नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील की गणना के साथ ही बुधवार को जनगणना 2011 के दूसरे चरण की शुरुआत हुई। तीन सप्ताह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान में अनुमानित 1.2 अरब लोगों की जनगणना की जाएगी।
जनगणना के गणनाकार रीता ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के आवास के बारे में सूचनाओं को इकट्ठा किया। राष्ट्रपति ने 29 बिंदुओं आय, धर्म, शिक्षा और अन्य जानकारियों से सम्बंधित प्रश्नावली को भरा।
इस मौके पर राष्ट्रपति भवन में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम, गृह राज्य मंत्री गुरुदास कामत, जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली और जनगणना अभियान की निदेशक (दिल्ली) वर्षा जोशी उपस्थित थे।
जनगणना के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के परिजनों को भी जनगणना सूची में शामिल किया गया। देश भर के छह लाख गांवों और सात हजार से अधिक कस्बों में जनगणना की जाएगी। जम्मू एवं कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में भी जनगणना का काम किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में जनगणना के लिए करीब एक लाख जनगणना कर्मियों और निरीक्षकों को काम पर लगाया गया है। सेना के जवानों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी अपने शिविरों में जनगणनाकर्मी के रूप में तैनात किया गया है।
जम्मू एवं कश्मीर में अलगाववादी नेताओं ने जनगणना का समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से जनगणना अधिकारियों की मदद करने का अनुरोध किया है।
ज्ञात हो कि जनगणना 2011 के लिए प्रथम चरण की गणना पिछले वर्ष अप्रैल से सितम्बर में सम्पन्न हुई। दूसरे चरण की जनगणना के दौरान जनगणनाकर्मी लोगों से उनकी शिक्षा, कार्य और वैवाहिक स्थिति, भाषा, परिवहन के साधन और बच्चों की संख्या के बारे में पूछेंगे।
यह देश की 15वीं जनगणना है, जिसके साथ ही 'नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर' (एनपीआर) बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। इस रजिस्टर में हर नागरिक का नाम पूरी जानकारी के साथ दर्ज होगा और इसी के आधार पर उसे एक अद्वितीय पहचान पत्र दिया जाएगा।
इसे देखते हुए जनगणना 2011 को मानव इतिहास का सबसे बड़ा अभियान कहा जा सकता है। देश के 28 राज्यों व आठ केंद्र शासित प्रदेशों के 640 जिलों में 21 लाख जनगणनाकर्मी नौ से 28 फरवरी तक घर-घर जाकर इस काम को पूरा करेंगे। लिंगानुपात और निशक्तता इस बार की जनगणना के सबसे प्रमुख बिंदु हैं। इसके अलावा व्यक्ति की शैक्षणकि स्थिति, किरायाभोगी या अल्पकालिक कर्मचारी होने, विस्थापन का पता लगाने और स्त्री व पुरुष के साथ एक तीसरा लिंग भी शामिल करने जैसे नए कदम उठाए गए हैं।
आबादी के प्रत्येक हिस्से तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने, कृषि व शहरी विकास योजनाओं की धनराशि के निर्धारण व आकलन और लम्बी अवधि की विकास रणनीति बनाने में जनगणना से मिलने वाली जानकारियां बेहद अहम हैं।
इसके साथ ही संसदीय व विधानसभा क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन व उनमें आरक्षण के नियम लागू करने में भी ये आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं। इससे साफ है कि जनगणना का काम सभी देशवासियों की तरक्की से जुड़ा है।
जनगणना का सबसे अहम हिस्सा होता है परिवार अनुसूची। इसमें घर के सभी सदस्यों की उम्र, शिक्षा, वैवाहिक स्थिति आदि बिंदुओं पर सवाल पूछे जाते हैं। इस बार सवालों की संख्या 29 है। इन सवालों के जवाब ही देश का असली हाल बयां करेंगे।
जनगणना 2011 की प्रमुख खासियतें भी हैं। इस अभियान में 2200 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है। इस कार्य में प्रति व्यक्ति लागत 18.33 रुपये आनी है। यह दुनिया की सबसे किफायती जनगणना है।
इस काम में देश के 28 राज्यों, सात केंद्र शासित प्रदेशों के 640 जिलों की 5961 तहसीलों के प्रत्येक ब्लॉक में 21 लाख जनगणनाकर्मी जुटेंगे। सड़क और फुटपाथ पर रहने वाले बेघरों की गणना 28 फरवरी की मध्यरात्रि को शुरू होगी। एक मार्च को इस काम का पुनरीक्षण किया जाएगा।
इस बार स्कूलों में भी जनगणना का काम होगा। मध्यप्रदेश के सभी 50 जिलों के 1.15 लाख स्कूलों में विशेष किट बांटे गए हैं। इसके अलावा कक्षा छह से कक्षा आठ तक के बच्चों के पाठ्यक्रम में जनगणना के महत्व के रूप में विशेष अध्याय भी जोड़ा गया है।
यही नहीं इस बार फोन, एसएमएस, वेबसाइट, टीवी विज्ञापनों और फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किं ग साइट्स के जरिए भी लोगों को जनगणना के बारे में जानकारी देने का इंतजाम किया गया है। हर जिले में एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है।
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