शनिवार ऐसा दिन होता है, जब धर्म और ईश्वर में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति देव उपासना से जीवन में आ रही तमाम मुश्किलों को दूर करने के साथ-साथ बदनसीबी से छुटकारा पा सकता है। क्योंकि यह दिन एक ऐसे देवता के स्मरण का दिन है, जिनकी प्रसन्नता न केवल भाग्य के दरवाजे खोल देती है, बल्कि दु:ख और पीड़ा दूर करती है। वह देवता हैं - शनि।
शास्त्रों के मुताबिक शनि न्याय के देवता माने गए हैं। यही कारण है कि दण्डाधिकारी होने से उनक स्वभाव क्रूर भी बताया गया है। किंतु असल में वह अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार ही सजा देते हैं, जो सांसारिक जीवन में इंसान दु:ख और पीड़ा के रूप में भोगता है।
इन कारणों से ही शनिवार, शनि के साढ़े साती या महादशा में शनिदेव की पूजा सुख की कामना से बहुत ही शुभ मानी जाती है।
लोक परंपराओं में शनि के चित्र, शीला, लिंगरूप की पूजा की जाती है। किंतु शास्त्रों में शनि की ऐसे विशेष स्वरूप की मूर्ति पूजा का महत्व बताया गया है, जो तत्काल शनि पीड़ा शांत कर अपार सुख भी देती है। जानते हैं शनि की ऐसी मूर्ति का स्वरूप -
शास्त्रों के मुताबिक शनि कृपा पाने वाले भक्तों को शनि की लोहे की चार भुजाधारी, जो धनुष, भाला और तीर धारण किए हो, की पूजा करनी चाहिए। इस मूर्ति को तिल के तेल या तिलों के ढेर पर रखकर शनि की गंध, अक्षत, काले वस्त्र, काले तिल से पूजा करें।
शास्त्रों के मुताबिक शनि न्याय के देवता माने गए हैं। यही कारण है कि दण्डाधिकारी होने से उनक स्वभाव क्रूर भी बताया गया है। किंतु असल में वह अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार ही सजा देते हैं, जो सांसारिक जीवन में इंसान दु:ख और पीड़ा के रूप में भोगता है।
इन कारणों से ही शनिवार, शनि के साढ़े साती या महादशा में शनिदेव की पूजा सुख की कामना से बहुत ही शुभ मानी जाती है।
लोक परंपराओं में शनि के चित्र, शीला, लिंगरूप की पूजा की जाती है। किंतु शास्त्रों में शनि की ऐसे विशेष स्वरूप की मूर्ति पूजा का महत्व बताया गया है, जो तत्काल शनि पीड़ा शांत कर अपार सुख भी देती है। जानते हैं शनि की ऐसी मूर्ति का स्वरूप -
शास्त्रों के मुताबिक शनि कृपा पाने वाले भक्तों को शनि की लोहे की चार भुजाधारी, जो धनुष, भाला और तीर धारण किए हो, की पूजा करनी चाहिए। इस मूर्ति को तिल के तेल या तिलों के ढेर पर रखकर शनि की गंध, अक्षत, काले वस्त्र, काले तिल से पूजा करें।
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