नई दिल्ली. घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से बुरी तरह घिर चुकी यूपीए सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज जब सफाई पेश की तो इस बार भी उन्होंने गठबंधन की मजबूरी बताते हुए कोई ठोस जवाब नहीं दिया लेकिन यह माना कि गठबंधन की राजनीति के चलते कुछ समझौते करने पड़े हैं। पीएम की यह सफाई विपक्ष को रास नहीं आई। भाजपा ने एनडीए के शासन में पीएम रहे अटल बिहारी बाजपेयी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी गठबंधन की सरकार चलाई थी।
न्यूज चैनलों के संपादकों के साथ पीएम आवास पर प्रेस कांफ्रेंस में मनमोहन सिंह ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हमने ए. राजा को पत्र लिखा था। लेकिन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति पर मुझसे उनकी बात नहीं हुई।’ उन्होंने बताया कि राजा ने भरोसा दिलाया था कि वह नियम का पूरी तरह पालन करेंगे।
2जी घोटाले सहित बड़े घपलों की जांच जेपीसी से कराए जाने की विपक्ष की मांग के बीच प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि वह जेपीसी सहित किसी भी जांच समिति के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि घोटालों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
एस-बैंड घोटाले पर पीएम ने कहा कि देवास-इसरो डील में परदे के पीछे कोई बात नहीं हुई। गठबंधन धर्म निभाने का राग अलापते हुए एक बार पीएम ने कहा, ‘गठबंधन की मजबूरी के चलते ए राजा मंत्री बने। वह डीएमके की पसंद थे। गठबंधन की कुछ मजबूरियां हैं और जैसा मैं चाहूं, वैसा ही तो नहीं हो सकता है।’
पीएम ने अपनी गलतियां मानी लेकिन कहा कि इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा, ‘एक साझा सरकार की कुछ मजबूरियां होती हैं। लेकिन मैंने कभी प्रधानमंत्री पद छोडऩे के बारे में नहीं सोचा। मुझे काम करना है। देश ने मुझे प्रधानमंत्री बनाया है। बहुत से काम हैं जो अभी मुझे करने हैं। हमने कभी पीछे हटने की नहीं सोची।’
यह पूछे जाने पर कि सारे घोटालों पर सरकार की नींद तब क्यों खुलती है जब घोटाले मीडिया में सामने आते हैं? पीएम ने हंसते हुए कहा, ‘मैं उतना दोषी नहीं जितना मीडिया ने प्रचार किया है। मुझसे भी गलतियां हुई हैं लेकिन जितना प्रचार किया जा रहा है, उतना दोषी नहीं हूं। देश के सामने यह गलत छवि बन रही है कि मैं जेपीसी बनाने में बाधक हूं।’
केंद्र सरकार पर किसी तरह के खतरे से इनकार करते हुए पीएम ने कहा कि मध्यावधि चुनाव की अटकलें लगाना जल्दबाजी होगी और सरकार पर कोई खतरा नहीं। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा। बजट सत्र को सुचारू रूप से चलने देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
अपनी सरकार की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा कि अलगाववादियों से बातचीत जारी है। उल्फा का उदाहरण देते हुए पीएम ने कहा कि उल्फा नेतृत्व से बातचीत सकारात्मक चल रही है और उन लोगों ने हिंसा छोड़ने का भरोसा दिया है। पीएम ने जम्मू-कश्मीर में रोजगार के साधन बढ़ाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि आतंरिक सुरक्षा के मोर्चे पर सफलता का श्रेय यूपीए सरकार को जाता है।
विपक्ष ने साधा निशाना
उधर, भाजपा सहित विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री को एक बार फिर निशाने पर लिया है। पीएम की कांफ्रेंस खत्म होने के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पीएम को यह साफ करना चाहिए कि घोटालों और गठबंधन की मजबूरी के बीच क्या संबंध है? गडकरी ने पूछा कि पीएम गठबंधन धर्म निभाने के बहाने भ्रष्टाचार का बचाव क्यों कर रहे हैं? माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने भी पीएम को निशाने पर लेते हुए कहा कि आखिर पीएम उस वक्त जेपीसी के सामने पेश होने के लिए क्यों नहीं तैयार हुए थे जब इस मांग के चलते संसद का पिछले सत्र में रुकावट पैदा हो रही थी।
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