Sunday, February 20, 2011

छोटा व सरल होगा आइपीओ का फार्म!

नई दिल्ली। जल्दी ही आइपीओ का आवेदन फार्म छोटा और सरल हो सकता है। बाजार नियामक सेबी ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को शेयर बाजार से जोड़ने के लिए इस पहल पर विचार कर रहा है। नियामक एएसबीए [एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट] और नॉन-एएसबीए निवेशक दोनों के लिए एक ही जैसे आइपीओ आवेदन पत्र लाने की तैयारी में है। एएसबीए ऐसी कागजरहित सुविधा है जिसमें आवेदन के समय धन को निवेशक के बैंक खाते में ही रखा जाता है और यूनिट के आवंटन के समय ही यह राशि निकाली जाती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेबी द्वारा इस दिशा में कदम उठाने पर चर्चा हो रही है। नियामक का मानना है कि आइपीओ में शेयरों के लिए आवेदन का मौजूदा फार्म अनावश्यक रूप से लंबा है। ज्यादातर मामलों में इस तरह का आवेदन फार्म 15-20 पन्नों का होता है। जबकि निवेशकों को आमतौर पर दो-तीन पन्ने ही भरने होते हैं। शेष पन्नों में कंपनी के बारे में सूचना, निर्देश, बैंक और पंजीयकों की जानकारी सहित अन्य सूचनाएं होती हैं। नियामक प्राथमिक बाजार परामर्श समिति के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
प्रस्ताव के तहत इस फार्म से आवेदक के उस ब्यौरे को हटाया जाना चाहिए जो पहले ही वह डीमैट और बैंक खातों में उपलब्ध करा चुका है। इस पहल से निवेशक द्वारा दी जाने वाली जानकारी आधी रह जाएगी।
सरकार भी पूंजी बाजार में सभी प्रकार के विदेशी निवेश के लिए नियमों को सरल और दुरुस्त बनाने की तैयारी में है। हालांकि वह चाहती है कि विदेशी निवेश कड़ी जाच प्रक्रिया से गुजरे। इस कदम से विदेशी व्यक्तियों और संस्थाओं को भारत में ऋण व शेयर बाजार में सीधे खरीद-फरोख्त की सुविधा मिल सकती है।
अभी विदेशी निवेशक को देश में अपना पंजीकरण कराना होता है। या तो उन्हें भारत में पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशकों, फंडों या प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के माध्यम से ही निवेश करने की अनुमति है।
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