वाशिंगटन. कैलिफोर्निया की ट्राई-वैली यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों को रेडियो कॉलर (ट्रैकर) पहनाने का मुद्दा गरमाते जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई से पीडित छात्रों का कहना है कि उनके साथ कुत्तों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। ऐसे ही एक छात्र ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ' मुझे कुत्तों की तरह बांधा गया है। मेरे साथी मेरा मजाक उड़ाते हैं। मैं असहाय हूं। मैं विदेश में पढ़ाई कर अपना लक्ष्य हासिल करना चाहता था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मैं बेहद तकलीफ में हूं। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार हमारी समस्या को लेकर कोई कदम उठाएगी।'
छात्र ने कहा, 'स्थानीय अधिकारी हमारी तकलीफ नहीं समझ रहे हैं लेकिन हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यदि यह 'शैम यूनिवर्सिटी' है तो इसके लिए अमेरिकी प्रशासन जिम्मेदार है।'
हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने छात्रों को ट्रैकर पहनाए जाने को सही ठहराते हुए कहा है कि यह हमारे यहां यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह से अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने का संदेह शामिल नहीं है।
रविवार को भारत ने सख्त ऐतराज जताते हुए अमेरिकी अधिकारियों के इस कदम को 'बर्दाश्त के बाहर' बताया था और ट्रैकर हटाने की मांग की थी। पर इसके समर्थन में अधिकारयों ने कहा है अमेरिका में रेडियो कॉलर पहनाने का चलन सभी जगह है और विभिन्न प्रकार की जांचों के लिए यह एक यहां लागू की गई एक स्टैंडर्ड प्रणाली है।
अधिकारियों ने इस बात का भरोसा दिलाया कि जो छात्र यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए वीज़ा फ्रॉड के शिकार हुए हैं वे भारत वापस लौटकर नए सिरे से वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें एक साधारण आवेदनकर्त्ता के रूप में ही लिया जाएगा। पर वहीं दूसरी ओर भारतीय छात्रों का कहना है कि उनके साथ कुत्तों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
हथकड़ी से बेहतर है बेड़ी
सोमवार को अमेरिकी दूतावास ने तर्क दिया था कि रेडियो कॉलर लगाने से व्यक्ति अपराधी साबित नहीं होता और कम से कम यह गिरफ्तारी का बेहतर विकल्प है। दूतावास ने कहा कि अमेरिका में यह नया नहीं है और पहले भी आरोपियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकर लगाए गए हैं।
क्या है मामला
यह मामला कैलिफोर्निया की ट्राई-वैली यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी को आव्रजन धोखाधड़ी के आरोपों के चलते बंद कर दिया गया था इसके बाद विश्वविद्यालय के कई छात्रों के शरीर पर रेडियो कॉलर लगा दिए गए थे। कैलिफोर्निया की एक अदालत में ट्राई वैली विश्वविद्यालय के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और वीजा नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद हुई कार्रवाई से विश्वविद्यालय के 1555 छात्रों के भविष्य पर खतरे की तलवार लटक रही है। इनमें अधिकतर भारत के आंध्र प्रदेश से हैं। अदालत में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि इस विश्वविद्यालय ने विदेशी छात्रों को अवैध रूप से आव्रजन दर्जा पाने में मदद की।
भारत ने दी थी चेतावनी
विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इस पर कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘हमने अमेरिकी अधिकारियों से कहा है कि छात्रों के साथ निष्पक्ष और समुचित व्यवहार हो। इन छात्रों में से ज्यादातर पीडि़त हैं। छात्रों को अपना पक्ष रखे जाने का मौका मिलना चाहिए। छात्रों के एक समूह को बंधक बनाने के बाद उन्हें अमेरिकी कानून के मुताबिक ट्रैकर लगाकर छोडऩा बर्दाश्त योग्य नहीं है, इसे हटाया जाए।’ भारत ने इस मामले में कड़ा रूख अख्तियार करते हुए यूएस डिप्टी चीफ ऑफ द मिशन को समन भेजा था। अप्रवासी मामलों के मंत्री वायलार रवि ने कहा था कि इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों से बात करेंगे।
आपकी बात
अमेरिका में भारतीय छात्रों के साथ हो रहे इस तरह के व्यवहार के बारे में आप क्या सोचते हैं? इन हालात के लिए कौन दोषी है? भारत सरकार को इन हालात में क्या कदम उठाने चाहिए? अपने जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर करें।
छात्र ने कहा, 'स्थानीय अधिकारी हमारी तकलीफ नहीं समझ रहे हैं लेकिन हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यदि यह 'शैम यूनिवर्सिटी' है तो इसके लिए अमेरिकी प्रशासन जिम्मेदार है।'
हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने छात्रों को ट्रैकर पहनाए जाने को सही ठहराते हुए कहा है कि यह हमारे यहां यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह से अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने का संदेह शामिल नहीं है।
रविवार को भारत ने सख्त ऐतराज जताते हुए अमेरिकी अधिकारियों के इस कदम को 'बर्दाश्त के बाहर' बताया था और ट्रैकर हटाने की मांग की थी। पर इसके समर्थन में अधिकारयों ने कहा है अमेरिका में रेडियो कॉलर पहनाने का चलन सभी जगह है और विभिन्न प्रकार की जांचों के लिए यह एक यहां लागू की गई एक स्टैंडर्ड प्रणाली है।
अधिकारियों ने इस बात का भरोसा दिलाया कि जो छात्र यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए वीज़ा फ्रॉड के शिकार हुए हैं वे भारत वापस लौटकर नए सिरे से वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें एक साधारण आवेदनकर्त्ता के रूप में ही लिया जाएगा। पर वहीं दूसरी ओर भारतीय छात्रों का कहना है कि उनके साथ कुत्तों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
हथकड़ी से बेहतर है बेड़ी
सोमवार को अमेरिकी दूतावास ने तर्क दिया था कि रेडियो कॉलर लगाने से व्यक्ति अपराधी साबित नहीं होता और कम से कम यह गिरफ्तारी का बेहतर विकल्प है। दूतावास ने कहा कि अमेरिका में यह नया नहीं है और पहले भी आरोपियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकर लगाए गए हैं।
क्या है मामला
यह मामला कैलिफोर्निया की ट्राई-वैली यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी को आव्रजन धोखाधड़ी के आरोपों के चलते बंद कर दिया गया था इसके बाद विश्वविद्यालय के कई छात्रों के शरीर पर रेडियो कॉलर लगा दिए गए थे। कैलिफोर्निया की एक अदालत में ट्राई वैली विश्वविद्यालय के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और वीजा नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद हुई कार्रवाई से विश्वविद्यालय के 1555 छात्रों के भविष्य पर खतरे की तलवार लटक रही है। इनमें अधिकतर भारत के आंध्र प्रदेश से हैं। अदालत में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि इस विश्वविद्यालय ने विदेशी छात्रों को अवैध रूप से आव्रजन दर्जा पाने में मदद की।
भारत ने दी थी चेतावनी
विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इस पर कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘हमने अमेरिकी अधिकारियों से कहा है कि छात्रों के साथ निष्पक्ष और समुचित व्यवहार हो। इन छात्रों में से ज्यादातर पीडि़त हैं। छात्रों को अपना पक्ष रखे जाने का मौका मिलना चाहिए। छात्रों के एक समूह को बंधक बनाने के बाद उन्हें अमेरिकी कानून के मुताबिक ट्रैकर लगाकर छोडऩा बर्दाश्त योग्य नहीं है, इसे हटाया जाए।’ भारत ने इस मामले में कड़ा रूख अख्तियार करते हुए यूएस डिप्टी चीफ ऑफ द मिशन को समन भेजा था। अप्रवासी मामलों के मंत्री वायलार रवि ने कहा था कि इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों से बात करेंगे।
आपकी बात
अमेरिका में भारतीय छात्रों के साथ हो रहे इस तरह के व्यवहार के बारे में आप क्या सोचते हैं? इन हालात के लिए कौन दोषी है? भारत सरकार को इन हालात में क्या कदम उठाने चाहिए? अपने जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर करें।
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