बेंगलुरू। भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) ने इस बात का खंडन किया है कि उसकी वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए समझौते से सरकार को दो लाख करो़ड रूपए का घाटा हुआ है। उसके मुताबिक इस करार को लागू ही नहीं किया गया तो हानि होने का सवाल ही नहीं उठता।
इसरो प्रमुख के राधाकृष्ण ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि देवास को अब तक ना तो स्पेक्ट्रम और ना ही उपग्रह मुहैया करवाए गए हैं। इसलिए 2005 में एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए करार से सरकार को कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि देवास मल्टीमीडिया और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स के बीच दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम के लिए हुए करार पर पिछले कुछ दिनों से मीडिया में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक इस करार से सरकार को दो लाख करो़ड रूपए का घाटा हुआ है। हालांकि इसरो इस करार को खत्म करने के लिए पहले ही प्रक्रिया शुरू कर चुका है।
गौरतलब है कि देवास मल्टीमीडिया कंपनी को इसरो के एक पूर्व अधिकारी ने शुरू किया है। मंगलवार देर शाम हुई एक प्रेसवार्ता में इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने स्वीकार किया कि इस करार की जानकारी अंतरिक्ष आयोग या केंद्रीय कैबिनेट को नहीं दी गई थी। करार के तहत इसरो ने अपने दो उपग्रहों पर स्थित सभी ट्रांसपोंडरों के 90 प्रतिशत अधिकार देवास मल्टीमीडिया देना तय किया था।
के राधाकृष्णन ने पत्रकारों को बताया, इस बात की साफ तौर पर जानकारी कैबिनेट को नहीं दी गई थी कि जीसैट-छङ और जीसैट-छह ए उपग्रहों का अधिकतर इस्तेमाल एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए वाणिज्यिक करार को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
इसरो प्रमुख की इस प्रेसवार्ता से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मीडिया में आ रही इस खबर का खंडन किया गया कि देवास को 70 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम मात्र एक हजार करो़ड रूपए में बेच दिया गया है। कार्यालय ने कहा कि अभी इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, इसलिए दो लाख करो़ड का हानि की बात निराधार है। इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा कि देवा से साथ करार को खत्म करने की प्रक्रिया इसलिए शुरू की गई है कि एस-बैंड स्पेक्ट्रम की जरूरत राष्ट्रीय सामरिक उद्देश्यों के लिए हैं। करार खत्म करने का फैसला जुलाई, 201 में लिया गया था और इस दिशा में प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर इस मसले ने प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा को सरकार पर फिर से प्रहार करने का मौका दे दिया है। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सरकार पर आक्रामक रूख अपनाते हुए कहा, यह जाहिर हो गया है कि मनमोहन सिंह आजादी के बाद सबसे भ्रष्ट सरकार चला रहे हैं, फिर भी यह दावा किया जाता है कि वे मिस्टर क्लीन हैं।
इसरो प्रमुख के राधाकृष्ण ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि देवास को अब तक ना तो स्पेक्ट्रम और ना ही उपग्रह मुहैया करवाए गए हैं। इसलिए 2005 में एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए करार से सरकार को कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि देवास मल्टीमीडिया और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स के बीच दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम के लिए हुए करार पर पिछले कुछ दिनों से मीडिया में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक इस करार से सरकार को दो लाख करो़ड रूपए का घाटा हुआ है। हालांकि इसरो इस करार को खत्म करने के लिए पहले ही प्रक्रिया शुरू कर चुका है।
गौरतलब है कि देवास मल्टीमीडिया कंपनी को इसरो के एक पूर्व अधिकारी ने शुरू किया है। मंगलवार देर शाम हुई एक प्रेसवार्ता में इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने स्वीकार किया कि इस करार की जानकारी अंतरिक्ष आयोग या केंद्रीय कैबिनेट को नहीं दी गई थी। करार के तहत इसरो ने अपने दो उपग्रहों पर स्थित सभी ट्रांसपोंडरों के 90 प्रतिशत अधिकार देवास मल्टीमीडिया देना तय किया था।
के राधाकृष्णन ने पत्रकारों को बताया, इस बात की साफ तौर पर जानकारी कैबिनेट को नहीं दी गई थी कि जीसैट-छङ और जीसैट-छह ए उपग्रहों का अधिकतर इस्तेमाल एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए वाणिज्यिक करार को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
इसरो प्रमुख की इस प्रेसवार्ता से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मीडिया में आ रही इस खबर का खंडन किया गया कि देवास को 70 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम मात्र एक हजार करो़ड रूपए में बेच दिया गया है। कार्यालय ने कहा कि अभी इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, इसलिए दो लाख करो़ड का हानि की बात निराधार है। इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा कि देवा से साथ करार को खत्म करने की प्रक्रिया इसलिए शुरू की गई है कि एस-बैंड स्पेक्ट्रम की जरूरत राष्ट्रीय सामरिक उद्देश्यों के लिए हैं। करार खत्म करने का फैसला जुलाई, 201 में लिया गया था और इस दिशा में प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर इस मसले ने प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा को सरकार पर फिर से प्रहार करने का मौका दे दिया है। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सरकार पर आक्रामक रूख अपनाते हुए कहा, यह जाहिर हो गया है कि मनमोहन सिंह आजादी के बाद सबसे भ्रष्ट सरकार चला रहे हैं, फिर भी यह दावा किया जाता है कि वे मिस्टर क्लीन हैं।
No comments:
Post a Comment