नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविघालय के छात्रावास में एक छात्रा के अश्लील एमएमस बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
सूत्रों के मुताबिक इस कथित एमएमस को बनाने में छात्रा के कुछ दोस्तों का हाथ है। हालांकि यह क्लिप कुछ महीने पहले बनाया गया था लेकिन विश्वविद्यालय में सावर्जनिक अब हुआ है। इस संबंध में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। लेकिन इसकी चर्चा विश्वविद्यालय परिसर में जोरशोर से चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस कथित एमएमस को बनाने में छात्रा के कुछ दोस्तों का हाथ है। हालांकि यह क्लिप कुछ महीने पहले बनाया गया था लेकिन विश्वविद्यालय में सावर्जनिक अब हुआ है। इस संबंध में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। लेकिन इसकी चर्चा विश्वविद्यालय परिसर में जोरशोर से चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा इसकी शिकायत प्राक्टर कार्यालय से करने के बाद आनन-फानन में मामले की जांच शुरू कर दी गई है।वहीं जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर प्रो. एच बी. बोहिदार ने इस अश्लील वीडियो की बात को सही बताया है। प्रॉक्टर ने कहा हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं, आरोपी छात्रों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। पुलिस में मामला दर्ज कराने को लेकर हालांकि उन्होंने चुप्पी साधे रखा।
इस संबंध में जब हमने दक्षिण दिल्ली पुलिस के डीसीपी कार्यालय फोन किया तो उन्होंने ऐसे किसी मामले से अनभिज्ञता जताई।
अन्य छात्रों ने आरोपी छात्र को था
विवि सूत्रों का कहना है कि कुछ माह पहले ही एमएमएस बनाए जाने पर आरोपी छात्र को अन्य छात्रों ने पीटा था। मामला विवि प्रशासन तक भी पहुंचा था, लेकिन कोई शिकायत नहीं मिलने पर विवि प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन तब हरकत में आया जब जेएनयू की लगातार हो रही बदनामी के चलते चीफ सिक्योरिटी आफिसर ने मामले को गंभीरता से लिया और उन्होंने विवि प्रशासन को शिकायत की।
बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी के कंप्यूटर पर भी किसी ने यह अश्लील फिल्म डाल दी थी, जिसे देखने के बाद चीफ सिक्योरिटी अफसर ने विवि प्रशासन को यह सीडी उपलब्ध कराई और मामले की जांच के लिए लिखित में एक शिकायत दी।
चीफ प्रॉक्टर एचबी मोहिन्दार की अध्यक्षता में गठित एक टीम को यह जांच सौंपी गई है। अगले दो-तीन दिन में एचबी मोहिन्दार अपनी रिपोर्ट यूनिवर्सिटी प्रशासन को सौंप देंगे। मामले को अब पुलिस ने भी गंभीरता से लिया है। साऊथ जिला के डीसीपी एचजीएस धालीवाल ने कहा है कि मामले में यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच चल रही है, बावजूद इसके पुलिस भी इसकी जांच करेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने एसीपी को निर्देश दे दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि जेएनयू के को-हॉस्टल में रहने वाले स्कूल आफ लेंग्वेज की एक छात्रा और छात्र ने आपसी रजामंदी से पैसा कमाने के लिए यह एमएमएस बनाया था, लेकिन सूत्रों का कहना है सीडी बाजार में बिक्री के लिए रखने से पहले ही एमएमएस बनाने वाले कम्प्यूटर साइंस के एक अन्य छात्र ने अपने दोस्तों को यह एमएमएस भेज दिया, जिसके चलते काफी पहले ही यह भांडा फूट गया। मगर शिकायत नहीं मिलने की दलील देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले को दबाने के लिए लगा रहा।

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