अलबरदई ने इन संभावनाओं को नकारा है कि मुबारक के बाद का मिस्र अमेरिका-विरोधी होगा.
मोहम्मद अलबरदई ने पश्चिमी देशों की इस चिंता को शांत करने की कोशिश की है कि मुबारक के बाद का मिस्र इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ हो सकता है. नोबेल पुरस्कार विजेता अलबरदई मिस्र के प्रमुख विपक्षी नेता बनकर उभरे हैं.
अलबरदई ने एक समाचार एजेंसी से कहा, "यह प्रचार कि मिस्र लोकतंत्र में बदलने के बाद अमेरिका और इस्राइल का विरोधी हो जायेगा, ये केवल प्रचार और कल्पना मात्र है."
हिंसा में 500 मरे
212 भारतीय वापस लौटे
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था का अच्छा प्रबंधन करने वाले अलबरदई को नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था. मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ काहिरा में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद वह स्वदेश लौट आये थे.
विश्व भर में जाने जाने वाले लेकिन मिस्र में कम चर्चित रहे वरिष्ठ राजनयिक अलबरदई राष्ट्रपति के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में प्रमुख विपक्षी नेता बनकर उभरे हैं. इन प्रदर्शनों में कई लोग मारे गये हैं.
अलबरदई ने उप-राष्ट्रपति उमर सुलेइमान के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और जोर दिया कि मुबारक पहले गद्दी छोड़ें.
उन्होंने कहा, "जब तक मुबारक सत्ता में हैं तब तक मैं कोई बातचीत नहीं करूंगा. जो भी आप करेंगे ये उनके शासन को वैधता देगा जो मेरे नजरिये से वह खो चुके हैं."
मिस्र में ही है मुबारक का बेटा
मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक का बेटा गमल लंदन में नहीं है, बल्कि वह अभी भी मिस्र में ही है.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने बीबीसी को बताया "गमल मिस्र में ही है, लंदन में नहीं, जैसा कि अफवाहें फैलायी जा रही हैं."
हेग ने कहा कि मैने मिस्र के नेता का उत्तराधिकारी माने जा रहे गमल मुबारक से बातचीत की है और उन्हें सरकार समर्थित हिंसा के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है.
हेग ने बताया "मैंने गमल से टेलीफोन पर बातचीत की है और उनसे कहा है कि वहां अगर सरकार समर्थित हिंसा होती है तो वह मिस्र और वर्तमान सरकार के लिए घातक साबित होगी."
पिछले सप्ताह मिस्र की वेबसाइटों ने अपुष्ट सूत्रों के हवाले से खबर दी थी जिसमें बताया गया था कि जन विरोध और व्यापक देशव्यापी अशांति को देखते हुए गुमल मुबारक लंदन भाग गया है.
मीडिया पर हमलों की निंदा
मीडिया निगरानी समूह "रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (आरएसएफ)" ने मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के समर्थकों की ओर से विदेशी मीडिया पर किए गए हमलों की निंदा की है.
आरएसएफ के महासचिव जेन फ्रैंकोसि जुर्लियड ने कहा, "ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति मुबारक को हटाने की मांग करने वाले प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बदला लेने की भावना के तहत ये हमले हो रहे हैं."
उन्होंने बीबीसी, अल-जज़ीरा, सीएनएन, अल-अरबिया और एबीसी न्यूज सहित अन्य पत्रकारों पर हुए हमलों के बारे में कहा, "वे पत्रकारों को चुप करना चाहते हैं और न्यूज़ मीडिया को धोखा देना चाहते हैं."
उन्होंने इन हमलों के लिए मुबारक के समर्थकों को दोषी ठहराया.
समूह का कहना है कि "मुबारक समर्थकों के साथ सादे कपड़ों में पुलिस वाले भी थे". मीडिया पर ये हमले बुधवार को मुबारक के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के बीच हुए.
जुर्लियड ने कहा कि कई पत्रकारों को चोट लगी और कई का सामान चुरा लिया गया.
मोहम्मद अलबरदई ने पश्चिमी देशों की इस चिंता को शांत करने की कोशिश की है कि मुबारक के बाद का मिस्र इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ हो सकता है. नोबेल पुरस्कार विजेता अलबरदई मिस्र के प्रमुख विपक्षी नेता बनकर उभरे हैं.
अलबरदई ने एक समाचार एजेंसी से कहा, "यह प्रचार कि मिस्र लोकतंत्र में बदलने के बाद अमेरिका और इस्राइल का विरोधी हो जायेगा, ये केवल प्रचार और कल्पना मात्र है."
हिंसा में 500 मरे
212 भारतीय वापस लौटे
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था का अच्छा प्रबंधन करने वाले अलबरदई को नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था. मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ काहिरा में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद वह स्वदेश लौट आये थे.
विश्व भर में जाने जाने वाले लेकिन मिस्र में कम चर्चित रहे वरिष्ठ राजनयिक अलबरदई राष्ट्रपति के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में प्रमुख विपक्षी नेता बनकर उभरे हैं. इन प्रदर्शनों में कई लोग मारे गये हैं.
अलबरदई ने उप-राष्ट्रपति उमर सुलेइमान के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और जोर दिया कि मुबारक पहले गद्दी छोड़ें.
उन्होंने कहा, "जब तक मुबारक सत्ता में हैं तब तक मैं कोई बातचीत नहीं करूंगा. जो भी आप करेंगे ये उनके शासन को वैधता देगा जो मेरे नजरिये से वह खो चुके हैं."
मिस्र में ही है मुबारक का बेटा
मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक का बेटा गमल लंदन में नहीं है, बल्कि वह अभी भी मिस्र में ही है.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने बीबीसी को बताया "गमल मिस्र में ही है, लंदन में नहीं, जैसा कि अफवाहें फैलायी जा रही हैं."
हेग ने कहा कि मैने मिस्र के नेता का उत्तराधिकारी माने जा रहे गमल मुबारक से बातचीत की है और उन्हें सरकार समर्थित हिंसा के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है.
हेग ने बताया "मैंने गमल से टेलीफोन पर बातचीत की है और उनसे कहा है कि वहां अगर सरकार समर्थित हिंसा होती है तो वह मिस्र और वर्तमान सरकार के लिए घातक साबित होगी."
पिछले सप्ताह मिस्र की वेबसाइटों ने अपुष्ट सूत्रों के हवाले से खबर दी थी जिसमें बताया गया था कि जन विरोध और व्यापक देशव्यापी अशांति को देखते हुए गुमल मुबारक लंदन भाग गया है.
मीडिया पर हमलों की निंदा
मीडिया निगरानी समूह "रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (आरएसएफ)" ने मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के समर्थकों की ओर से विदेशी मीडिया पर किए गए हमलों की निंदा की है.
आरएसएफ के महासचिव जेन फ्रैंकोसि जुर्लियड ने कहा, "ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति मुबारक को हटाने की मांग करने वाले प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बदला लेने की भावना के तहत ये हमले हो रहे हैं."
उन्होंने बीबीसी, अल-जज़ीरा, सीएनएन, अल-अरबिया और एबीसी न्यूज सहित अन्य पत्रकारों पर हुए हमलों के बारे में कहा, "वे पत्रकारों को चुप करना चाहते हैं और न्यूज़ मीडिया को धोखा देना चाहते हैं."
उन्होंने इन हमलों के लिए मुबारक के समर्थकों को दोषी ठहराया.
समूह का कहना है कि "मुबारक समर्थकों के साथ सादे कपड़ों में पुलिस वाले भी थे". मीडिया पर ये हमले बुधवार को मुबारक के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के बीच हुए.
जुर्लियड ने कहा कि कई पत्रकारों को चोट लगी और कई का सामान चुरा लिया गया.

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