नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के सुचारू संचालन की दृष्टि से सरकार ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पर सहमति के संकेत दिए हैं। सरकार ने सोमवार को संकेत दिया कि वह जेपीसी के खिलाफ नहीं है बशर्ते विपक्ष पहले चर्चा के लिए तैयार हो और ऎसी जांच के तौर-तरीकों पर सहमत हो। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा, लोकतांत्रिक संस्थाओं को चलने देना चाहिए।
क्या कार्यप्रणाली हो, यह सरकार और विपक्ष को तय करना है। इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी सहित शीर्ष नेतृत्व ने कोर ग्रुप की बैठक में इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया था। तिवारी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की लगातार मांग करती रही है। उन्होंने कहा, विपक्ष को चर्चा से भागना नहीं चाहिए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि अगर संसद चलाने की कीमत जेपीसी है, तो इसे होने दें, लेकिन अगर जेपीसी गठित की जाती है, तो संसद में चर्चा के पहले ऎसा नहीं होना चाहिए। सत्तारूढ़ पार्टी यह भी चाहती है कि एस-बैंड मुद्दे को ऎसी किसी जांच से बाहर रखा जदाए। दल का दावा है कि यह कोई घोटाला नहीं है। इस बीच, गतिरोध दूर करने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी विभिन्न दलों के नेताओं की एक और बैठक बुला सकते हैं। कांग्रेस इस पक्ष में है कि ऎसी किसी जांच में भाजपा नीत राजग का कार्यकाल भी शामिल किया जाए। उनका दावा है कि मुख्य विपक्ष को कई सवालों का जवाब देना होगा। सत्तारूढ़ दल सीबीआई द्वारा राजग के कार्यकाल में दूरसंचार मंत्री रहे अरूण शौरी को समन दिए जाने का जिक्र कर रहा है। सत्तारूढ़ खेमे का मानना है कि जेपीसी पर सहमति होने के बाद भी विपक्ष का एक ध़डा संसद में व्यवधान पैदा कर सकता है।
क्या कार्यप्रणाली हो, यह सरकार और विपक्ष को तय करना है। इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी सहित शीर्ष नेतृत्व ने कोर ग्रुप की बैठक में इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया था। तिवारी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की लगातार मांग करती रही है। उन्होंने कहा, विपक्ष को चर्चा से भागना नहीं चाहिए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि अगर संसद चलाने की कीमत जेपीसी है, तो इसे होने दें, लेकिन अगर जेपीसी गठित की जाती है, तो संसद में चर्चा के पहले ऎसा नहीं होना चाहिए। सत्तारूढ़ पार्टी यह भी चाहती है कि एस-बैंड मुद्दे को ऎसी किसी जांच से बाहर रखा जदाए। दल का दावा है कि यह कोई घोटाला नहीं है। इस बीच, गतिरोध दूर करने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी विभिन्न दलों के नेताओं की एक और बैठक बुला सकते हैं। कांग्रेस इस पक्ष में है कि ऎसी किसी जांच में भाजपा नीत राजग का कार्यकाल भी शामिल किया जाए। उनका दावा है कि मुख्य विपक्ष को कई सवालों का जवाब देना होगा। सत्तारूढ़ दल सीबीआई द्वारा राजग के कार्यकाल में दूरसंचार मंत्री रहे अरूण शौरी को समन दिए जाने का जिक्र कर रहा है। सत्तारूढ़ खेमे का मानना है कि जेपीसी पर सहमति होने के बाद भी विपक्ष का एक ध़डा संसद में व्यवधान पैदा कर सकता है।
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