वित्त मंत्रालय आखिरकार कर्मचारियों को प्रॉविडेंट फंड पर बढ़ा हुआ ब्याज देने को तैयार हो गया है। इस बावत मंत्रालय किसी भी वक्त श्रम मंत्रालय के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दे सकता है।
श्रम सचिव पीसी चतुर्वेदी ने मंगलवार को बताया कि इस बारे में वित्त मंत्रालय की स्वीकरोक्ति 31 मार्च तक आ जागी। वे ट्रस्टियों की बैठक के पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
वित्त मंत्रालय की बेरुखी से निराश प्रॉविडेंट फंड ट्रस्टियों ने प्रधान मंत्री का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया था। उनकी मांग थी कि प्रॉविडेंट फंड पर ब्याज दरों को बढ़ाकर 9.5 फीसदी करने के मामले को सरकार तुरंत हरी झंडी दिखाए।
2010-11 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ पर ब्याज दरें बढाकर 9.5 प्रतिशत करने का फैसला किया था। उस बैठक में श्रम मंत्री भी मौजूद थे और भारत सरकार के श्रम सचिव ने आश्वासन दिया था कि ब्याज दरें बढ़कर रहेंगी। लेकिन वित्त मंत्रालय ने इस पर पानी फेर दिया और कहा कि इतना ब्याज देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। ईपीएफओ का कहना था कि बढे हुए ब्याज के लिए पैसा वहां पड़े तकरीबन 1731 करोड़ रुपए से आएगा जिसका कोई लेनदार
श्रम सचिव पीसी चतुर्वेदी ने मंगलवार को बताया कि इस बारे में वित्त मंत्रालय की स्वीकरोक्ति 31 मार्च तक आ जागी। वे ट्रस्टियों की बैठक के पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
वित्त मंत्रालय की बेरुखी से निराश प्रॉविडेंट फंड ट्रस्टियों ने प्रधान मंत्री का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया था। उनकी मांग थी कि प्रॉविडेंट फंड पर ब्याज दरों को बढ़ाकर 9.5 फीसदी करने के मामले को सरकार तुरंत हरी झंडी दिखाए।
2010-11 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ पर ब्याज दरें बढाकर 9.5 प्रतिशत करने का फैसला किया था। उस बैठक में श्रम मंत्री भी मौजूद थे और भारत सरकार के श्रम सचिव ने आश्वासन दिया था कि ब्याज दरें बढ़कर रहेंगी। लेकिन वित्त मंत्रालय ने इस पर पानी फेर दिया और कहा कि इतना ब्याज देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। ईपीएफओ का कहना था कि बढे हुए ब्याज के लिए पैसा वहां पड़े तकरीबन 1731 करोड़ रुपए से आएगा जिसका कोई लेनदार
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