फ्रिंज बेनिफिट
किसी नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन के अलावे मिलने वाली सारी सुविधाओं को फ्रिंज बेनिफिट कहते हैं। कर्मचारियों की नियुक्ति के समय या उनके परफारमेंस के आधार पर कंपनी उन्हें वेतन के अलावे कई तरह की सुविधाएं देती हैं, जिसे फ्रिंज बेनिफिट कहते हैं।नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को फ्रिंज बेनिफिट कुछ खास परिस्थितियों में या यूं कहें कि कुछ शर्त के तौर पर मुहैया कराती है। इन सुविधाओं पर अगर कर लगाया जाता है तब इसे फ्रिंज बेनिफिट कहते हैं।फ्रिंज बैनिफिट के अन्तर्गत सामान्य तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस, ग्रुप टर्म लाइफ कवरेज, एजुकेशन रिइंबर्समेंट, चाइल्ड केयर, कैफेटेरिया या रेस्तरां के बिल, मनोरंजन पर किए जाने वाले खर्च, एम्पलॉयी डिस्काउंट, कंपनी द्वारा मुहैया कराई जाने वाली गाड़ी का व्यक्तिगत और ऑफिशियल इस्तेमाल तथा अन्य इस तरह की मिलती-जुलती भी सुविधाएं शामिल होती हैं।
क्रॉस लिस्टिंग
कोई भी कंपनी अपने को एक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कराती है और वही कंपनी अपने को दूसरे एक्सचेंज में लिस्ट कराती है तो इस स्थिति को क्रॉस लिस्टिंग कहते हैं। मान लीजिए एफएमसीजी सेक्टर की कोई कंपनी अपने को मुख्य तौर पर मुंबई में बीएससी या एनएससी में लिस्ट कराती है तो इसे ऑरिजनल लिस्टिंग और इसके साथ वह दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज में भी लिस्ट कराती है तो इसे प्राइमरी लिस्टिंग कहते हैं। ऐसा केवल अपने देश के दो अलग-अलग एक्सचेंज में ही नहीं बल्कि अलग-अलग मुल्कों के एक्सचेंज में करा सकते हैं।क्रॉस लिस्टिंग कई कंपनियों की बुनियादी जरूरत बन पड़ती है। कंपनी को क्रॉस लिस्टिंग की जरूरत शेयर की गणना, अकाउंटिंग पॉलिसी, फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करने के लिए और कंपनी के लिए राजस्व बढ़ाने के क्रम में होती है। क्रॉस लिस्टिंग की जरूरत अलग-अलग टाइम जोन और अलग-अलग देशों की मुद्रा की दिक्कतों को दूर करने के लिए करते हैं।
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