अक्सर हम अपने आस-पास देखते हैं कि कोई व्यक्ति बहुत पैसा कमाता है। किंतु उसका वही धन बहुत जल्दी किसी न किसी कारण से खर्च भी हो जाता है। हालांकि वह कमाए धन से कुछ समय तो सुख और सुविधा पाता है, लेकिन उससे कहीं भी अधिक दु:ख से दो-चार होता रहता है। ये कष्ट शारीरिक हानि, दुघर्टना, वाद-विवाद या परिवारिक सदस्यों के रोगी होने के रूप में सामने आते हैं।
सवाल यही उठता है कि आखिर क्यों इंसान को ऐसी हालात से गुजरता पड़ता है? जिसका व्यावहारिक जवाब आज के माहौल को सामने रखकर यही मिलता है कि चूंकि आज महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति की चाहत में हर व्यक्ति खुद को बचाकर दूसरे के आचरण में दोष ढ़ूंढ रहा है, जबकि इस बात को अनदेखा करता रहता है कि वह खुद भी उसी गलत व्यवस्था में शामिल हो उसका हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि व्यक्ति बिना अच्छे-बुरे कामों का विचार किए पैसा कमाता है और उनसे मिलने वाली परेशानियों से जूझता रहता है।
वहीं हिन्दू धर्म शास्त्रों में घर में लक्ष्मी न टिकने का कारण और उससे मिली दरिद्रता का कारण बहुत सटीक बताया गया है। जानते हैं महाभारत में बताई ऐसी बात को। जिसके मुताबिक -
प्रध्वंसिनी क्रूरसमाहिता श्रीर्मृदुप्रौढा गच्छति पुत्रपौत्रान्।।
इसका सरल शब्दों में मतलब है कि क्रूरतापूर्वक यानि गलत तरीके या कामों से कमाई लक्ष्मी या धन नाशवान होता है। ऐसा धन किसी भी कारण या रूप में खर्च हो जाता है। जबकि इसके विपरीत मृदुलता यानि सच और ईमानदारी से किए गए काम से पाया धन सुख और समृद्धि लाता है। यहां तक कि उसके सुख पुत्र, पौत्र और अगली पीढ़ीयों को जरूर मिलता है।
सवाल यही उठता है कि आखिर क्यों इंसान को ऐसी हालात से गुजरता पड़ता है? जिसका व्यावहारिक जवाब आज के माहौल को सामने रखकर यही मिलता है कि चूंकि आज महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति की चाहत में हर व्यक्ति खुद को बचाकर दूसरे के आचरण में दोष ढ़ूंढ रहा है, जबकि इस बात को अनदेखा करता रहता है कि वह खुद भी उसी गलत व्यवस्था में शामिल हो उसका हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि व्यक्ति बिना अच्छे-बुरे कामों का विचार किए पैसा कमाता है और उनसे मिलने वाली परेशानियों से जूझता रहता है।
वहीं हिन्दू धर्म शास्त्रों में घर में लक्ष्मी न टिकने का कारण और उससे मिली दरिद्रता का कारण बहुत सटीक बताया गया है। जानते हैं महाभारत में बताई ऐसी बात को। जिसके मुताबिक -
प्रध्वंसिनी क्रूरसमाहिता श्रीर्मृदुप्रौढा गच्छति पुत्रपौत्रान्।।
इसका सरल शब्दों में मतलब है कि क्रूरतापूर्वक यानि गलत तरीके या कामों से कमाई लक्ष्मी या धन नाशवान होता है। ऐसा धन किसी भी कारण या रूप में खर्च हो जाता है। जबकि इसके विपरीत मृदुलता यानि सच और ईमानदारी से किए गए काम से पाया धन सुख और समृद्धि लाता है। यहां तक कि उसके सुख पुत्र, पौत्र और अगली पीढ़ीयों को जरूर मिलता है।
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