Tuesday, February 1, 2011

दूसरा 'मिस्र' बनेगा पाकिस्‍तान: खतरनाक हैं हालात, बगावत पर उतर सकती है जनता

नई दिल्ली. मिस्र और ट्यूनिशिया की तर्ज पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी सुलग सकता है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस (आईएफआरसी) ने मिस्र और ट्यूनिशिया की तर्ज पर पाकिस्तान में भी बवाल शुरू होने की आशंका जताई है। रेड क्रॉस को आशंका है कि पाकिस्तान के बाढ़ से प्रभावित रहे इलाकों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे उन इलाकों में तोड़फोड़ और अशांति फैल सकती है।

गौरतलब है कि ३० साल से सत्ता में काबिज हुस्नी मुबारक के खिलाफ मिस्र में पिछले एक हफ्ते से लोग जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आज करीब १० लाख लोग मुबारक के खिलाफ मार्च निकाल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को शुक्रवार तक देश छोड़ने की चेतावनी दी है। इसी बीच सेना ने भी राष्ट्रपति का साथ छोड़ दिया है।

पाकिस्‍तान के खराब हालात को देखते हुए आईएफआरसी के अध्यक्ष टाटाडेरू कोनो ने कहा कि पिछले साल बाढ़ से प्रभावित पाकिस्तान के जिलों में राजनीतिक उठापटक की आशंका है। कोनो ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि कब तक लोग महंगाई और खाने-पीने की चीजों की कमी को बर्दाश्त कर पाएंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई, अगस्त में पाकिस्तान में बाढ़ ने बहुत ज़्यादा तबाही मचाई थी। इस बाढ़ की चपेट में करीब बीस फीसदी आबादी आई थी। लाखों लोग पलायन के लिए मजबूर हुए थे। पाकिस्तान के दक्षिण में मौजूद कई इलाकों में आज भी पानी भरा हुआ है।  

पूरे पाकिस्तान में खराब हो रहे हालातपाकिस्तान में चरमपंथ के बढ़ते प्रभाव के बीच पिछले कई दशकों से पनप रहा आतंकवाद, लोकतंत्र की जगह तानाशाही, सरकार और सेना के बीच टकराव और सेना का ज़्यादा ताकतवर होना, जैसे कारकों की वजह से पूरे पाकिस्तान में अस्थिरता और अशांति का माहौल है। इसके चलते आए दिन पाकिस्तान में बम धमाके हो रहे हैं, जिसमें पिछले कुछ सालों में हजारों लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान में युवा बेरोजगारी और गरीबी का शिकार हैं। पाकिस्तान में पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में दशकों से गरीबी और अस्थिरता का माहौल है। इसका असर पूरे पाकिस्तान पर पड़ रहा है।

दीवालिया होने के कगार पर पाकपाकिस्तान दीवालिया होने की कगार पर खड़ा है। विदेशों से मिल रही मदद भी अब कम होती जा रही है। विदेशी मददगारों का साफतौर पर कहना है कि जब तक पाकिस्तानी सरकार रक्षा पर अपने बजट में कटौती नहीं करेगा, तब तक वे कोई आर्थिक मदद नहीं देंगे। पाकिस्तानी सरकार अगर अपने रक्षा खर्च में कटौतीर नहीं करेगी तो उसे अपनी ही मुद्रा छापनी पड़ेगी, जिससे महंगाई दर और बढ़ेगी। पाकिस्तान में महंगाई दर 20 फीसदी का आंकड़ा छू लिया है। यही हालात रहे आने वाले दो-तीन सालों में सबी चीजों के दाम दोगुने हो जाएंगे। 

हर सेकेंड 60 हजार का कर्ज लेता है पाक
पाकिस्तान सरकार हर सेकेंड करीब 60,000 रुपये का कर्ज ले रही है। पाकिस्तान सरकार द्वारा करों के तौर पर वसूले जा रहे हर १०० रुपये में ४० कर्जे के ब्याज के तौर पर चुकाए जा रहे हैं, वहीं ४० रुपये रक्षा पर खर्च हो रहे हैं। वहीं, दस रुपये प्रशासन पर खर्च हो रहे हैं। बाकी बचे दस रुपये ट्रेनिंग, स्वास्थ्य, पोषण, पानी की सप्लाई, जनसंख्या नियोजन, ग्रामीण विकास, विज्ञान, सड़कें, पुल के निर्माण, महिला विकास पर खर्च हो रहे हैं।

बढ़ रही है बेरोजगारी
पाकिस्तान में लाखों लोगों के हाथ में काम नहीं है। पिछले दस सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि पाकिस्तान में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ रही है। २०१० में बेरोजगारी की दर १४ फीसदी तक पहुंच गई है। जबकि २००९ में यह ७.४ फीसदी थी। एक साल में ही यह दर दो गुना हो गई है। 
२०१० में मारे गए ५ हजार लोगएक आकलन के मुताबिक २०१० के पहले दस महीनों में ही आतंकवादी गतिविधियों, धमाकों में पाकिस्तान के करीब ४७०० लोग मारे गए हैं। साल के अंत तक यह आंकड़ा पांच हजार के आंकड़े को छू रहा है।
आपकी राय
मिस्र में जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। इसी तर्ज पर पाकिस्तान में भी जनता के सब्र का बांध टूट सकता है। रेड क्रॉस जैसी संस्थाएं इस तरह की आशंका जता रही हैं। क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान में आम लोग सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को चुनौती देंगे? क्या इस ऐसा करके पाकिस्तान में बिगड़ता माहौल सुधर सकता है? इस मुद्दे पर अपनी राय दें। राय देने के लिए नीचे बॉक्स में क्लिक करें।

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