रायपुर।नगर निगम ने पेयजल समस्या से निपटने कवायद शुरू कर दी है। टैंकरों से पानी पिलाने के लिए ढाई करोड़ रूपए का टेंडर जारी कर दिया है। 15 फरवरी की शाम ये टेंडर खुलेंगे। इस राशि से 90 दिनों तक 100 टैंकर प्रतिदिन 10 फेरे लगाकर वार्डो में लोगों की प्यास बुझाएंगे। इसके अलावा निगम खुद के लगभग 20 हाइड्रोलिक टैंकर चलाएगा। संभवत: मार्च के दूसरे सप्ताह से 15 जून तक टैंकर चलाए जाने की संभावना है।
"पत्रिका" ने सबसे पहले बताया था कि गर्मी में पानी की समस्या से निपटने के लिए निगम टैंकर के भरोसे है और अब तक टैंकर का टेंडर नहीं हुआ है। आम आदमी को पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है और निगम अपनी आय बढ़ाने में लगा हुआ है। पिछली परिषद के समय तक टैंकरों से नलघर में रोजाना दस से पंद्रह हजार रूपए की आय होती थी, वह बढ़कर 40 से 50 हजार रूपए हो गई है।
इसके लिए अधिकारी से लेकर जलकर्म एमआईसी तक अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। बावजूद इसके आम आदमी पानी के लिए कभी निगम का तो कभी नीर भवन का घेराव कर रहा है। यही नहीं, आरोप लगाए जाते हैं कि घरेलू उपयोग की जगह निगम व्यावसायिक उपयोग वाले स्थानों को आय बढ़ाने के चक्कर में पानी की सप्लाई कर रहा है।
"पत्रिका" ने सबसे पहले बताया था कि गर्मी में पानी की समस्या से निपटने के लिए निगम टैंकर के भरोसे है और अब तक टैंकर का टेंडर नहीं हुआ है। आम आदमी को पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है और निगम अपनी आय बढ़ाने में लगा हुआ है। पिछली परिषद के समय तक टैंकरों से नलघर में रोजाना दस से पंद्रह हजार रूपए की आय होती थी, वह बढ़कर 40 से 50 हजार रूपए हो गई है।
इसके लिए अधिकारी से लेकर जलकर्म एमआईसी तक अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। बावजूद इसके आम आदमी पानी के लिए कभी निगम का तो कभी नीर भवन का घेराव कर रहा है। यही नहीं, आरोप लगाए जाते हैं कि घरेलू उपयोग की जगह निगम व्यावसायिक उपयोग वाले स्थानों को आय बढ़ाने के चक्कर में पानी की सप्लाई कर रहा है।
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