Wednesday, February 16, 2011

पॉलिसी नहीं चली तो रद्द होगा लाइसेंस

अहमदाबाद। अब बीमा एजेन्टों के लिए केवल जीवन बीमा पॉलिसी बेचना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसका चलना भी अहम होगा। यदि साल भर पहले की गई पचास फीसदी पॉलिसी रद्द हुई तो बीमा एजेन्ट के लाइसेंस पर गाज गिरेगी। भारतीय बीमा विनियामक व विकास प्राधिकरण (इरडा) ने इस सम्बन्ध मे दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। ये दिशा निर्देश एक जुलाई से प्रभावी हो जाएंगे। इरडा के नए दिशा निर्देशों से करीब 27 लाख एजेन्ट प्रभावित होंगे।

नए दिशा निर्देशों में जीवन बीमा कम्पनियों के प्रमुखों को साफ कर दिया गया है कि यदि किसी एजेन्ट द्वारा एक साल पहले बेची गई पॉलिसियों में से पचास फीसदी से ज्यादा का अगले साल नवनीकरण नहीं कराया जाता है तो उस एजेन्ट का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। ध्यान रहे कि गत सितम्बर में सबसे ज्यादा बिकने वाली यूलिप के मामले में किए गए बड़े बदलावों के बाद बीमा कम्पनियां पहले से ही नया कारोबार जुटाने के लिए जूझ रही हैं।

यूलिप में व्यापक बदलाव के बाद एजेन्टों को मिलने वाले कमीशन में कमी कर दी गई थी। इरडा ने गत जुलाई में ही जीवन बीमा एजेन्टों के लिए हर साल न्यूनतम बीस पॉलिसियां बेचना तथा डेढ़ लाख रूपए का प्रीमियम जुटाना अनिवार्य कर दिया था। नए दिशा निर्देशों के तहत वित्त वर्ष 2011-12, 2012-13, 2013-14 में न्यूनतम पचास फीसदी पॉलिसी का नवीनीकरण अनिवार्य किया गया है तो वित्त वर्ष 2014-45 से हर एजेन्ट के लिए पॉलिसी तथा प्रीमियम के मामले में 75 फीसदी की दर तय की गई है।

एजेन्ट को साल भर में बेची गई विभिन्न पॉलिसियों तथा इनमें की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा रखना होगा व इस रिकार्ड को साल के अंत में बीमा कम्पनी से अनुमोदित कराना होगा।

इरडा के कड़े रूख के चलते जहां एक साल पहले देश में बीमा एजेन्टों की संख्या करीब 29 लाख थी जो अब दो लाख घट कर करीब 27 लाख रह गई है। यही नहीं जीवन बीमा परिषद के नवीनतम आंकड़े दर्शाते हैं कि इस वर्ष अप्रेल से दिसम्बर की अवधि में एजेन्टों को दिए गए कमीशन में 5.88 फीसदी की कमी आई है। इस वर्ष अप्रेल-दिसम्बर के दौरान कुल 186285 करोड़ रूपए के प्रीमियम एकत्रित किए गए तथा एजेन्टों को कमीशन के रूप में 10954 करोड़ रूपए मिले। नए कारोबार के मायनों में नए जीवनबीमा कारोबार में गत दिसम्बर के मुकाबले बीस फीसदी की कमी आई है।

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