Wednesday, February 9, 2011

नासिक में प्याज 2 रुपए किलो, किसान सड़कों पर उतरे, कुछ किस्मों का निर्यात खुला

नई दिल्ली. कभी आसमान छूने वाली प्याज की कीमतें फिर एक बार नीचे आ गई हैं। प्याज की देश में सबसे बड़ी मंडी नासिक में तो प्याज की कीमत काफी कम हो गई है और वहां प्याज 2 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। बुधवार को स्थिति इतनी खराब हो गई कि वहां प्याज का व्यापार रोकना पड़ा। दिसंबर में प्याज की कीमतें 80 रुपए प्रति किलो छू गईं थीं। इधर कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि वे अर्थशास्त्री नहीं है। वे किसान हैं और किसानों के लिए बेहतर दाम चाहते हैं। उन्होंने यह मांग भी की कि प्याज की कुछ किस्मों को फिर निर्यात के लिए अनुमति दे देनी चाहिए। इसके बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने चावल और प्याज की कुछ किस्मों का निर्यात किए जाने की अनुमति दे दी है।

प्याज की नई फसल धीरे धीरे बाजार में आ रही है और उम्मीद है कि सभी जगह प्याज की कीमतें काफी कम हो जाएंगीं।

पवार ने पत्रकारों से चर्चा में नासिक और उसके आसपास के किसानों द्वारा प्याज उपज के कम दामों के चलते धरना प्रदर्शन का जिक्र किया। इससे पहले वे कह चुके हैं कि वे ज्योतिषी नहीं है कि महंगाई घटने का मुहूर्त बता दें। सियासी हलकों में ‘अर्थशास्त्री न होने’ के उनके बयान को अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर इशारा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री पर विपक्ष आरोप लगा रहा है कि वे बढ़ती मुद्रास्फीति, खास तौर से खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी रोक पाने में असफल रहे हैं।

आम जनता को खाद्य पदार्थों की महंगाई से राहत दिलाने के लिए पवार ने बताया कि २०१०-११ के दौरान २३.२० करोड़ टन अनाज की पैदावार होने का अनुमान है। यह अब तक की दूसरी सबसे अधिक उपज होगी। २००८-०९ के दौरान सबसे अधिक २३.४४ करोड़ टन अनाज की पैदावार हुई थी। कृषि मंत्री ने बताया कि इसमें गेहूं की अच्छी उपज का बड़ा योगदान होगा। दूसरे अनुमान में गेहूं की उपज ८.१४ करोड़ टन, दलहन १.६५ करोड़ टन तथा कपास के रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद है।

पवार ने कहा कि बासमती और कुछ गैर-बासमती चावल की किस्में, जिन्हें अपने देश का मध्य और निम्न मध्य वर्ग नहीं खरीदता है, उसे निर्यात के लिए अनुमति दे देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय चीनी निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल हैं। कुछ मात्रात्मक प्रतिबंधों के साथ अगर चीनी निर्यात के लिए छूट दी जाती है तो किसानों को फायदा हो सकता है।

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