2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों को एक मार्च तक का वक्त दे दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि टू जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों का आवंटन रद्द करने का आधार केवल कैग की रिपोर्ट को नहीं बनाया जा सकता है और इस विषय पर सरकार कोई भी निर्णय उसके समक्ष लंबित याचिका के नतीजे के आधार पर दे.
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए के गांगुली की पीठ ने कहा, 'वे (सरकार) इस विषय पर कुछ भी करते हैं, वह इस मामले में दायर याचिका के नतीजे पर निर्भर करता है.'
पीठ ने कहा, 'हम नहीं जानते कि वह क्या कर रहे हैं. लेकिन अगर वह कुछ करते हैं तो यह हमारे आदेश के नतीजे पर निर्भर करेगा.'
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई जिसमें अदालत से सरकार को दायित्वों का निर्वाह नहीं करने वाली टेलीकॉम कंपनियों के लाइसेंस को नियमित करने से रोकने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था.
स्वयंसेवी संस्था के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार कंपनियों पर दंड लगाकर इनके लाइसेंस को नियमित बना रही है.
पीठ ने कहा कि अगर लाइसेंसों को रद्द करना है तो इसे रद्द करने का आधार केवल कैग की रिपोर्ट को नहीं बनाया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें से एक सीपीआईएल और दूसरा जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर की गई है.
इसमें स्पेक्ट्रम आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आधार पर पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में आवंटित टू जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस का आवंटन रद्द करने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई की अगली तारीख एक मार्च निर्धारित की है.
याचिका पर सुनवाई के दौरान भूषण ने कहा कि सीपीआईएल ने टू जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस को रद्द किये जाने के पांच आधार बताए हैं.
उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम का आवंटन 2001 की कीमत पर बिना निविदा आमंत्रित किये हुई और अंतिम तिथि संबंधी दुविधा के कारण दो तिहाई आवेदन रद्द हो गए.
भूषण ने कहा कि 122 में से 85 उद्यम अयोग्य परिचालक थे और 69 अपने दायित्व का निर्वाह करने में विफल रहे.
पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई के दौरान इन विषयों पर ध्यान दिया जायेगा.
मालूम हो कि संसद में पेश कैग की रिपोर्ट के मुताबिक स्पेक्ट्रम घोटाले से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए के गांगुली की पीठ ने कहा, 'वे (सरकार) इस विषय पर कुछ भी करते हैं, वह इस मामले में दायर याचिका के नतीजे पर निर्भर करता है.'
पीठ ने कहा, 'हम नहीं जानते कि वह क्या कर रहे हैं. लेकिन अगर वह कुछ करते हैं तो यह हमारे आदेश के नतीजे पर निर्भर करेगा.'
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई जिसमें अदालत से सरकार को दायित्वों का निर्वाह नहीं करने वाली टेलीकॉम कंपनियों के लाइसेंस को नियमित करने से रोकने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था.
स्वयंसेवी संस्था के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार कंपनियों पर दंड लगाकर इनके लाइसेंस को नियमित बना रही है.
पीठ ने कहा कि अगर लाइसेंसों को रद्द करना है तो इसे रद्द करने का आधार केवल कैग की रिपोर्ट को नहीं बनाया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें से एक सीपीआईएल और दूसरा जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर की गई है.
इसमें स्पेक्ट्रम आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आधार पर पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में आवंटित टू जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस का आवंटन रद्द करने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई की अगली तारीख एक मार्च निर्धारित की है.
याचिका पर सुनवाई के दौरान भूषण ने कहा कि सीपीआईएल ने टू जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस को रद्द किये जाने के पांच आधार बताए हैं.
उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम का आवंटन 2001 की कीमत पर बिना निविदा आमंत्रित किये हुई और अंतिम तिथि संबंधी दुविधा के कारण दो तिहाई आवेदन रद्द हो गए.
भूषण ने कहा कि 122 में से 85 उद्यम अयोग्य परिचालक थे और 69 अपने दायित्व का निर्वाह करने में विफल रहे.
पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई के दौरान इन विषयों पर ध्यान दिया जायेगा.
मालूम हो कि संसद में पेश कैग की रिपोर्ट के मुताबिक स्पेक्ट्रम घोटाले से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है.
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