नहीं बच पाएंगें एनएसई की निगाह से
क्लाइंट को सामने बुलाकर करना होगा ब्रोकरों को वैरिफिकेशन
ब्रोकर को क्लाइंट्स के कौलेरटल का रखना होगा रिकॉर्ड
अनैतिक तत्वों के निवेश रोकने के लिए उठाया गया है यह कदम
लागू करने के लिए एनएसई द्वारा ट्रेडिंग रेग्युलेशंस में सशोंधन
हर छ महीने में ब्रोकर को कराना होगा बही-खाते का ऑडिट
कोई स्वतंत्र संस्था करेगी ब्रोकर के बही-खाते का ऑडिट
क्लाइंट की पावर ऑफ अटॉर्नी की भी जांच करेगी एक्सचेंज
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने सदस्य ब्रोकरों को साफ कर दिया है कि शेयरों में निवेश से पहले उन्हें अपने सभी क्लाइंट्स के बारे में वैयक्तिक जानकारियां सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, क्लाइंट्स द्वारा उपलब्ध कराई गई सभी कोलैटरल का उचित रिकॉर्ड रखना होगा, ताकि किसी तरह की जांच के समय सभी सही जानकारियां मिल सकें। माना जा रहा है कि अनैतिक काम करने वाले लोगों द्वारा छद्म नाम से निवेश को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
एनएसई द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया कि ब्रोकरों को अपने क्लाइंट्स के बारे में सारी सही जानकारी देने के बाद ही निवेश करने दिया जाएगा। अपने इस कदम को लागू करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने पूंजी बाजार और डेरिवेटिव सेंगमेंट दोनों में ही ट्रेडिंग रेग्युलेशंस में जरूरी सशोंधन किए हैं। इसके अलावा एक अन्य सशोंधन भी किया गया है, जिसके मुताबिक ब्रोकरों को हर छ महीने में किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा अपना बही-खाते का ऑडिट करवाना होगा। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी एनएसई को इसके द्वारा निर्धारित समय और फार्मेट के हिसाब से देनी होगी। मौजूदा समय में सभी ब्रोकरों को प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए अपना सालाना खाता तैयार करना होता है और छ महीने के भीतर इसकी जानकारी एक्सचेंज को देनी होती है।
इसके अलावा एनएसई ने ब्रोकरों द्वारा नए क्लाइंट्स बनाने के नियम भी कड़े कर दिए हैं। मौजूदा समय में ब्रोकरों को नए क्लाइंट्स बनाते समय कई मुनासिब चरणों को पूरा करना होता है। सबसे पहले उनके पृष्ठभूमि के बारे में जानना और यह भी देखना कि वह सच है या नहीं। उनकी आर्थिक स्थिति की सही जानकारी लेना। साथ ही यह भी देखना कि उसके निवेश का उद्देश्य क्या है। नए क्लाइंट बनाते समय एक्सचेंज द्वारा निर्धारित रजिस्ट्रेशन फॉर्म के माध्यम से इस तरह की जानकारी समय-समय पर देनी होती है।
मगर अब क्लाइंट के रजिस्ट्रेशन से पहले ब्रोकर को समय-समय पर एक्सेंज द्वरा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक अपने क्लाइंट की सही पहचान के लिए उसकी वैयक्तिक जानकारी सुनिश्चित करनी होगी। पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत क्लाइंट के बैंक और डीमेट अकाउंट के परिचालन का अधिकार एक्सचेंज द्वारा समय-समय पर जारी नियमों व शर्तों के मुताबिक होगा।
क्लाइंट को सामने बुलाकर करना होगा ब्रोकरों को वैरिफिकेशन
ब्रोकर को क्लाइंट्स के कौलेरटल का रखना होगा रिकॉर्ड
अनैतिक तत्वों के निवेश रोकने के लिए उठाया गया है यह कदम
लागू करने के लिए एनएसई द्वारा ट्रेडिंग रेग्युलेशंस में सशोंधन
हर छ महीने में ब्रोकर को कराना होगा बही-खाते का ऑडिट
कोई स्वतंत्र संस्था करेगी ब्रोकर के बही-खाते का ऑडिट
क्लाइंट की पावर ऑफ अटॉर्नी की भी जांच करेगी एक्सचेंज
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने सदस्य ब्रोकरों को साफ कर दिया है कि शेयरों में निवेश से पहले उन्हें अपने सभी क्लाइंट्स के बारे में वैयक्तिक जानकारियां सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, क्लाइंट्स द्वारा उपलब्ध कराई गई सभी कोलैटरल का उचित रिकॉर्ड रखना होगा, ताकि किसी तरह की जांच के समय सभी सही जानकारियां मिल सकें। माना जा रहा है कि अनैतिक काम करने वाले लोगों द्वारा छद्म नाम से निवेश को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
एनएसई द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया कि ब्रोकरों को अपने क्लाइंट्स के बारे में सारी सही जानकारी देने के बाद ही निवेश करने दिया जाएगा। अपने इस कदम को लागू करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने पूंजी बाजार और डेरिवेटिव सेंगमेंट दोनों में ही ट्रेडिंग रेग्युलेशंस में जरूरी सशोंधन किए हैं। इसके अलावा एक अन्य सशोंधन भी किया गया है, जिसके मुताबिक ब्रोकरों को हर छ महीने में किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा अपना बही-खाते का ऑडिट करवाना होगा। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी एनएसई को इसके द्वारा निर्धारित समय और फार्मेट के हिसाब से देनी होगी। मौजूदा समय में सभी ब्रोकरों को प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए अपना सालाना खाता तैयार करना होता है और छ महीने के भीतर इसकी जानकारी एक्सचेंज को देनी होती है।
इसके अलावा एनएसई ने ब्रोकरों द्वारा नए क्लाइंट्स बनाने के नियम भी कड़े कर दिए हैं। मौजूदा समय में ब्रोकरों को नए क्लाइंट्स बनाते समय कई मुनासिब चरणों को पूरा करना होता है। सबसे पहले उनके पृष्ठभूमि के बारे में जानना और यह भी देखना कि वह सच है या नहीं। उनकी आर्थिक स्थिति की सही जानकारी लेना। साथ ही यह भी देखना कि उसके निवेश का उद्देश्य क्या है। नए क्लाइंट बनाते समय एक्सचेंज द्वारा निर्धारित रजिस्ट्रेशन फॉर्म के माध्यम से इस तरह की जानकारी समय-समय पर देनी होती है।
मगर अब क्लाइंट के रजिस्ट्रेशन से पहले ब्रोकर को समय-समय पर एक्सेंज द्वरा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक अपने क्लाइंट की सही पहचान के लिए उसकी वैयक्तिक जानकारी सुनिश्चित करनी होगी। पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत क्लाइंट के बैंक और डीमेट अकाउंट के परिचालन का अधिकार एक्सचेंज द्वारा समय-समय पर जारी नियमों व शर्तों के मुताबिक होगा।
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