पिछले कुछ महीनों के दौरान शेयर बाजार में दर्ज की गई गिरावट में गड़बड़ी होने की सेबी ने जांच शुरू कर दी है। सेबी करीब 25 ब्रोकरेज फर्म, वित्तीय संस्थागत निवेशक (एफआईआई) और म्यूचुअल फंडों की जांच कर रही है। जांच के घेरे में तीन बीयर कार्टेल हैं।
सूत्रों के अनुसार शुरूआती जांच में सेबी को पता चला है कि शेयर बाजार में मंदडिय़ों के कम से कम तीन 'बीयर कार्टेल' सक्रिय रहे। इसके बाद सेबी ने एक्सचेंजों और कारोबारी कंपनियों से उन शेयरों के ट्रेडिंग पैटर्न के बारे में जानकारी मांगी है, जिन कंपनियों में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। सेबी ने पिछले तीन महीने की ट्रेडिंग की जानकारी मांगी है।
बीयर कार्टेल का आशय बाजार के उन कारोबारी समूहों से है जो कुछ खास शेयरों की खरीद कम शेयरों पर करते हैं। कई बार ये कार्टेल प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के साथ मिलकर शेयर रेट गिरावट की कोशिश करते हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान कुछ ब्लू चिप कंपनियों समेत करीब 100 कंपनियों के शेयरों को एकसाथ या अलग-अलग गिराने की कोशिश हुई। बीयर कार्टेल से सबसे ज्यादा मिड कैप और स्मॉल कैप वाली कंपनियों के शेयर प्रभावित रहे।
पिछले तीन माह में बीएसई सेंसेक्स 3000 अंक यानि करीब 15 फीसदी गिर गया। पिछले साल 5 नवंबर को सेंसेक्स 21,004 के स्तर पर था। इसके बाद से इसमें गिरावट आ रही है। निवेशकों की कुल संपदा में गिरावट इससे भी कहीं ज्यादा रही है। शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियों के सभी शेयरों के कुल मूल्य यानि मार्केट केपिटलाइजेशन में 20 फीसदी की जबर्दस्त गिरावट आ चुकी है। इस तरह निवेशकों को करीब 15 लाख करोड़ रुपये का चूना लग चुका है। मार्केट केपिटलाइजेशन में ज्यादा गिरावट आने की वजह यह है कि सेंसेक्स से बाहर के शेयरों में गिरावट सेंसेक्स शेयरों के मुकाबले कहीं ज्यादा रही है।
No comments:
Post a Comment