Tuesday, February 22, 2011

शादी में मेहमान बुलाने पर लगेगी पाबंदी, पर खुले में सड़ रहे अनाज का क्‍या?


नई दिल्‍ली. देश में शादियों पर होने वाले बेहिसाब खर्च पर लगाम कसने की सरकार की तैयारी पर लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। शादी-बारात में खाना बर्बाद न हो इसके लिए सरकार इन समारोहों में शरीक होने वाले मेहमानों की संख्‍या सीमित करने पर विचार कर रही है। सरकार का यह विचार अधिकतर लोगों को रास आ रहा है तो कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को अन्‍न की बर्बादी रोकने के लिए शादी में आने पर मेहमानों की संख्‍या पर पाबंदी लगाने के बजाय कुछ और इंतजाम करने चाहिए।

खाद्य एवं उपभोक्‍ता मामले मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक सरकार शादी में शामिल होने वाले मेहमानों की संख्‍या सीमित करने पर विचार कर रही है जैसा 1960 के दशक में हुआ था। ऐसा करने से खाद्य पदार्थों की कमी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि अधिकारी ने यह भी कहा कि आज मसला अन्‍न की कमी का नहीं है बल्कि शादी जैसे समारोहों में बड़ी मात्रा में खाने का सामान बर्बाद हो जाता है।

भाजपा ने ऐसे किसी कदम की कड़ी आलोचना की है। पार्टी प्रवक्‍ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह बेहद बकवास प्रस्‍ताव है। हाल में एफसीआई के गोदामों में अनाज सड़ने की कई घटनाएं सामने आई हैं जिसने सरकारी इंतजामों की पोल खोल कर रख दी।

खाद्य एवं उपभोक्‍ता मामलों के मंत्री के वी थॉमस के मुताबिक देश में कुल अनाज और सब्जियों का करीब 15 फीसदी हिस्‍सा शादियों और अन्‍य समारोहों में बर्बाद हो जाता है। थॉमस के अनुसार ऐसे समारोहों में इन वस्‍तुओं के इस्‍तेमाल पर रोक लगाकर इनकी बर्बादी रोकी जा सकती है और इसे गरीबों में बांटने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

अमेरिका और ब्रिटेन में हालत बेहद खराब

अमेरिका और ब्रिटेन में प्रसिद्ध पर्यावरणविद ट्रींस्ट्रंम स्टुअर्ट की पुस्तक 'वेस्ट : अनकवरिंग द ग्लोबल फूड स्कैंडल' में भोजन की भयानक बर्बादी के घोटाले का खुलासा किया गया था। कई वर्ष तक विकसित और विकासशील देशों के संपन्न लोगों की भोजन की आदतों का अध्ययन के बाद तैयार इस शोधग्रंथ में कहा गया कि अमेरिका और ब्रिटेन में संपन्न लोग जितना खाना बर्बाद करते है उससे संसार के 1.5 अरब भूखे लोगों को भरपेट खाना खिलाया जा सकता है। पश्चिम के देशों, खासकर अमेरिका और ब्रिटेन में संपन्न लोग रेस्त्रां में थोड़ा-बहुत खाना खाकर शेष छोड़ देते है। वे एक पल के लिए भी नहीं सोचते कि इस भोजन को बनाने में विभिन्न स्तरों पर कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी। यदि इस बचे हुए भोजन को गरीब लोगों को खिला दिया जाता तो इसका सदुपयोग हो जाता, परंतु रेस्त्रां के मालिक इस बचे हुए भोजन को कूड़ेदान में डाल देते है।

भर लेते पूरा प्‍लेट, खाते हैं थोड़ा

खाने की बर्बादी के मामले में भारत की स्थिति पश्चिम के संपन्न देशों से ज्यादा अच्छी नहीं है। जिन लोगों ने दिल्ली के पांच सितारा होटलों में नवधनाढ्य लोगों को शादी की दावत देते हुए देखा होगा वे अच्छी तरह समझ गए होंगे कि वहां खाने की कितनी बर्बादी होती है। भारत में एक शहर में ही कभी-कभी हजारों शादियां एक ही दिन होती हैं। अपने मेजबान को प्रसन्न करने के लिए लोग अपनी प्लेट में खाने के अक्‍सर सभी सामान भर लेते हैं और थोड़ा सा खाकर प्लेट को कूड़ेदान में डाल देते हैं। आम तौर पर वे ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें इसका अहसास ही नहीं होता कि वे खाने की बर्बादी कर रहे हैं और जितना खाना उन्होंने बर्बाद किया उससे किसी अन्य

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