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा, करमापा लापा के अस्थायी निवास से विदेशी मुद्रा बरामद होने के पीछे चीन का हाथ हो सकता है। दलाई लामा ने रविवार को चित्रदुर्ग में कहा कि धर्मशाला में चीन के बहुत से अनुयायी रहते हैं। संभव है कि पैसा बरामदगी में उनकी भूमिका हो। फिर बेंगलुरू के नेशनल कॉलेज ग्राउंड में धर्मगुरु ने कहा, चीन सरकार के दमन के बावजूद वहां बौद्ध धर्म के अनुयायी बढ़ते जा रहे हैं। चीन निवासी तिब्बतियों के अनुसार वहां कम से कम 30 करोड़ बौद्ध हैं।’ उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था खुलने और विकास के बाद मजबूरी में चीन को धार्मिक रूप से सहिष्णु होना पड़ा है।

आपकी बात
करमापा के मठ से दबिश के दौरान मिली विदेशी मुद्राओं में चीनी मुद्रा युआन की बरामदगी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जब निर्वासित तिब्बती चीनी सामान का बहिष्कार करने के लिए विश्व समुदाय से भी अपनी अपील करते हैं तो करमापा अवतार के पास चीन की यह मुद्रा किस प्रकार और क्यों बौद्ध मठ में पहुंची? जिस प्रकार से करमापा अवतार के अनुयायियों की गतिविधियां बढ़ी है उसको लेकर दलाईलामा के अनुयायी भी असमंजस में हैं। आप क्‍या सोचते हैं इस मुद्दे पर? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखकर दुनिया भर के पाठकों से शेयर कर सकते हैं..

No comments:

Post a Comment