संतोषगढ़/ऊना। उन मां-बाप को क्या पता था कि जिन्हें वह नहला कर स्कूल ड्रेस के साथ उनके बैग में टिफिन डाल कर स्कूल भेज रहे हैं। फिर कभी वापस नहीं लौट पाएंगे। जब लंच टाइम में बच्चे स्कूल में खेल रहे थे कि अचानक छत्रपुर स्कूल की बाहरी दीवार टूट गई और पांच बच्चों के ऊपर गिर गई। जिससे चार बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई औरएक बच्च गंभीर रूप से घायल हो गया।
जब बच्चों के मां-बाप को इस घटना की जानकारी मिली, तो उनपर दुख का पहाड़ ही टूट गया और पूरे गांव में मातम छा गया। बच्चों पर दीवार गिरने के बाद बच्चों को ग्रामीणों द्वारा तत्काल निकाल तो लिया गया, परंतु पांच में चार बच्चे मौत के मुंह में चले गए थे। माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर कोई डॉक्टर तो कोई जमा दो के बाद इंजीनियरिंग, तो शिक्षक, तो कई एसडीओ बनाना चाहते थे, परंतु उनके मां-बाप के सपने धरे-धरे के रह गए। वहीं बहन रोती बिलखती यह कह रही थी कि अब मैं किसके हाथ पर राखी बांधूगी।
परिजनों को 5-5 हजार
जिला प्रशासन ने इस हादसे में मारे गए बच्चों के परिजनों को फौरी राहत दी है। एसडीएम प्रदीप ठाकुर के मुताबिक मृतक बच्चों के परिजनों को 5-5 हजार रुपए तथा घायल के परिजनों को दो हजार रुपए प्रदान किए हैं।
सत्ती अस्पताल पहुंचे
सदर के विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव सतपाल सत्ती सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने बीबीएमबी अस्पताल नंगल का भी दौरा किया और घायल छात्र करण कुमार का कुशलक्षेम पूछा। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को तुरन्त राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने घायल छात्र के बेहतर इलाज के भी प्रशासन को निर्देश दिए। इस मामले की जांच करवाने के आदेश जारी किए गए हैं। निर्माण की गुणवत्ता की जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने जताई संवेदना
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, शिक्षा मंत्री आईडी धीमान, मुख्य संसदीय सचिव सतपाल सत्ती एवं वीरेन्द्र कंवर ने प्राइमरी स्कूल छत्तरपुर के चार बच्चों मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री तथा अन्य सभी ने मृतकों की आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके परिजनों से इस दु:ख की घड़ी में अपना मनोबल बनाए रखने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दुर्घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
घटिया सामग्री से बनी थी दीवार
जिलाधीश को लोगों ने बताया कि दीवार 10 फुट ऊंची थी और तेज हवा के कारण वह गिर गई। इसके चलते हादसा हुआ। लोगों ने कहा कि यह बच्चे मिड-डे मील का खाना खाने के बाद साढ़े 12 बजे स्कूल के गेट से बाहर चले गए थे और स्कूल की दीवार के साथ खड़े थे। तेज हवा चलने दीवार बच्चों के ऊपर आ गिरी। लोगों ने आरोप लगाया कि दीवार में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है। लोगों ने जिलाधीश व एसएसपी से मांग की कि घटिया कार्य करने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
घटना के बाद स्कूल में भय का माहौल
स्कूल की दीवार गिरने से स्कूल में काफी भय का माहौल था। इलाके के सभी लोग स्कूल में एकत्र हो गए। जब स्कूल में यह खबर फैली की ४ बच्चों की मौत हो चुकी है तो अध्यापिकाएं भी रोने लगी और अप्पर ढाडा गांव में मातम छा गया।
पीटीए अध्यक्ष ने की मुआवजे की मांग
स्कूल में उपस्थित पीटीए की अध्यक्षा रीना कुमारी ने जहां मृत छात्रों के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग की, वहीं उन्होंने कहा कि इसके लिए घटिया कार्य करवाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
स्कूल में विकास कार्यो की भी जांच होगी: पंच
इस मौके पर गांव के सरपंच अनिल अभिमन्यू ने कहा कि वह प्रशासन से मांग करते है कि घटिया कार्य करवाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए और दुर्घटना में मारे गए बच्चों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्हांेने कहा कि यह दीवार उनसे पहले सरपंच के कार्यकाल में बनी थी। उन्हें सरपंच बने हुए अभी एक महीना ही हुआ है। उन्होंने कहा कि वह स्कूल में हुए अन्य विकास कार्यो की भी जांच करवाएंगे।
डाइट से मिली ग्रांट से बनी थी दीवार
मिली जानकारी के अनुसार यह दीवार स्कूल को डाईट द्वारा सीधी मिली ग्रांट के पैसों से बनवाई गई थी। जिसमें विभाग का जेई, स्कूल का अध्यापक और पंचायत के सदस्य की बनाई गई कमेटी के अधीन ढाई साल पहले ही बनाई गई थी। इस मौके पर घटना स्थल पर पहुंच गांव के बुजुर्ग बक्शी राम जो कि पूर्व सरपंच कमल जीत कौर का ससुर है ने बताया कि यह दीवार स्कूल अध्यापक और जेई द्वारा ही बनवाई गई थी।
स्कूल प्रबंधन भी घेरे में
ऊना। छत्तरपुर (संतोषगढ़) के प्राइमरी स्कूल की चारदीवारी के निर्माण में इस्तेमाल की गई घटिया सामग्री ने चार बच्चों की जिंदगी लील ली। यह चारदीवारी करीब तीन साल पहले बनाई गई थी। जिसके लिए डाइट सेंटर देहलां ने 50 हजार रुपए स्वीकृत किए थे। इसके बाद चारदीवारी का निर्माण पीटीए कमेटी ने किसी ठेकेदार के माध्यम से करवाया गया था। 15-20 मीटर लंबी इस दीवार में न तो बीच में पिल्लर बनाए गए हैं। न ही दीवार के बीच में कोई सरिया डाला गया है। जिससे दीवार के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
साथ ही स्कूल प्रबंधन भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि चारदीवारी के निर्माण के वक्त किसी ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को नहीं परखा। अगर स्कूल प्रबंधन या पीटीए कमेटी ने दीवार की गुणवत्ता परखी होती तो आज चार घरों के चिराग नहीं बुझते। सवाल उठता है कि पचास हजार रुपए में कैसे इतनी लंबी दीवार के निर्माण को पूरा किया गया। इसके अलावा करीब आठ फीट ऊंची दीवार खड़ी करने की नौबत क्यों आई। जबकि दीवार के निर्माण के लिए सिर्फ पचास हजार ही बजट मंजूर था। अब जिला प्रशासन ने मामले की मैजिस्ट्रेट जांच बिठा दी है। इस जांच में इन सब सवालों का सच सामने आएगा।
सैंपलों की होगी जांच
अब प्रशासन ने चारदीवारी के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए घटनास्थल से निर्माण सामग्री के सैंपल भी लिए हैं। इन सैंपलों की पीडब्ल्यूडी के माध्यम से लैब में जांच करवाई जाएगी। रिपोर्ट के बाद ही चारदीवारी में इस्तेमाल की गई सामग्री के बारे में स्थिति क्लीयर हो पाएगी। जांच अधिकारी एवं एसडीएम प्रदीप ठाकुर ने बताया कि चारदीवारी का निर्माण करीब तीन वर्ष पूर्व किया गया था। दुर्घटना के कारणों की अभी विस्तृत व्याख्या नहीं की जा सकती है। जांच पूरी होते ही तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जब बच्चों के मां-बाप को इस घटना की जानकारी मिली, तो उनपर दुख का पहाड़ ही टूट गया और पूरे गांव में मातम छा गया। बच्चों पर दीवार गिरने के बाद बच्चों को ग्रामीणों द्वारा तत्काल निकाल तो लिया गया, परंतु पांच में चार बच्चे मौत के मुंह में चले गए थे। माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर कोई डॉक्टर तो कोई जमा दो के बाद इंजीनियरिंग, तो शिक्षक, तो कई एसडीओ बनाना चाहते थे, परंतु उनके मां-बाप के सपने धरे-धरे के रह गए। वहीं बहन रोती बिलखती यह कह रही थी कि अब मैं किसके हाथ पर राखी बांधूगी।
परिजनों को 5-5 हजार
जिला प्रशासन ने इस हादसे में मारे गए बच्चों के परिजनों को फौरी राहत दी है। एसडीएम प्रदीप ठाकुर के मुताबिक मृतक बच्चों के परिजनों को 5-5 हजार रुपए तथा घायल के परिजनों को दो हजार रुपए प्रदान किए हैं।
सत्ती अस्पताल पहुंचे
सदर के विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव सतपाल सत्ती सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने बीबीएमबी अस्पताल नंगल का भी दौरा किया और घायल छात्र करण कुमार का कुशलक्षेम पूछा। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को तुरन्त राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने घायल छात्र के बेहतर इलाज के भी प्रशासन को निर्देश दिए। इस मामले की जांच करवाने के आदेश जारी किए गए हैं। निर्माण की गुणवत्ता की जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने जताई संवेदना
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, शिक्षा मंत्री आईडी धीमान, मुख्य संसदीय सचिव सतपाल सत्ती एवं वीरेन्द्र कंवर ने प्राइमरी स्कूल छत्तरपुर के चार बच्चों मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री तथा अन्य सभी ने मृतकों की आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके परिजनों से इस दु:ख की घड़ी में अपना मनोबल बनाए रखने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दुर्घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
घटिया सामग्री से बनी थी दीवार
जिलाधीश को लोगों ने बताया कि दीवार 10 फुट ऊंची थी और तेज हवा के कारण वह गिर गई। इसके चलते हादसा हुआ। लोगों ने कहा कि यह बच्चे मिड-डे मील का खाना खाने के बाद साढ़े 12 बजे स्कूल के गेट से बाहर चले गए थे और स्कूल की दीवार के साथ खड़े थे। तेज हवा चलने दीवार बच्चों के ऊपर आ गिरी। लोगों ने आरोप लगाया कि दीवार में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है। लोगों ने जिलाधीश व एसएसपी से मांग की कि घटिया कार्य करने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
घटना के बाद स्कूल में भय का माहौल
स्कूल की दीवार गिरने से स्कूल में काफी भय का माहौल था। इलाके के सभी लोग स्कूल में एकत्र हो गए। जब स्कूल में यह खबर फैली की ४ बच्चों की मौत हो चुकी है तो अध्यापिकाएं भी रोने लगी और अप्पर ढाडा गांव में मातम छा गया।
पीटीए अध्यक्ष ने की मुआवजे की मांग
स्कूल में उपस्थित पीटीए की अध्यक्षा रीना कुमारी ने जहां मृत छात्रों के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग की, वहीं उन्होंने कहा कि इसके लिए घटिया कार्य करवाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
स्कूल में विकास कार्यो की भी जांच होगी: पंच
इस मौके पर गांव के सरपंच अनिल अभिमन्यू ने कहा कि वह प्रशासन से मांग करते है कि घटिया कार्य करवाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए और दुर्घटना में मारे गए बच्चों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्हांेने कहा कि यह दीवार उनसे पहले सरपंच के कार्यकाल में बनी थी। उन्हें सरपंच बने हुए अभी एक महीना ही हुआ है। उन्होंने कहा कि वह स्कूल में हुए अन्य विकास कार्यो की भी जांच करवाएंगे।
डाइट से मिली ग्रांट से बनी थी दीवार
मिली जानकारी के अनुसार यह दीवार स्कूल को डाईट द्वारा सीधी मिली ग्रांट के पैसों से बनवाई गई थी। जिसमें विभाग का जेई, स्कूल का अध्यापक और पंचायत के सदस्य की बनाई गई कमेटी के अधीन ढाई साल पहले ही बनाई गई थी। इस मौके पर घटना स्थल पर पहुंच गांव के बुजुर्ग बक्शी राम जो कि पूर्व सरपंच कमल जीत कौर का ससुर है ने बताया कि यह दीवार स्कूल अध्यापक और जेई द्वारा ही बनवाई गई थी।
स्कूल प्रबंधन भी घेरे में
ऊना। छत्तरपुर (संतोषगढ़) के प्राइमरी स्कूल की चारदीवारी के निर्माण में इस्तेमाल की गई घटिया सामग्री ने चार बच्चों की जिंदगी लील ली। यह चारदीवारी करीब तीन साल पहले बनाई गई थी। जिसके लिए डाइट सेंटर देहलां ने 50 हजार रुपए स्वीकृत किए थे। इसके बाद चारदीवारी का निर्माण पीटीए कमेटी ने किसी ठेकेदार के माध्यम से करवाया गया था। 15-20 मीटर लंबी इस दीवार में न तो बीच में पिल्लर बनाए गए हैं। न ही दीवार के बीच में कोई सरिया डाला गया है। जिससे दीवार के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
साथ ही स्कूल प्रबंधन भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि चारदीवारी के निर्माण के वक्त किसी ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को नहीं परखा। अगर स्कूल प्रबंधन या पीटीए कमेटी ने दीवार की गुणवत्ता परखी होती तो आज चार घरों के चिराग नहीं बुझते। सवाल उठता है कि पचास हजार रुपए में कैसे इतनी लंबी दीवार के निर्माण को पूरा किया गया। इसके अलावा करीब आठ फीट ऊंची दीवार खड़ी करने की नौबत क्यों आई। जबकि दीवार के निर्माण के लिए सिर्फ पचास हजार ही बजट मंजूर था। अब जिला प्रशासन ने मामले की मैजिस्ट्रेट जांच बिठा दी है। इस जांच में इन सब सवालों का सच सामने आएगा।
सैंपलों की होगी जांच
अब प्रशासन ने चारदीवारी के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए घटनास्थल से निर्माण सामग्री के सैंपल भी लिए हैं। इन सैंपलों की पीडब्ल्यूडी के माध्यम से लैब में जांच करवाई जाएगी। रिपोर्ट के बाद ही चारदीवारी में इस्तेमाल की गई सामग्री के बारे में स्थिति क्लीयर हो पाएगी। जांच अधिकारी एवं एसडीएम प्रदीप ठाकुर ने बताया कि चारदीवारी का निर्माण करीब तीन वर्ष पूर्व किया गया था। दुर्घटना के कारणों की अभी विस्तृत व्याख्या नहीं की जा सकती है। जांच पूरी होते ही तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

No comments:
Post a Comment