Monday, February 7, 2011

ऑस्कर की दहलीज तक पहुंचना ही बड़ी उपलब्धि: अनुषा

नई दिल्ली। देश में किसानों की हालत पर केंद्रित पीपली लाइव का निर्देशन कर सुर्खियों में आईं युवा फिल्मकार अनुषा रिजवी को फिल्म के ऑस्कर की दौड़ से बाहर हो जाने का कोई मलाल नहीं है। बकौल अनुषा फिल्म का ऑस्कर की दहलीज पर दस्तक देना ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पीपली लाइव इस वर्ष भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजी गई थी लेकिन शीर्ष अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की विदेशी भाषा श्रेणी की दौड़ से हाल ही में यह बाहर हो गई।
इस पर अनुषा ने कहा, मुझे नहीं लगता कि कोई फिल्मकार ऑस्कर या किसी और प्रतिष्ठित पुरस्कार को ध्यान में रखकर फिल्म बनाता है। पीपली लाइव को मैंने ऑस्कर पाने के लिए निर्देशित नहीं किया था। उन्होंने कहा, यह फिल्म देश की ही व्यवस्था और मीडिया के रवैए पर कड़ा कटाक्ष करती है, लेकिन इसके बावजूद यह ऑस्कर के लिए देश की आधिकारिक प्रविष्टि रही। ..मैं इसे बड़ी बात मानती हूं। फिल्म को भले ही ऑस्कर नहीं मिला हो लेकिन यह ऑस्कर की दहलीज तक पहुंची। यही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
फिल्म आलोचकों द्वारा सराही गई पीपली लाइव गैर व्यावसायिक फिल्म थी लेकिन इसके बावजूद यह मुनाफे में रही और इसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार किया। हालांकि, अपने खाते में एक जबर्दस्त कामयाब फिल्म जोड़ चुकीं अनुषा भविष्य की योजनाओं को लेकर काफी सजग हैं और इस बारे में अभी कुछ भी खुलासा नहीं करना चाहतीं। अनुषा ने कहा, जब जो कहानी या विषय पसंद आ जाएगा, मैं उस पर फिल्म बनाने के बारे में सोचूंगी।
पीपली लाइव निर्देशित करने के दौरान हुए तजुर्बों के बारे में पूछने पर अनुषा ने कहा, हमने मुंबई में बैठकर किसी सेट पर फिल्म नहीं बनाई। फिल्म के विषय को देखते हुए हमने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले को चुना जहां बीते तीन वर्ष से बारिश नहीं हुई है और जिसके चलते इलाके के किसान परेशान हैं।
उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि पीपली लाइव कोई आसान फिल्म नहीं है। इसके जरिए जो मुद्दे सामने रखे गए हैं, उन्हें समझने के लिए आपको एक बार से ज्यादा फिल्म देखने की जरूरत है। इस सवाल पर कि क्या उन्हें यह नहीं लगता कि पीपली लाइव किसानों की दशा और व्यवस्था पर कामयाबी से कटाक्ष तो कर पाई लेकिन कोई समाधान नहीं बता पाई, अनुषा ने कहा, इस देश में करोड़ों किसान हैं और उनके मसले काफी गंभीर हैं। जब नामी अर्थशास्त्री और कृषि विशेषज्ञ किसानों के मसलों का कोई मुकम्मल हल नहीं बता पाए तो महज एक फिल्म से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती।
मौका मिलने पर फिल्म जगत की किन हस्तियों के साथ काम करना चाहेंगी, इस पर अनुषा बताती हैं, मैं तीन हस्तियों से काफी ज्यादा प्रेरणा पाती हूं। उनमें से दो हैं सत्यजीत राय और ऋत्विक घटक जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। तीसरी हस्ती हैं सुधीर मिश्रा जो अपनी हर फिल्म में कुछ अलग पेश करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे महान फिल्मकार हुए हैं जिन्होंने समानांतर सिनेमा को नई गति और दिशा दी है लेकिन व्यावसायिक सिनेमा के चलते खासकर बीते दो दशक में समानांतर या कलात्मक सिनेमा के महत्व को भुला दिया गया है।

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