जोधपुर। ‘जब मैं अपनी बुरी फिल्म देखता हूं और चमचागिरी करने वाले उसकी भी तारीफ करते हैं तो जी करता है कि उन्हें तमाचा जड़ दूं, क्योंकि अगर मैं उनकी बात को सच मान लूं तो अच्छा काम कर ही नहीं सकूंगा।’ यह कहना था सिने अभिनेता अनुपम खेर का। वे जीडी मेमोरियल कॉलेज में विद्यार्थियों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने विद्यार्थियों के बेहतर जीवन के कई टिप्स दिए। उन्होंने शॉर्टकट लाइफ को शॉर्टकट सक्सेस बताते हुए व्यक्तित्व विकास, जीवन जीने के नजरिए और फिल्मों पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ निजी जीवन में भी अच्छा नागरिक बनने की सलाह दी। फिल्में केवल मनोरंजन के लिए हैं। जिस तरह टूथपेस्ट दांत साफ करने की चीज है, पेट साफ करने की नहीं उसी तरह फिल्में मनोरंजन के लिए हैं। अनुपम ने अपने जवाबों से कई बार हंसाया। संस्थान के चेयरमैन एसएन कच्छवाहा, प्रो. एलसी भंडारी, प्रो. अरिंदम पॉल व डॉ. भावना अग्रवाल ने बुके भेंट कर अनुपम का स्वागत किया। मनीष कच्छवाहा व मनोज कच्छवाहा ने वोट ऑफ थैंक्स दिया।
पहली प्रायोरिटी है मनोरंजन
देश को आजादी मिली तो प्रायोरिटी देश का विकास करने की थीं लेकिन अब 21वीं सदी में मनोरंजन लोगों की प्राथमिकता बन गया है। यही कारण है कि मनोरंजन के कई साधन मिल रहे हैं। इसके बावजूद फिल्में लार्जर दैन लाइफ थीं और रहेंगी। यह कहना था सिने अभिनेता अनुपम खेर का। बड़े बजट की फिल्मों के फ्लॉप होने के बारे में उनका कहना था कि पहले लोग लोग फिल्मों को सपनों की दुनिया मानते थे लेकिन अब यथार्थ पर फिल्में बन रही हैं। हालांकि अब भी तथ्यपरक फिल्में दर्शकों को पसंद आ रही हैं। अब दर्शक अपने आसपास की दुनिया पर आधारित फिल्में ही पसंद कर रहे हैं।
देश को आजादी मिली तो प्रायोरिटी देश का विकास करने की थीं लेकिन अब 21वीं सदी में मनोरंजन लोगों की प्राथमिकता बन गया है। यही कारण है कि मनोरंजन के कई साधन मिल रहे हैं। इसके बावजूद फिल्में लार्जर दैन लाइफ थीं और रहेंगी। यह कहना था सिने अभिनेता अनुपम खेर का। बड़े बजट की फिल्मों के फ्लॉप होने के बारे में उनका कहना था कि पहले लोग लोग फिल्मों को सपनों की दुनिया मानते थे लेकिन अब यथार्थ पर फिल्में बन रही हैं। हालांकि अब भी तथ्यपरक फिल्में दर्शकों को पसंद आ रही हैं। अब दर्शक अपने आसपास की दुनिया पर आधारित फिल्में ही पसंद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सब कुछ बदल गया है लेकिन एजुकेशन सिस्टम नहीं बदला। अंग्रेजों ने जो पढ़ाई का तरीका शुरू किया, हम आज भी उसी पर चल रहे हैं। यह साइकोलॉजिकली सही नहीं है। अब इंटरनेट का जमाना है लेकिन बच्चे अभी भी स्लेट-पेंसिल से रट्टा लगा रहे हैं। बच्चों का व्यक्तित्व निखारने के लिए उन्होंने एक्टिंग और नाटक को बेहतरीन जरिया बताया।
अनुपम के टिप्स
सफलता के लिए मेहनत और ईमानदारी जरूरी।
वक्त एक मौका जरूर देता है बशर्ते आप तैयार हों।
जिंदगी सफर है, लक्ष्य नहीं। जरूरी यह है कि यह सफर आप कैसे तय करते हैं।
क्या मिल रहा है उस पर ध्यान दें। न कि क्या नहीं मिल रहा है उस पर।
मुस्कराइए क्योंकि इसका कोई विकल्प नहीं। गुस्से में भी मुस्कराइए।
दूसरों से अलग होना जरूरी है।
व्यक्तित्व निखारें और अपने व्यक्तित्व से खुश रहें।
सपने देखना जरूरी है क्योंकि यही तय करते हैं कि उड़ान कितनी है।
काम करने से ही काम आता है इसलिए खूब काम करें।
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