Monday, January 31, 2011

जिस्मफरोशी : मजबूरी से हाईप्रोफाइल धंधे तक

बदनाम गली का नाम आते ही ढेर सारे ख्याल और सवाल आने लगते हैं। आखिर क्यों करती हैं ऐसे गंदे काम? यह सवाल तो आपके ख्याल में भी सबसे पहले आया होगा। वह दौर और था जब वक्त के थपेड़ों से घायल होकर अक्सर मजबूर लड़कियां कोठे की शिकार होती थीं, अब तो महज भौतिक संसाधनों की खातिर इस धंधे में लोग उतर चुके हैं। किसी को महंगी कार की चाहत है तो कोई इसे सफलता की शॉर्टकट तरीका मानता है।

जिस्मफरोशी दुनिया के पुराने धंधों में से एक है। बेबीलोन के मंदिरों से लेकर भारत के मंदिरों में देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति का आदिम रूप है। गुलाम व्यवस्था में उनके मालिक वेश्याएं पालते थे। अनेक गुलाम मालिकों ने वेश्यालय भी खोले। तब वेश्याएं संपदा और शक्ति की प्रतीक मानी जाती थीं। मुगलों के हरम में सैकड़ों औरतें रहती थीं। मुगलकाल के बाद, जब अंग्रेजों ने भारत पर अधिकार किया तो इस धंधे का स्वरूप बदलने लगा। इस समय राजाओं ने अंग्रेजों को खुश करने के लिए तवायफों को तोहफे के रूप में पेश किया जाता था। आधुनिक पूंजीवादी समाज में वेश्यावृत्ति के फलने-फूलने की मुख्य वजह सामाजिक तौर पर स्त्री का वस्तुकरण है। यह तो पूराने दौर की कहानी है, जहां आपको मजबूरी दिखती होगी।

पुराने वक्त के कोठों से निकल कर देह व्यापार का धंधा अब वेबसाइटों तक पहुंच गया है। इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के मामले में पिछड़ी पुलिस के लिए इस नेटवर्क को भेदना खासा मेहनत वाला सबब बन गया है। सिर्फ सर्च इंजन पर अपनी जरूरत लिखकर सर्च करने से ऐसी दर्जनों साइट्स के लिंक मिल जाएंगे। कुछ वेबसाइटों पर लड़कियों की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। यहां कालेज छात्राएं, मॉडल्स और टीवी व फिल्मों की नायिकाएं तक उपलब्ध कराने के दावे किए गए हैं।

इस कारोबार में विदेशी लड़कियों के साथ मॉडल्स, कॉलेज गर्ल्स और बहुत जल्दी ऊंची छलांग लगाने की मध्यमवर्गीय महत्वाकांक्षी लड़कियों की संख्या भी बढ़ रही है। अब दलालों की पहचान मुश्किल हो गई है। इनकी वेशभूषा, पहनावा व भाषा हाई प्रोफाइल है और उनका काम करने का ढंग पूरी तरह सुरक्षित है। यह न केवल विदेशों से कॉलगर्ल्स मंगाते हैं बल्कि बड़ी कंपनियों के मेहमानों के साथ कॉलगर्ल्स को विदेश की सैर भी कराते हैं।सेक्स एक बड़े कारोबार के रूप में परिवर्तित हो चुका है। इस कारोबार को चलाने के लिए बाकयादा ऑफिस खोले जा रहे हैं। इंटरनेट और मोबाइल पर आने वाली सूचनाओं के आधार पर कॉलगर्ल्स की बुकिंग होती है। ईमेल या मोबाइल पर ही ग्राहक को डिलीवरी का स्थान बता दिया जाता है। कॉलगर्ल्स को ठेके पर या फिर वेतन पर रखा जाता हैं।

यह भी सच है

भारत में जिस्मफरोशी का धंधा लगातार बढ रहा है। 1956 में पीटा कानून के तहत वेश्यावृत्ति को कानूनी वैद्यता दी गई, पर 1986 में इसमें संशोधन करके कई शर्तें जोड़ी गई। इसके तहत सार्वजनिक सेक्स को अपराध माना गया। इसमें सजा का भी प्रावधान है। वूमेन एंड चाइल्ड डेवलेपमेंट मिनिस्ट्री ने 2007  में एक रिपोर्ट दिया, इसके मुताबिक, 30  लाख औरतें जिस्मफरोशी का धंधा करती हैं। इममें 36 फीसदी तो नाबालिग हैं। अकेले मुंबई में 2 लाख सेक्स वर्कर का परिवार रहता है, जो पूरे मध्य एशिया में सबसे बड़ा है। भारत में सबसे बड़े रेड लाइट एरिया कोलकाता में सोनागाछी, मुंबई में कामथीपुरा, दिल्ली में जी.बी. रोड, ग्वालियर में रेशमपुरा, वाराणसी में दालमंडी, सहारपुर (यूपी) में नक्कास बाजार, मुजफ्फरपुर (बिहार) में छतरभुज स्थान, मेरठ (यूपी) में कबाड़ी बाजार और नागपुर में गंगा-यमुना हैं।

हाल ही में कई सेक्स रैकेट का खुलास हुआ है। इसमें दक्षिण भारत के बेंगलूरू और हैदराबाद में बड़े-बड़े रैकेट पकड़े गए हैं। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही बड़े सेक्स रैकेट खुलासों पर -

सेक्स रैकेट में शामिल हैं कई साउथ इंडियन फिल्मों की हिरोइन

बेंगलूरू के सेक्स रैकेट ने तो पूरे देश को हिला रखा है। एक पांच सितारा मशहूर होटल से दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री यमुना के साथ दलाल सुमन और एक आईटी कंपनी के सीईओ वेणुगोपाल को गिरफ्तार किया गया था। जो शहर के तमाम बड़े होटलों में बड़ी-बड़ी पार्टियों के बहाने सेक्स रैकेट चलता था। जांच से पता चला है कि यमुना, सोची-समझी नीति के तहत करती थी, ताकि पकड़े जाने पर वह आपसी सहमति से सेक्‍स की दलील देकर खुद को रैकेट में शामिल होने के आरोप से बचा सके। यह रैकेट किसी कोठे पर नहीं थ्री स्‍टार और फाइव स्‍टार होटलों में ही चलता था। रैकेट में मजबूर नहीं ग्‍लैमरस महिलाएं शामिल हैं। बड़ी और नामी हिरोइन भी बडे़-बड़े अधिकारियों की ‘सेवा’ के लिए तैयार रहती हैं।

हैदराबाद में तेलुगू फिल्म अभिनेत्री सायरा बानू करती थी धंधा !

हैदराबाद में तेलुगू फिल्म अभिनेत्रियों सायरा बानू और ज्योति के साथ सात अन्य लोगों को रंगे हाथ पकड़कर वेश्यावृत्ति से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ किया गया। कुंदन बाग के एक नजदीकी इलाके के एक अपार्टमेंट से कथित तौर पर सायरा और ज्योति को उज्बेकिस्तान की एक महिला व उनके ग्राहकों के साथ गिरफ्तार किया गया। गिरोह में कुछ रईसों और जाने माने लोगों शामिल हैं।

पर्यटक स्थल बन चुके हैं धंधे का स्वर्ग

हाल ही में गोवा में एक सेक्स रैकेट पकड़ा गया है। यहां के पाउला क्षेत्र से दो दलालों सहित चार नेपाली लड़कियों को पकड़ा गया। इन लड़कियों से जबरन देह व्यापार कराया जा रहा था। इनमें से एक लड़की नाबालिग थी। पुलिस के मुताबिक इस तरह के रैकेट आई टी के मशहूर बैंगलोर में भी काफी संख्या में हैं। फिलहाल पुलिस के पास पुख्ता सबूत नहीं है इसलिए वो कुछ भी कहने से बच रही है।

सेक्स रैकेट चलाती थी भोजपुरी हिरोइन

21 जनवरी को अहमदाबाद के इनकम टेक्स चार रस्ता के नजदीक कॉमर्शियल सेंटर में आने वाले होटल देव पैलेस से सेक्स रैकेट में शामिल एक भोजपूरी हिरोइन को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान केवल जवान और अय्याश ही नहीं बच्चे भी शामिल थे।

कहीं पढाई का खर्च का चलाने के लिए तो कहीं महंगे शौक के लिए अब लड़कियां करती हैं देह का धंधा

एक सर्वेक्षण के मुताबिक ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले कई छात्राएं अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाने लिए देह व्यापार करती हैं। पिछले दस वर्षों में विद्यार्थियों में देह व्यापार तीन फ़ीसदी से बढ़कर 25 फ़ीसदी तक पहुंच गया है। ये सर्वेक्षण किंग्स्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉन रॉबर्ट्स ने सेक्स उद्योग से विद्यार्थियों के संबंध को जानने के लिए किया है। क़रीब 11 फ़ीसदी विद्यार्थी एस्कोर्ट का काम करने के विकल्प को मान लेते हैं या विचार करते हैं। हाई प्रोफाइल सेक्सकर्मी को एस्कोर्ट कहा जाता है। कॉलेज में ट्यूशन फीस ज़्यादा होने के वजह से विद्यार्थियों को ‘इंटरनेट पर अश्लील फ़िल्म’, ‘अश्लील बातें’ और ‘लैप डांस’ जैसा काम करना पड़ता है। सर्वेक्षण ब्रिटेन के एक ही विश्वविद्यालय में किया गया है। वहीं, कई अमीर लड़कियां अपने महंगे शौक को पूरा करने के लिए भी धंधा करती हैं।

आपकी राय

आज जिस्मफरोशी के धंधे का स्वरूप बदल रहा है। पहले मजबूरी और लाचारी में औरते इस धंधे में उतरती थी, पर अब मंहगे शौक को पूरा करने के लिए यह धंधा हाईप्रोफाइल बन चुका है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं? आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर कर सकते हैं। 

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