Wednesday, February 16, 2011

सचिन का वादा, वर्ल्ड कप में दिखेगा ब्लास्ट

मनोज नायर।। नई दिल्ली
बेगलुरु के आईटीसी रॉयल गार्डेनिया होटेल के रूम नंबर 2033 का दरवाजा खोलते ही क्रिकेट की दुनिया का देवता माने जाना वाला यह शख्स कमरे के अंदर के अस्त-व्यस्त हालात के लिए क्षमा मांगता है। इससे साफ हो जाता है कि सचिन रमेश तेंडुलकर में विनम्रता कूट-कूट कर भरी है, जिसके बारे में पूरी दुनिया जानती है।

ब्लू रंग की ड्रेस पहने अपने टीम के साथियों की ओर इशारा करते हुए तेंदुलकर धीरे से कहते हैं, 'ये लड़के बावले हैं।' भारतीय टीम के ये क्रिकेटर गाहे-बगाहे वर्ल्ड कप जीतने की बातें करते रहते हैं। सचिन कहते हैं, 'ये सिर्फ मुझे कुछ गिफ्ट देने की बातें करते हैं।' पूरा देश इस बार वर्ल्ड कप जीतना चाहता है। लेकिन, इससे पहले के पांच वर्ल्ड कप से अलग इस बार भारतीय टीम के सदस्यों में सचिन को यह कप भेंट करने की उतनी ही ललक है, जितनी उनमें खुद के लिए इस कप को हासिल करने की ललक है। निश्चित रूप से बतौर टीम सदस्य यह सचिन के लिए आखिरी वर्ल्ड कप होगा।

सचिन वर्ल्ड कप के लिए भारत के अभियान में अपने महत्व को बढ़ा-चढ़ा कर नहीं दिखाना चाहते। लेकिन, वह इस बारे में बातचीत करने से जितना ज्यादा बचना चाहते हैं, उतनी ही ज्यादा बातें उन्हें लेकर होती हैं। वह ऐसे दिखते हैं, जैसे कोई और व्यक्ति है, जो फैसले लेने का काम करता है। अपनी भाव-भंगिमा से वह यह साफ कर देते हैं कि वर्ल्ड कप में अपना जौहर दिखाने के लिए वह और इंतजार नहीं कर सकते। सचिन कैमरा के लिए आक्रामक मुदा बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कर नहीं पाते। वह अपना सीना ठोंकते हुए कहते हैं, 'यह मेरे अंदर है। जब मैं गेंद का सामना करूंगा यह बाहर आ जाएगी। आपको इस वर्ल्ड कप में निश्चित रूप से काफी आक्रामकता देखने को मिलेगी।'

यदि उनके इस बयान को मुकाबले के अगले 40 दिनों के लिए उनकी रणनीति का संकेत माना जाए तो देश को फिर से उनकी आतिशी बल्लेबाजी देखने को मिल सकती है। हाल में उन्होंने नपा-तुला और कम जोखिम वाली बल्लेबाजी दिखाई है। यह सवाल वाकई मजेदार है कि क्या वह फिर अपने पुराने रूप में दिखाई देंगे?

पूर्व ऑल-राउंडर मोहिंदर अमरनाथ ने कहा, 'इस बार भारत की दावेदारी बहुत हद तक सचिन की आक्रामकता पर निर्भर करेगी।' तेंडुलकर ने वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन (1,562) पिछले साल यानी 2010 में बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 55.90 रहा है और उन्होंने 7 शतक ठोंके। हाल में घायल होने के चलते दक्षिण अफ्रीका की सीरीज से लौटने से पहले 2009 और 2011 के बीच उनकी स्ट्राइक रेट को देख कर उनके खेल का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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