मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट मुंबई हमलों के मामलों में दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब की किस्मत का फैसला आज करेगा। नौ महीने पहले उसे मुंबई हमलों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के आस-पास सुरक्षा घेर बहुत मजबूत कर दिया गया है और कोर्ट के कक्ष क्रमांक 49 में प्रवेश करने के लिए मीडियाकर्मियों को विशेष पास जारी किए गए है।
कसाब के वकील फरहाना शान ने कहा कि वह बहुत कमजोर और थका हुआ लगता है। शायद वह स्वस्थ्य नहीं है। वह मुश्किल से किसी से बात करता है और उसकी वे आदते बदल गई हैं, जिसके लिए वह जाना जाता है। शाह ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सोमवार को मुंबई हाईकोर्ट में कसाब की पेशी को लेकर शनिवार को ऑर्थर रोड स्थित सेंट्रल जेल में उससे छोटी सी मुलाकात की थी। फरहाना ने कहा कि कसाब बहुत गुमसुम, हतोत्साहित और उदास दिख रहा था।
फरहाना ने कहा कि वह कोई अखबार चाहता था लेकिन मेरे पास अखबार नहीं था। उसका घमंड गायब हो गया है। जब मैंने उससे कहा कि फैसले के समय वीडियो कैमरे के सामने उसे मौजूद रहना है, तो वह तुरंत तैयार हो गया। उसके पूर्व के स्वभाव में यह बडा बदलाव था। इसके पहले एक शुरूआती सुनवाई के दौरान उसने हिंसक रूख दिखाया था। उसने तब वीडियो कैमरे पर थूक दिया था।
उसने फांसी की सजा को अस्वीकार कर दिया था और खुद को अमेरिका भेजने की मांग की थी। अब इंजार, न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायमूर्ति आर.वी.मोरे की खण्पीठ के फैसले का है कि कसाब के खिलाफ सुनाए गए मृतयुदंड पर मुहर लगाई जाती है या नहीं।
कसाब के वकील फरहाना शान ने कहा कि वह बहुत कमजोर और थका हुआ लगता है। शायद वह स्वस्थ्य नहीं है। वह मुश्किल से किसी से बात करता है और उसकी वे आदते बदल गई हैं, जिसके लिए वह जाना जाता है। शाह ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सोमवार को मुंबई हाईकोर्ट में कसाब की पेशी को लेकर शनिवार को ऑर्थर रोड स्थित सेंट्रल जेल में उससे छोटी सी मुलाकात की थी। फरहाना ने कहा कि कसाब बहुत गुमसुम, हतोत्साहित और उदास दिख रहा था।
फरहाना ने कहा कि वह कोई अखबार चाहता था लेकिन मेरे पास अखबार नहीं था। उसका घमंड गायब हो गया है। जब मैंने उससे कहा कि फैसले के समय वीडियो कैमरे के सामने उसे मौजूद रहना है, तो वह तुरंत तैयार हो गया। उसके पूर्व के स्वभाव में यह बडा बदलाव था। इसके पहले एक शुरूआती सुनवाई के दौरान उसने हिंसक रूख दिखाया था। उसने तब वीडियो कैमरे पर थूक दिया था।
उसने फांसी की सजा को अस्वीकार कर दिया था और खुद को अमेरिका भेजने की मांग की थी। अब इंजार, न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायमूर्ति आर.वी.मोरे की खण्पीठ के फैसले का है कि कसाब के खिलाफ सुनाए गए मृतयुदंड पर मुहर लगाई जाती है या नहीं।
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