सनातन धर्म में माना जाता है कि ईश्वर के अनेक मंगलकारी रूप हैं। ऐसे ही विघ्रों का नाश करके जगत को सुख देने वाला रूप श्री गणेश का माना जाता है। वह विद्या और बुद्धिदाता हैं। वहीं आशुतोष यानि शिव के पुत्र होने से उनकी तरह ही सामान्य पूजा से ही प्रसन्न होने वाले माने जाते हैं। किंतु उनकी पूजा के लिए शास्त्रों में लिखी कुछ बातों का पालन भी जरूर करें।
जानते हैं क्या हैं गणेश पूजा के लिए शास्त्रों में लिखी बातें -
- यज्ञोपवीत यानि जनेऊ पहनने वाले वेद और पुराण दोनों मंत्रों से पूजा कर सकते हैं।
- जनेऊ न पहनने वाले केवल पुराण मंत्रों से श्री गणेश पूजन करें।
- सुबह का समय श्री गणेश पूजा के लिए श्रेष्ठ है। किंतु सुबह, दोपहर और शाम तीनों ही वक्त श्री गणेश का पूजन करें।
- तीनों समय पूजा कर पाना संभव न हो तो सुबह ही पूरे विधि-विधान से श्री गणेश की पूजा कर लें। वहीं दोपहर और शाम को मात्र फूल अर्पित कर पूजा की जा सकती है।
- श्री गणेश को दूर्वा जरूर चढ़ाएं।
- तुलसीदल श्री गणेश को न चढ़ाएं।
- तुलसी को छोड़कर सभी तरह के फूल श्री गणेश को अर्पित किए जा सकते हैं।
- सिंदूर, घी का दीप और मोदक भी पूजा में अर्पित करें।
जानते हैं क्या हैं गणेश पूजा के लिए शास्त्रों में लिखी बातें -
- यज्ञोपवीत यानि जनेऊ पहनने वाले वेद और पुराण दोनों मंत्रों से पूजा कर सकते हैं।
- जनेऊ न पहनने वाले केवल पुराण मंत्रों से श्री गणेश पूजन करें।
- सुबह का समय श्री गणेश पूजा के लिए श्रेष्ठ है। किंतु सुबह, दोपहर और शाम तीनों ही वक्त श्री गणेश का पूजन करें।
- तीनों समय पूजा कर पाना संभव न हो तो सुबह ही पूरे विधि-विधान से श्री गणेश की पूजा कर लें। वहीं दोपहर और शाम को मात्र फूल अर्पित कर पूजा की जा सकती है।
- श्री गणेश को दूर्वा जरूर चढ़ाएं।
- तुलसीदल श्री गणेश को न चढ़ाएं।
- तुलसी को छोड़कर सभी तरह के फूल श्री गणेश को अर्पित किए जा सकते हैं।
- सिंदूर, घी का दीप और मोदक भी पूजा में अर्पित करें।
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