खर्च में कटौती की अपनी कोशिशें जारी रखते हुए बीबीसी ने घोषणा की है कि शॉर्ट वेव पर उपलब्ध उसकी हिंदी रेडियो सेवा मार्च से बंद हो जायेगी.
इसके साथ ही पांच भाषाओं की वर्ल्ड सर्विस को भी बंद कर दिया जायेगा.
बीबीसी ने जो कदम उठाने की घोषणा की है, उसके नतीजतन 650 लोग रोजगार खो सकते हैं. बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉमसन ने बुधवार के दिन को कॉरपोरेशन के लिये तकलीफदेह करार दिया. बहरहाल, एफएम रेडियो प्रसारण और भागीदारों के जरिये ऑनलाइन, मोबाइल और अन्य मीडिया उपकरणों जैसे वितरण के अन्य तरीकों के साथ हिंदी सेवा श्रोताओं के लिये उपलब्ध रहेगी.
मकदूनी, अल्बेनियाई और सर्बियाई तथा अफ्रीका में पुर्तगाली और कैरीबियाई इलाके में अंग्रेजी की सेवा भी बंद की जायेगी. ऐसा हर वर्ष 4.6 करोड़ पौंड की बचत करने के मकसद से होगा. बीबीसी ने कहा कि इन फैसलों के चलते श्रोताओं की संख्या में तीन करोड़ से अधिक की कमी आयेगी.
इस बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का प्रसारण वर्ष 1932 में शुरू हुआ था. वर्तमान में इसका प्रतिवर्ष खर्च 27.2 करोड़ पौंड आता है. इसके जरिये वर्तमान में विश्वभर में बीबीसी के रेडियो, टीवी और ऑनलाइन श्रोताओं-दर्शकों-पाठकों की संख्या 24.1 करोड़ है.
बीते अक्तूबर, सरकार ने घोषणा की थी कि वर्ल्ड सर्विस का खर्च वर्ष 2014 से विदेश विभाग के बजाय बीबीसी खुद उठायेगा. थॉमसन के अनुसार, खर्च में कटौती पिछले वर्ष शरद काल में हुई समीक्षा के कारण जरूरी हो गयी है.
योजना के तहत सात भाषाओं (मेंडरीन चीनी, रूसी, क्यूबा के लिये स्पेनिश, तुर्की, वियतनामी और यूक्रेनी) में रेडियो प्रोग्रामिंग सेवा समाप्त कर दी जायेगी.
इसके बजाय, इन भाषाओं में ऑनलाइन, मोबाइल और टीवी सामग्री के वितरण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जायेगा.
बीबीसी ग्लोबल न्यूज के निदेशक पीटर हॉरॉक्स ने कहा, यह बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और हर सप्ताह दुनिया भर में बीबीसी की विश्व समाचार सेवा पर निर्भर रहने वाले 18 करोड़ लोगों के लिये एक तकलीफदेह दिन है.
उन्होंने कहा कि हम सेवाओं में कटौती कर रहे हैं जो अन्यथा नहीं की जाती लेकिन बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को मिलने वाले अनुदान में इस तरह की कटौती हुई है कि हम इस क्षमता के साथ काम नहीं कर सकते.
हॉरॉक्स ने कहा, ‘‘बीबीसी का यह मकसद है कि वह उच्च गुणवत्ता वाली तटस्थ और संपादकीय रूप से स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय खबरों का सबसे जाना पहचाना और सबसे विसनीय प्रदाता बना रहे.’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम वि में बड़ी संख्या में फैले दर्शकों और श्रोताओं तक बीबीसी के अनुभव, परिप्रेक्ष्य और उस सामग्री को पहुंचाना जारी रखेंगे जिससे ब्रिटेन तथा उसकी जनता पर असर झलकता है.’’
बीबीसी रेडियो 4 के टूडे कार्यक्रम में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के महासचिव जेरेमी डीयर’ ने कहा कि वर्ल्डसर्विस जरूरी है और उसे बचाया जाना चाहिये.
यूनियन ने कहा कि वह मध्य लंदन स्थित वर्ल्ड सर्विस के मुख्यालय के बाहर धरना देंगे. डीयर ने कहा, ‘‘एक मूल्यवान राष्ट्रीय सेवा में ये कठोर कटौतियां आखिरकार गठबंधन सरकार की जिम्मेदारी है जिसकी नीतियों से ब्रिटेन की गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को नुकसान पहुंच रहा है.’’
बीबीसी ने जो कदम उठाने की घोषणा की है, उसके नतीजतन 650 लोग रोजगार खो सकते हैं. बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉमसन ने बुधवार के दिन को कॉरपोरेशन के लिये तकलीफदेह करार दिया. बहरहाल, एफएम रेडियो प्रसारण और भागीदारों के जरिये ऑनलाइन, मोबाइल और अन्य मीडिया उपकरणों जैसे वितरण के अन्य तरीकों के साथ हिंदी सेवा श्रोताओं के लिये उपलब्ध रहेगी.
मकदूनी, अल्बेनियाई और सर्बियाई तथा अफ्रीका में पुर्तगाली और कैरीबियाई इलाके में अंग्रेजी की सेवा भी बंद की जायेगी. ऐसा हर वर्ष 4.6 करोड़ पौंड की बचत करने के मकसद से होगा. बीबीसी ने कहा कि इन फैसलों के चलते श्रोताओं की संख्या में तीन करोड़ से अधिक की कमी आयेगी.
इस बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का प्रसारण वर्ष 1932 में शुरू हुआ था. वर्तमान में इसका प्रतिवर्ष खर्च 27.2 करोड़ पौंड आता है. इसके जरिये वर्तमान में विश्वभर में बीबीसी के रेडियो, टीवी और ऑनलाइन श्रोताओं-दर्शकों-पाठकों की संख्या 24.1 करोड़ है.
बीते अक्तूबर, सरकार ने घोषणा की थी कि वर्ल्ड सर्विस का खर्च वर्ष 2014 से विदेश विभाग के बजाय बीबीसी खुद उठायेगा. थॉमसन के अनुसार, खर्च में कटौती पिछले वर्ष शरद काल में हुई समीक्षा के कारण जरूरी हो गयी है.
योजना के तहत सात भाषाओं (मेंडरीन चीनी, रूसी, क्यूबा के लिये स्पेनिश, तुर्की, वियतनामी और यूक्रेनी) में रेडियो प्रोग्रामिंग सेवा समाप्त कर दी जायेगी.
इसके बजाय, इन भाषाओं में ऑनलाइन, मोबाइल और टीवी सामग्री के वितरण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जायेगा.
बीबीसी ग्लोबल न्यूज के निदेशक पीटर हॉरॉक्स ने कहा, यह बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और हर सप्ताह दुनिया भर में बीबीसी की विश्व समाचार सेवा पर निर्भर रहने वाले 18 करोड़ लोगों के लिये एक तकलीफदेह दिन है.
उन्होंने कहा कि हम सेवाओं में कटौती कर रहे हैं जो अन्यथा नहीं की जाती लेकिन बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को मिलने वाले अनुदान में इस तरह की कटौती हुई है कि हम इस क्षमता के साथ काम नहीं कर सकते.
हॉरॉक्स ने कहा, ‘‘बीबीसी का यह मकसद है कि वह उच्च गुणवत्ता वाली तटस्थ और संपादकीय रूप से स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय खबरों का सबसे जाना पहचाना और सबसे विसनीय प्रदाता बना रहे.’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम वि में बड़ी संख्या में फैले दर्शकों और श्रोताओं तक बीबीसी के अनुभव, परिप्रेक्ष्य और उस सामग्री को पहुंचाना जारी रखेंगे जिससे ब्रिटेन तथा उसकी जनता पर असर झलकता है.’’
बीबीसी रेडियो 4 के टूडे कार्यक्रम में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के महासचिव जेरेमी डीयर’ ने कहा कि वर्ल्डसर्विस जरूरी है और उसे बचाया जाना चाहिये.
यूनियन ने कहा कि वह मध्य लंदन स्थित वर्ल्ड सर्विस के मुख्यालय के बाहर धरना देंगे. डीयर ने कहा, ‘‘एक मूल्यवान राष्ट्रीय सेवा में ये कठोर कटौतियां आखिरकार गठबंधन सरकार की जिम्मेदारी है जिसकी नीतियों से ब्रिटेन की गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को नुकसान पहुंच रहा है.’’
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