Wednesday, February 9, 2011

आखिर सरकार नाम क्यों नहीं बताती

नई दिल्ली
विदेशों में काला धन जमा करने वालों के नाम केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को नहीं बताया है। जाने-माने वकील राम जेठमलानी और अन्य पूर्व नौकरशाह की ओर से दायर जनहित याचिका पर अतिरिक्त हलफनामें में केंद्र ने किसी का नाम नहीं लिया। हलफनामें में सिर्फ उन कदमों के बारे में बताया गया है, जो कालाधन वापस लाने के लिए उठाया गया है। इन कदमों के तहत सरकार ने बताया कि यह धन प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के तरह कर योग्य आय होगी।

सरकार ने यह भी कहा कि उसने उन 10 देशों के साथ कर सूचना आदान-प्रदान समझौते के लिए बातचीत पूरी कर ली है, जहां कालेधन जमा किए गए हैं। इनमें बहमास, बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, आइल ऑफ मैन, केमैन आइलैंड, ब्रिटिश आइलैंड ऑफ जरसी, मोनैको, सेंट किट्स एवं नेविस, अर्जेंटीना और मार्शल आइलैंड शामिल हैं।

सरकार ने कहा कि इनमें से आठ समझौते के संबंध में कैबिनेट की मंजूरी दी जा चुकी है। इससे पहले, सरकार ने दावा किया था उसने ऐसे 26 लोगों की पहचान की है जिन्होंने काला धन विदेशों में जमा कर रखा है। इस बारे में खुलासा लीशटेंस्टाइन बैंक ने किया था। हालांकि, ऐसे नामों का खुलासा नहीं किया गया।

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