Monday, January 31, 2011

मेरा काम आशीर्वाद देना है, पैसों का हिसाब-किताब रखना नहीं...


धर्मशाला ‘मैं बौद्ध भिक्षु हूं। मेरी दिनचर्या बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने और अनुयायियों को आशीर्वाद देने तक ही सीमित है। अनुयायियों से मिले चढ़ावे और अन्य उपहारों का हिसाब-किताब मैं नहीं रखता। यह हिसाब लवरंग तशरुफू के अधिकारी और कर्मचारी रखते हैं।’ यह जवाब करमापा ने विशेष जांच दल को दिया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति पर यह टीम करमापा से सिद्धबाड़ी स्थित ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय के अस्थायी निवास स्थान में करमापा से पूछताछ करने पहुंची थी। टीम का नेतृत्व ऊना के एएसपी केजी कपूर और डीएसपी सुरेंद्र शर्मा ने किया। पुलिस ने करमापा से उनके कार्यालय से बरामद विदेशी मुद्रा और जमीन खरीद-फरोख्त मामले में 50 सवाल पूछे। अधिकतर सवालों के जवाब में करमापा ने अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने सिर्फ यही कहा, ‘इसके जवाब वित्त अधिकारियों को ही मालूम होंगे। हिसाब-किताब में कोई गड़बड़ी है तो इसके लिए वित्त शाखा जिम्मेदार है।’ कपूर ने करमापा के जवाबों पर असंतोष जताते हुए कहा कि उनसे दोबारा पूछताछ संभव है।

 आईबी और रॉ की जांच शुरू:

जांच अधिकारियों ने बताया कि करमापा के खिलाफ विदेशी मुद्रा कानून के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है। इसके लिए आईबी और रॉ के अधिकारी धर्मशाला पहुंचकर जांच शुरू कर चुके हैं। पुलिस ने अब तक करमापा कार्यालय से जमीन खरीदी के दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, कंप्यूटर और लैपटॉप को कब्जे में लिया है। रविवार को ऊना पुलिस ने दिल्ली स्थित मजनूं का टीला, धर्मशाला के कुछ नामी-गिरामी होटलों और रेस्टोरेंट्स में दबिश दी। चंडीगढ़ से आईबी के आईआईटी विशेषज्ञों ने करमापा कार्यालय के कंप्यूटर और लैपटॉप में मिले डाटा की जांच की। दलाई लामा ने चीन पर दागे आरोपों के मिसाइल डीएनए नेटवर्क. बेंगलुरू तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि करमापा लापा के अस्थाई निवास से विदेशी मुद्रा बरामद होने के पीछे चीन का हाथ हो सकता है। दलाई लामा ने रविवार को चित्रदुर्ग में कहा कि धर्मशाला में चीन के बहुत से अनुयायी रहते हैं। संभव है कि पैसा बरामदगी में उनकी भूमिका हो। फिर बेंगलुरू के नेशनल कॉलेज ग्राउंड में धर्मगुरु ने कहा, ‘चीन सरकार के दमन के बावजूद वहां बौद्ध धर्म के अनुयायी बढ़ते जा रहे हैं। चीन निवासी तिब्बतियों के अनुसार वहां कम से कम 30 करोड़ बौद्ध हैं।’ उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था खुलने और विकास के बाद मजबूरी में चीन को धार्मिक रूप से सहिष्णु होना पड़ा है।

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