धर्म की नजर से हर व्यक्ति मन, वचन या कामों से कोई न कोई पाप कर ही देता है। इन दोषों या पापों का फल व्यक्ति या तो दु:ख के रूप में भोगता है या फिर देव उपासना से इन दोषों की शांति होना माना जाता है। किंतु अनजाने और अदृश्य रूप से हुए पापों के अलावा शास्त्रों में 14 ऐसे कारण या यूं कहें 14 ऐसी जगह बताई गई है, जिनसे व्यक्ति स्वयं जानते-समझते भी जुड़कर पाप का भागी बनता है।
इन पाप की खाईयों में गिरकर इंसान भी शैतान बन सकता है। यह किसी भी समय किसी भी व्यक्ति को अपने आगोश में ले सकती हैं।
हिन्दू धर्म ग्रंथों के मुताबिक जब कलियुग की मार की डर से गाय और लंगड़े बैल का रूप लेकर भाग रहे पृथ्वी और धर्म की रक्षा के लिए जब राजा परीक्षित ने कलियुग पर हमला किया, तब डरकर कलियुग ने आत्म समर्पण कर राजा से अभयदान मांगा। तब पुण्यात्मा परीक्षित ने पनाह में आए कलियुग को इन 14 स्थानों पर रहने की अनुमति दी। यह ऐसे स्थान है जो व्यावहारिक और वैचारिक रूप से बुराई का घर माने जाते हैं। जानते हैं वह 14 स्थान जहां पाप बसता है -
- व्यभिचार (अनैतिक और बुरे काम)
- शराब
- मांसाहार
- चुगली
- विश्वासघात
- क्रोध या गुस्सा
- वासना (भौतिक सुखों की चाह)
- दुर्बुद्धि (बुद्धि का अभाव)
- छल-कपट
- अज्ञान
- विषयों में प्रीति (मौज-मस्ती, सुविधाओं को भोगना)
- स्वार्थ
- स्वर्ण यानि सोना
- वेश्या
इन पाप की खाईयों में गिरकर इंसान भी शैतान बन सकता है। यह किसी भी समय किसी भी व्यक्ति को अपने आगोश में ले सकती हैं।
हिन्दू धर्म ग्रंथों के मुताबिक जब कलियुग की मार की डर से गाय और लंगड़े बैल का रूप लेकर भाग रहे पृथ्वी और धर्म की रक्षा के लिए जब राजा परीक्षित ने कलियुग पर हमला किया, तब डरकर कलियुग ने आत्म समर्पण कर राजा से अभयदान मांगा। तब पुण्यात्मा परीक्षित ने पनाह में आए कलियुग को इन 14 स्थानों पर रहने की अनुमति दी। यह ऐसे स्थान है जो व्यावहारिक और वैचारिक रूप से बुराई का घर माने जाते हैं। जानते हैं वह 14 स्थान जहां पाप बसता है -
- व्यभिचार (अनैतिक और बुरे काम)
- शराब
- मांसाहार
- चुगली
- विश्वासघात
- क्रोध या गुस्सा
- वासना (भौतिक सुखों की चाह)
- दुर्बुद्धि (बुद्धि का अभाव)
- छल-कपट
- अज्ञान
- विषयों में प्रीति (मौज-मस्ती, सुविधाओं को भोगना)
- स्वार्थ
- स्वर्ण यानि सोना
- वेश्या
No comments:
Post a Comment