भोपाल. 9425302050 इस नंबर पर एक साथ दो लोग कॉल करेंगे तो दोनों ओर घंटी बजेगी और कॉल रिसीव भी दो अलग-अलग हैंडसेट पर ही होगा। यह कमाल है 20 जनवरी 2011 से देशभर में शुरू हुई मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा का, जिसमें मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को बदलने का विकल्प तो उपभोक्ता को मिल गया है, लेकिन साथ ही एक परेशानी भी बढ़ गई है।
पहली कंपनी की ओर से सिम बंद नहीं करने के कारण उपभोक्ता को दोनों कंपनियों की सेवाएं मिल रही हैं। इससे उपभोक्ता की जेब पर तो मार पड़ेगी, साथ ही कुछ दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। वहीं कंपनियां इस मामले पर कुछ स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं कर पा रही हैं।
राजधानी के हनीफ बख्श अभी तक बीएसएनएल उपभोक्ता थे और उनका नंबर 9425302050 है। 20 जनवरी से देशभर में मोबाइल पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू होने के बाद उन्होंने अपना नंबर बदले बिना मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी बदलते हुए आइडिया की सेवाएं लेना शुरू कर दीं।
30 जनवरी 2011 से उनकी आइडिया की सिम एक्टीवेट तो हो गई, लेकिन बीएसएनएल की सिम भी चालू रही। ऐसे में सवाल यह है कि अगर सभी प्रक्रिया नियमानुसार थीं तो आइडिया की सिम चालू होने पर बीएसएनएल की सिम बंद क्यों नहीं हुई?
कंपनियों की ऐसी लापरवाही के चलते एक ओर जहां प्राथमिक स्तर पर ही मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा के नुकसान सामने आ रहे हैं, वहीं सुरक्षा के लिहाज से भी यह बड़ी चूक हो सकती है।
सोमवार को हनीफ बख्श नामक शख्स डीबी स्टार कार्यालय पहुंचे और अपनी परेशानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बीएसएनएल का नंबर आइडिया पर पोर्ट करवाया है, लेकिन अब भी उनको दोनों कंपनियों की सेवा मिल रही है। मामले की गंभीरता को समझते हुए डीबी स्टार ने हर एंगल से पड़ताल की और पाया कि वास्तव में लापरवाही के चलते देश की दो बड़ी मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनियां एक ही नंबर पर सेवाएं दे रही हैं, जबकि नियमानुसार केवल आइडिया को इस नंबर पर सेवाएं देनी चाहिए थीं।
एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
सोमवार को हनीफ बख्श नामक शख्स डीबी स्टार कार्यालय पहुंचे और अपनी परेशानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बीएसएनएल का नंबर आइडिया पर पोर्ट करवाया है, लेकिन अब भी उनको दोनों कंपनियों की सेवा मिल रही है।
मामले की गंभीरता को समझते हुए डीबी स्टार ने हर एंगल से पड़ताल की और पाया कि वास्तव में लापरवाही के चलते देश की दो बड़ी मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनियां एक ही नंबर पर सेवाएं दे रही हैं, जबकि नियमानुसार केवल आइडिया को इस नंबर पर सेवाएं देनी चाहिए थीं। यदि कंपनियों की ऐसी गलती किसी अपराधी प्रवृति के उपभोक्ता के साथ होती तो किसी भी आपराधिक घटना के होने से इनकार नहीं किया जा सकता था।
जांच की तो बज उठे दोनों मोबाइल
हनीफ के मोबाइल डीबी स्टार कार्यालय में लाने के बाद हमने उनके एक ही नंबर की दो सिमों की जांच की और दोनों को अलग-अलग मोबाइल फोन में लगाकर कॉल किया। इसमें पाया कि उनकी आइडिया और बीएसएनएल दोनों ही सिमों पर फोन लग रहा है।
एक नंबर से उनकी पुरानी बीएसएनएल की सिम पर फोन लग रहा था और वहीं दूसरे नंबर से फोन करने पर उनकी आइडिया की नई सिम पर भी फोन लग रहा था। कंपनी की इस गलती को समझने के लिए हमने उनके नंबर पर आउटगोइंग कॉल भी की और इनकमिंग कॉल भी की, दोनों ही स्थितियों में उनकी एक ही नंबर की दोनों सिम एक साथ काम कर रही थीं।
हो सकते हैं दुष्परिणाम
1. नई सिम से किसी भी प्रकार का बैंकिंग ट्रान्जैक्शन (एसएमएस बैंकिंग) किया जाए और खाताधारक बाद में इससे इनकार कर दे, तो इसका पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। बैंक और जांच एंजेसियां नंबर के आधार पर सेवा प्रदाता कंपनी की पहचान करके उसी कंपनी का रिकॉर्ड खंगालेंगी। उन्हें पता ही नहीं चल पाएगा कि उपभोक्ता ने धोखाधड़ी के लिए नंबर पोर्ट करवा लिया हो।
2. एक ही नंबर पर दो सिम होने पर उपभोक्ता किसी भी एक सिम का प्रयोग आपराधिक गतिविधियों के लिए भी कर सकता है। जांच होने पर वह तर्क दे सकता है कि उसने पहली कंपनी का नंबर पोर्ट करवा लिया है।
3. उपभोक्ता को सबसे ज्यादा नुकसान बिलिंग पर होगा, क्योंकि दोनों सेवा प्रदाता कंपनियां अपने नंबर का बिल जनरेट करेंगी।
अब किसके पास जाऊं
मैं दो साल से बीएसएनएल की सेवाओं से परेशान हूं और नंबर पोर्टेबिलिटी का इंतजार कर रहा था। अब नंबर पोर्ट करवाने के बाद मेरी समस्या और बढ़ गई है। समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या करूं, किसके पास जाऊं? -हनीफ बख्श, उपभोक्ता
बीएसएनएल: हमारी गलती नहीं
यह बीएसएनएल की गलती नहीं है, क्योंकि उपभोक्ता द्वारा दिया नंबर पोर्टेबिलिटी का आवेदन रिजेक्ट कर दिया था। यह मोबाइल क्लीयरिंग हाउस की गलती हो सकती है।-अरविंद अहाके, सब-डिवीजन इंजीनियर, बीएसएनएल
आइडिया: गलती बीएसएनएल की है
यह सारा सिस्टम ऑटोमेटिक है। जब रिक्वेस्ट आती है, तभी नंबर पोर्ट होता है। इसमें गलती बीएसएनएल की है। यदि वहां से रिक्वेस्ट नहीं भेजी गई तो हमें कैसे मिली?-शिवांजलि सिंह, सीनियर मैनेजर- कॉर्पोरेट अफेयर्स, आइडिया
आवेदन तो रद्द कर दिया था
हमने उपभोक्ता का नंबर पोर्टेबिलिटी का आवेदन पहले ही खारिज कर दिया था। यह नंबर विशेष ऑफर के तहत उपभोक्ता को उपलब्ध कराया था, इसलिए इस पर नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा का लाभ नहीं मिल सकता। यह मोबाइल क्लीयरिंग हाउस की गलती हो सकती है, क्योंकि आवेदन रद्द करने के बाद आइडिया उस पर सेवा नहीं दे सकता है। -अरविंद अहाके, सब-डिवीजन इंजीनियर, बीएसएनएल
लापरवाही दोनों कंपनियों की
एक ही नंबर दो नेटवर्क में चलना ड्यू डेलीगेंस का मामला है। इसे दरवाजे के बाहर खड़े चौकीदार की तरह से समझा जा सकता है। जैसे चौकीदार हर आने-जाने वाले का रिकॉर्ड रखता है वैसे ही इस मामले में जब बीएसएनएल के ग्राहक ने नंबर को पोर्ट करने के लिए एसएमएस किया था, तो यह उसका दायित्व था कि वह ग्राहक को इसकी जानकारी देता कि उसका नंबर विशेष योजना के तहत दिया गया था, इसलिए पोर्ट नहीं किया जा सकता। ताकि ग्राहक अग्रिम कार्रवाई से बचता। वहीं गलती आइडिया की भी है। अब कंपनियां ग्राहकों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर बताएं कि किन लोगों का नंबर पोर्ट हो सकता है, किनका नहीं।-कुलभूषण यादव, साइबर कंसल्टेंट
उपभोक्ता शिकायत तो करे
यदि उपभोक्ता का नंबर पोर्ट नहीं हो सकता था तो बीएसएनएल ने पोर्टिंग कोड कैसे जारी रहने दिया। उसने पोर्टिंग कोड जारी करने के बाद ग्राहक को सूचना क्यों नहीं दी कि नंबर पोर्ट नहीं हो सकता। यदि किसी उपभोक्ता के साथ ऐसा हुआ है तो वह ट्राई में इसकी शिकायत करे। इसके बाद ही जांच में पता चल सकेगा कि गलती कहां पर हुई है और उसे दूर किया जाएगा।- एस.एन.के. चंद्रा, अधिकारी, ट्राई, दिल्ली
क्या आपको भी नंबर पोर्ट कराने के बाद कोई दिककत आ रही है। क्या आप भी अपना पुराना नंबर रखकर कंपनी बदलने के बाद दिक्कतें महसूस कर रहे हैं। आप अपनी परेशानी और नंबर पोर्टेबिलिटी के बारे में राय कमेंट बॉक्स में लिखकर दुनिया भर के पाठकों से शेयर कर सकते हैं।
पहली कंपनी की ओर से सिम बंद नहीं करने के कारण उपभोक्ता को दोनों कंपनियों की सेवाएं मिल रही हैं। इससे उपभोक्ता की जेब पर तो मार पड़ेगी, साथ ही कुछ दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। वहीं कंपनियां इस मामले पर कुछ स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं कर पा रही हैं।
राजधानी के हनीफ बख्श अभी तक बीएसएनएल उपभोक्ता थे और उनका नंबर 9425302050 है। 20 जनवरी से देशभर में मोबाइल पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू होने के बाद उन्होंने अपना नंबर बदले बिना मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी बदलते हुए आइडिया की सेवाएं लेना शुरू कर दीं।
30 जनवरी 2011 से उनकी आइडिया की सिम एक्टीवेट तो हो गई, लेकिन बीएसएनएल की सिम भी चालू रही। ऐसे में सवाल यह है कि अगर सभी प्रक्रिया नियमानुसार थीं तो आइडिया की सिम चालू होने पर बीएसएनएल की सिम बंद क्यों नहीं हुई?
कंपनियों की ऐसी लापरवाही के चलते एक ओर जहां प्राथमिक स्तर पर ही मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा के नुकसान सामने आ रहे हैं, वहीं सुरक्षा के लिहाज से भी यह बड़ी चूक हो सकती है।
सोमवार को हनीफ बख्श नामक शख्स डीबी स्टार कार्यालय पहुंचे और अपनी परेशानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बीएसएनएल का नंबर आइडिया पर पोर्ट करवाया है, लेकिन अब भी उनको दोनों कंपनियों की सेवा मिल रही है। मामले की गंभीरता को समझते हुए डीबी स्टार ने हर एंगल से पड़ताल की और पाया कि वास्तव में लापरवाही के चलते देश की दो बड़ी मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनियां एक ही नंबर पर सेवाएं दे रही हैं, जबकि नियमानुसार केवल आइडिया को इस नंबर पर सेवाएं देनी चाहिए थीं।
एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
सोमवार को हनीफ बख्श नामक शख्स डीबी स्टार कार्यालय पहुंचे और अपनी परेशानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका बीएसएनएल का नंबर आइडिया पर पोर्ट करवाया है, लेकिन अब भी उनको दोनों कंपनियों की सेवा मिल रही है।
मामले की गंभीरता को समझते हुए डीबी स्टार ने हर एंगल से पड़ताल की और पाया कि वास्तव में लापरवाही के चलते देश की दो बड़ी मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनियां एक ही नंबर पर सेवाएं दे रही हैं, जबकि नियमानुसार केवल आइडिया को इस नंबर पर सेवाएं देनी चाहिए थीं। यदि कंपनियों की ऐसी गलती किसी अपराधी प्रवृति के उपभोक्ता के साथ होती तो किसी भी आपराधिक घटना के होने से इनकार नहीं किया जा सकता था।
जांच की तो बज उठे दोनों मोबाइल
हनीफ के मोबाइल डीबी स्टार कार्यालय में लाने के बाद हमने उनके एक ही नंबर की दो सिमों की जांच की और दोनों को अलग-अलग मोबाइल फोन में लगाकर कॉल किया। इसमें पाया कि उनकी आइडिया और बीएसएनएल दोनों ही सिमों पर फोन लग रहा है।
एक नंबर से उनकी पुरानी बीएसएनएल की सिम पर फोन लग रहा था और वहीं दूसरे नंबर से फोन करने पर उनकी आइडिया की नई सिम पर भी फोन लग रहा था। कंपनी की इस गलती को समझने के लिए हमने उनके नंबर पर आउटगोइंग कॉल भी की और इनकमिंग कॉल भी की, दोनों ही स्थितियों में उनकी एक ही नंबर की दोनों सिम एक साथ काम कर रही थीं।
हो सकते हैं दुष्परिणाम
1. नई सिम से किसी भी प्रकार का बैंकिंग ट्रान्जैक्शन (एसएमएस बैंकिंग) किया जाए और खाताधारक बाद में इससे इनकार कर दे, तो इसका पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। बैंक और जांच एंजेसियां नंबर के आधार पर सेवा प्रदाता कंपनी की पहचान करके उसी कंपनी का रिकॉर्ड खंगालेंगी। उन्हें पता ही नहीं चल पाएगा कि उपभोक्ता ने धोखाधड़ी के लिए नंबर पोर्ट करवा लिया हो।
2. एक ही नंबर पर दो सिम होने पर उपभोक्ता किसी भी एक सिम का प्रयोग आपराधिक गतिविधियों के लिए भी कर सकता है। जांच होने पर वह तर्क दे सकता है कि उसने पहली कंपनी का नंबर पोर्ट करवा लिया है।
3. उपभोक्ता को सबसे ज्यादा नुकसान बिलिंग पर होगा, क्योंकि दोनों सेवा प्रदाता कंपनियां अपने नंबर का बिल जनरेट करेंगी।
अब किसके पास जाऊं
मैं दो साल से बीएसएनएल की सेवाओं से परेशान हूं और नंबर पोर्टेबिलिटी का इंतजार कर रहा था। अब नंबर पोर्ट करवाने के बाद मेरी समस्या और बढ़ गई है। समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या करूं, किसके पास जाऊं? -हनीफ बख्श, उपभोक्ता
बीएसएनएल: हमारी गलती नहीं
यह बीएसएनएल की गलती नहीं है, क्योंकि उपभोक्ता द्वारा दिया नंबर पोर्टेबिलिटी का आवेदन रिजेक्ट कर दिया था। यह मोबाइल क्लीयरिंग हाउस की गलती हो सकती है।-अरविंद अहाके, सब-डिवीजन इंजीनियर, बीएसएनएल
आइडिया: गलती बीएसएनएल की है
यह सारा सिस्टम ऑटोमेटिक है। जब रिक्वेस्ट आती है, तभी नंबर पोर्ट होता है। इसमें गलती बीएसएनएल की है। यदि वहां से रिक्वेस्ट नहीं भेजी गई तो हमें कैसे मिली?-शिवांजलि सिंह, सीनियर मैनेजर- कॉर्पोरेट अफेयर्स, आइडिया
आवेदन तो रद्द कर दिया था
हमने उपभोक्ता का नंबर पोर्टेबिलिटी का आवेदन पहले ही खारिज कर दिया था। यह नंबर विशेष ऑफर के तहत उपभोक्ता को उपलब्ध कराया था, इसलिए इस पर नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा का लाभ नहीं मिल सकता। यह मोबाइल क्लीयरिंग हाउस की गलती हो सकती है, क्योंकि आवेदन रद्द करने के बाद आइडिया उस पर सेवा नहीं दे सकता है। -अरविंद अहाके, सब-डिवीजन इंजीनियर, बीएसएनएल
लापरवाही दोनों कंपनियों की
एक ही नंबर दो नेटवर्क में चलना ड्यू डेलीगेंस का मामला है। इसे दरवाजे के बाहर खड़े चौकीदार की तरह से समझा जा सकता है। जैसे चौकीदार हर आने-जाने वाले का रिकॉर्ड रखता है वैसे ही इस मामले में जब बीएसएनएल के ग्राहक ने नंबर को पोर्ट करने के लिए एसएमएस किया था, तो यह उसका दायित्व था कि वह ग्राहक को इसकी जानकारी देता कि उसका नंबर विशेष योजना के तहत दिया गया था, इसलिए पोर्ट नहीं किया जा सकता। ताकि ग्राहक अग्रिम कार्रवाई से बचता। वहीं गलती आइडिया की भी है। अब कंपनियां ग्राहकों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर बताएं कि किन लोगों का नंबर पोर्ट हो सकता है, किनका नहीं।-कुलभूषण यादव, साइबर कंसल्टेंट
उपभोक्ता शिकायत तो करे
यदि उपभोक्ता का नंबर पोर्ट नहीं हो सकता था तो बीएसएनएल ने पोर्टिंग कोड कैसे जारी रहने दिया। उसने पोर्टिंग कोड जारी करने के बाद ग्राहक को सूचना क्यों नहीं दी कि नंबर पोर्ट नहीं हो सकता। यदि किसी उपभोक्ता के साथ ऐसा हुआ है तो वह ट्राई में इसकी शिकायत करे। इसके बाद ही जांच में पता चल सकेगा कि गलती कहां पर हुई है और उसे दूर किया जाएगा।- एस.एन.के. चंद्रा, अधिकारी, ट्राई, दिल्ली
क्या आपको भी नंबर पोर्ट कराने के बाद कोई दिककत आ रही है। क्या आप भी अपना पुराना नंबर रखकर कंपनी बदलने के बाद दिक्कतें महसूस कर रहे हैं। आप अपनी परेशानी और नंबर पोर्टेबिलिटी के बारे में राय कमेंट बॉक्स में लिखकर दुनिया भर के पाठकों से शेयर कर सकते हैं।
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