Wednesday, February 16, 2011

प्लीज.. 'आदर्श' सोसायटी को मत गिराओ

मुंबई। कारगिल शहीदों की याद में बनीं आदर्श सोसायटी आज देश के सबसे बड़े घोटालों की शक्ल में तब्दील हो चुकी है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस अवैध बताते हुए पहले ही गिराने के आदेश दे दिया है, जिसके खिलाफ आदर्श सोयायटी के सदस्यों ने इमारत ना गिराये जाने की अपील की है, और इसी सिलसिले में उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के आदेश को बम्बई उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

गौरतलब है कि पर्यावरण मंत्रालय ने बीते 16 जनवरी को कहा था कि आदर्श इमारत तटीय नियमों के नजरअंदाज करके बनीं है जिसके चलते इसका निर्माण अवैध और गलत है इसलिए उसने 31 मंजिली इमारत को गिरा देना चाहिए।

पढ़े : तत्काल गिराओ आदर्श सोसाइटी की 'आदर्श इमारत' : पर्यावरण मंत्रालय

इमारत को बचाने के प्रयास के तहत सोसायटी के लगभग 103 सदस्यों ने सोमवार को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और मंत्रालय के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी कि यह ‘कानूनन गलत’ है। आपको बता दें कि अमित नाईक की विधि कंपनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सोसायटी के लिए सरकार के सभी संबंधित विभागों से मंजूरी ली गई थी।

जैसा कि आपको पता है कि कारगिल शहीदों के परिजनों के लिए बनाई गई यह बहुमंजिला इमारत इन खबरों के बाद सुखिर्यों में आ गई थी कि इसमें बने फ्लैट शहीदों के परिजनों की बजाय राजनेताओं दो पूर्व सेना प्रमुखों सहित शीर्ष रक्षा अधिकारियों नौकरशाहों तथा उनके परिवारों को आवंटित कर दिए गए। इस मामले के चलते महाराष्ट्र के पूर्व मु्ख्यमंत्री अशोक चव्हाण को अपनी सीएम की सीट छोड़नी पड़ी थी।

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