Sunday, February 6, 2011

जून-जुलाई में होंगे पार्षद-सदस्यों के चुनाव!

सितंबर-अक्टूबर तक चुने जाएंगे महापौर व अध्यक्ष
-30 नवंबर को खत्म हो रहा है मौजूदा निकायों का कार्यकाल
अजय जायसवाल
लखनऊ : अगर सब कुछ ठीक रहा तो प्रदेश सरकार नगरीय निकायों के पार्षदों-सदस्यों का चुनाव जनता से जून-जुलाई में कराएगी। पार्षदों-सदस्यों से महापौर व अध्यक्षों का चुनाव सितंबर-अक्टूबर में कराया जाएगा। इसके लिए 31 मई तक जहां राज्य सरकार निकायों के परिसीमन व आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने में लगी है वहीं राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची बना रहा है।
गौरतलब है कि प्रदेश की 630 निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल इस साल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निकायों का कार्यकाल खत्म होने से छह माह पहले यानि पहली जून के बाद कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में आयोग द्वारा मतदाता सूची तैयार कराने का काम 10 जनवरी से किया जा रहा है। सूची का अनन्तिम प्रकाशन पहली अप्रैल को जबकि अंतिम रूप से सूची पहली जून को प्रकाशित होगी।
शासन स्तर पर नगर विकास विभाग द्वारा नई व सीमा विस्तार वाली निकायों के परिसीमन का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इस संबंध में जल्द ही अधिसूचना जारी कर आपत्तियां मांगी जाएंगी। परिसीमन होते ही सभी निकायों में पदों के आरक्षण का काम शुरू होगा। चूंकि पदों के चक्रानुक्रम आरक्षण की निकाय अधिनियम में पहले से ही व्यवस्था है, इसलिए उच्च स्तरीय हरी झंडी मिलते ही पदों का आरक्षण होने में देर नहीं लगेगी। पहली जून तक मतदाता सूची, परिसीमन व आरक्षण का काम पूरा होने के बाद आयोग, राज्य सरकार को निकाय चुनाव कराने का प्रस्तावित कार्यक्रम भेजेगा।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार ने आयोग को इस तरह के संकेत दिए हैं कि वह जून-जुलाई में पार्षद व सदस्यों के चुनाव कराना चाहती है। आयोग को इनके चुनाव सीधे जनता से कराने में तकरीबन 45 दिन का वक्त लगेगा। चुनाव दो चरणों में कराने की बात है। चूंकि अब महापौर व अध्यक्ष के चुनाव जनता के बजाय पार्षदों-सदस्यों द्वारा होने हैं, इसलिए इनके चुनाव के बाद सरकार की मंशा के अनुसार आयोग महापौर-अध्यक्ष के चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा।
सूत्रों का कहना है कि वैसे तो पार्षदों-सदस्यों के चुने जाने के बाद जल्द से जल्द महापौर व अध्यक्षों के चुनाव कराने की व्यवस्था एक्ट में रखी जा रही है, लेकिन इस बार सरकार अगस्त तक सभी निकायों में पार्षदों व सदस्यों को नामित करने के बाद सितंबर-अक्टूबर तक महापौर व अध्यक्ष के चुनाव टाल सकती है। आयोग के संयुक्त निर्वाचन आयुक्त जेपी सिंह का कहना है कि मौजूदा महापौर-अध्यक्ष, पार्षद या सदस्य के रहते हुए भी चुनाव कराने में किसी तरह की कोई विधिक बाधा नहीं है। जनता से पार्षद-सदस्यों के चुनाव कराने के बाद, महापौर-अध्यक्ष पद के चुनाव कराए जा सकते हैं। सिंह ने साफ किया कि पहले चुनाव होने पर भी मौजूदा निकाय का कार्यकाल 30 नवंबर तक बना रहेगा। नवनिर्वाचित महापौर, अध्यक्ष, पार्षद, सदस्य तब तक उसी तरह इंतजार करेंगे जैसे हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में हुआ है।
इनसेट-एक
जनता चुनेगी निकायों के 11291 पार्षद-सदस्य
लखनऊ, जाब्यू : प्रदेश की 630 नगरीय निकायों के 11291 पार्षद व सदस्यों को सीधे जनता चुनेगी। इसमें से 13 नगर निगम के 1040 पार्षदों के चुनाव जहां वोटिंग मशीन से होंगे वहीं 194 नगर पालिका परिषद के 5097 सदस्य व 423 नगर पंचायत के 5154 सदस्यों का चुनाव पूर्व की भांति मतपत्र के जरिए ही होगा। चूंकि लखनऊ में बक्शी का तालाब, सिद्धार्थनगर में डुमरियागंज व उस्का बाजार नगर पंचायत नवगठित हैं, इसलिए उनके परिसीमन का काम अभी किया जा रहा है। ऐसे में इन निकायों के वार्डो की संख्या में बदलाव संभव है।
इनसेट- दो
पार्षद का चुनाव हारे तो न लड़ सकेंगे महापौर का चुनाव
लखनऊ, जाब्यू : वैसे तो कोई भी व्यक्ति महापौर पद का चुनाव लड़ सकता है, लेकिन यदि वह पार्षद का चुनाव हार जाता है, तो महापौर का चुनाव नहीं लड़ सकेगा। पार्षद पद के चुनाव में हारने वाले, चुनाव से छह माह की अवधि में होने वाले महापौर का चुनाव लड़ने के लायक नहीं होंगे। महापौर का चुनाव वही लड़ सकेगा, जिसकी उम्र 30 वर्ष से ज्यादा होगी और वह संबंधित नगर का रहने वाला होगा। विदित हो कि अब महापौर पद का चुनाव पार्षदों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मताधिकार के माध्यम से गुप्त मतदान द्वारा होना है। मौजूदा महापौर या अध्यक्ष फिर से इन पदों का चुनाव लड़ सकेंगे।

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