Thursday, February 10, 2011

आखिर मानी सरकार, काले धन वालों के नाम कर देंगे उजागर


नई दिल्ली। आखिर केंद्र सरकार ने विदेशों में काला धन जमा करने वालों के नाम सार्वजनिक करने पर सहमत हो गई है। उसने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के खिलाफ औपचारिक तौर पर मामला दर्ज किए जाने के बाद उन सभी लोगों के नाम सार्वजनिक कर देगी।
जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकार ने विदेशीं बैंकों में काला धन जमा करने के आरोपियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। अगर एक बार उनके खिलाफ दर्ज कर लिया जाता है, तो उनके नाम सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह इस बात का ध्यान रखे कि पुणे के कारोबारी हसन अली देश से बाहर न जा पाए। हसन अली पर विदेशों में गुप्त रूप से काला धन जमा करने का आरोप है।
सुब्रमण्यम ने जब अदालत को बताया कि अली भारत में है और सरकार उसके खिलाफ सभी जरूरी कदम उठा रही है, तो पीठ ने कहा, यह सुनिश्चित करना आपका कर्तव्य है कि वह मुकदमा चलाए जाने के लिए उपलब्ध रहे। जस्टिस रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ प्रमुख वकील राम जेठमलानी और अन्य कई पूर्व नौकरशाहों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में अदालत से सरकार को विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने का आदेश दिए जाने की मांग की गई है। यह राशि करीब एक खरब डॉलर बताई जा रही है। जेठमलानी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अनिल दीवान ने तर्क दिया कि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठा रही है।
उन्होंने एक लेख को भी संदर्भित किया, जिसमें कहा गया था कि काले धन से जु़डी जानकारी मांगने के लिए पांच देशों संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, अमरीका, सिंगापुर और हांगकांग के अधिकारियों को आग्रह पत्र भेजे गए हैं। इस लेख का संदर्भ देते हुए दीवान ने कहा कि इस संबंध में कुछ भी नहीं किया गया है।
इसके विपरीत सॉलिसिटर जनरल सुब्रमण्यम ने दीवान के तर्क के जवाब में कहा कि सरकार ने काले धन का मामले में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। उन्होंने पीठ के समक्ष सीलबंद लिफाफा रखते हुए कहा कि इसमें इस बारे में पूरी जानकारी दी गई है। सुनवाई के अंत में पीठ ने पूछा कि क्या अली को उसके समक्ष सुनवाई के दौरान एक पक्ष बनाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई तीन मार्च को होगी।

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