कुमाऊं के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पेंशन योजनाओं में धांधली की जांच अब निष्कर्ष पर पहुंच गई है। मांग का सिंदूर कागजों में धोकर विधवा पेंशन हड़पने के 38 मामले सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा तो 50 ऐसे मामले भी सामने आए जिन्होंने मांग में चटक सिंदूर लगाकर हाथों में बेहिचक विधवा पेंशन के चेक थाम लिए। मजे की बात यह है कि इसमें दो सरकारी नौकरी में होने के बाद भी विधवा पेंशन के लिए चयनित कर दी गईं।
अब तक इस तरह के कुल 131 फर्जी पेंशन के मामलों की विभागीय पुष्टि हो गई है। इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मंडल के पिथौरागढ़ जिले के दो गांवों में पांच-छह वर्षो से सधवाओं के विधवा पेंशन लेने का मामला गत दिनों पकड़ में आया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति को जांच व सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस समिति ने प्रारंभिक जांच में दोनों मामले पकड़ लिए। जांच टीम ने पाया कि ग्राम पुरान (कफरकटिया) में जिस द्रोपदी देवी पत्नी फकीराम को विधवा पेंशन दी जा रही है, उसके पति की मृत्यु कागज में 4 मार्च 2006 दर्शाई गई है लेकिन वे जिंदा हैं।इसी गांव की जमुना देवी पत्नी गोपराम के पति की मृत्यु 17 अगस्त 05 को दर्शाई गई है जबकि वे भी जीवित मिले। इस मामले में इन दोनों सुहागिनों को विधवा पेंशन के लिए चयनित करने के आरोप में तत्कालीन ग्राम प्रधान के खिलाफ राजस्व पुलिस में धोखाधड़ी का मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया है। इसके बाद आसपास के गांव में कुल 38 फर्जी पेंशन के मामले सामने आए थे। अभी इन मामलों में कोई कारगर कार्रवाई भी नहीं हो पाई कि विधवा पेंशन लाभार्थियों के सत्यापन में कुल 131 मामलों की पुष्टि हो गई। रोचक बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए घपले में जिले का कोई गांव अब अछूता नहीं रह गया है। यहां यह भी बता दें कि विधवा पेंशन के पात्रों को राज्य सरकार की ओर से 200 रुपये तथा केंद्र सरकार की ओर से 200 रुपये (कुल 400 रुपये) प्रतिमाह दिए जाते हैं। इतनी अल्प राशि के लिए भी बड़े पैमाने पर घपले किए गए।
बड़े घपले से बोलती बंद : जिला प्रशासन ने पहले दो गांवों से 38 मामलों के सामने आने पर तेजी दिखाते हुए तत्कालीन ग्राम प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था लेकिन अब जिले के पांच दर्जन से अधिक गांवों में घपले होने की पुष्टि होने के बाद इतने बड़े पैमाने पर तत्कालीन ग्राम प्रधानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने में प्रशासन भी बैकफुट पर आ गया है।
क्या कर रहा था विभाग : समाज कल्याण विभाग का कहना है कि पात्रों का चयन ग्राम सभाओं के स्तर पर होता है। ब्लाक से रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग उनकी पेंशन स्वीकृत कर देता है लेकिन विभाग के पास इस सवाल का जवाब नहीं है कि विधवा पेंशन के इतने फर्जी मामलों की उसे भनक क्यों नहीं लग सकी जबकि कई अवसरों पर शिविर लगाकर लाभार्थियों को चेक बांटे गए थे। इसमें चेक लेने वाली महिला के माथे पर दमकता सिंदूर को विभाग क्यों नहीं देख पाया। विभाग के स्तर पर होने वाले सत्यापन में ये मामले क्यों नहीं पकड़ में आए। इस बाबत निदेशक समाज कल्याण कहते हैं कि अभी सूची उपलब्ध हुई है। अब विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका तय की जा रही है। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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