नई दिल्ली. एस बैंड स्पेक्ट्रम के लिए इसरो की कारोबारी ईकाई 'एंट्रिक्स' के साथ समझौते करने वाली निजी कंपनी देवास मल्टीमीडिया के सीईओ और चेयरमैन रामचंद्रन विश्वनाथन का कहना है कि कुछ हफ्तों पहले वे अंतरिक्ष आयोग के सदस्यों और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से मिले थे। लेकिन उनमें से किसी ने भी देवास-अंतरिक्ष के बीच समझौते को रद्द किए जाने की बात नहीं बताई थी।
एक निजी चैनल से बातचीत में रामचंद्रन ने कहा कि उनकी कंपनी ने इस डील में कहीं भी कुछ भी गलत नहीं किया है।इसरो के साथ एस-बैंड का करार करने वाली कंपनी देवास मल्टीमीडिया ने कहा है कि करार रद्द नहीं हो सकता है। उसका दावा है कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है। देवास मल्टीमीडिया कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ रामचंद्रन विश्वनाथन ने गुरुवार को बयान जारी किया कि ‘उनकी कंपनी ने इस आवंटन को हासिल करने के लिए सभी योग्यता पूरी की और भारत सरकार से सभी जरूरी मंजूरी ली हैं। फरवरी, 2006 में केंद्रीय मंत्रिमंडल और एंट्रिक्स ने भी इसकी पुष्टि की थी। ऐसे में इस करार से कोई पक्ष अब पीछे नहीं हट सकता। हम स्पेक्ट्रम मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें पहले ही दो साल की देर हो चुकी है।’
उन्होंने यह भी कहा कि देवास में सभी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफआईपीबी की अनुमति के बाद हुआ। इसमें सरकार के सभी नियमों का पालन किया गया है। इस मामले को लेकर जानकारी रखने वाले केंद्र सरकार के कई अधिकारियों का भी मानना है कि सरकार को देवास मल्टीमीडिया के साथ आखिरकार समझौता करना होगा और उसे हर्जाना भी चुकाना होगा। एक अधिकारी ने कहा, ‘हर बड़े करार में यह बिंदु होता है कि जो भी अपनी ओर से पहले करार को तोड़ेगा उसे हर्जाना देना होगा। इस मामले में भी ऐसे बिंदु रहे होंगे। इनसे सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ पाएगी। यह संभव है कि सरकार और देवास के बीच इस हर्जाना राशि को लेकर विवाद हो और मामला न्यायिक प्रक्रिया की ओर जाए।’
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