कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था के चलते सालाना आधार पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 26 फीसद घटा.
देश का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वर्ष 2010 में जनवरी-नवंबर के दौरान सालाना आधार पर 26 फीसद घटकर 18.99 अरब डालर (86,921 करोड़ रुपये) रहा. वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति के कारण एफडीआई कम रहा है.
उद्योग मंत्रालय के हाल के आंकड़ों के मुताबिक 2009 में पहले 11 महीने में एफडीआई 25.5 अरब डालर (123,795 करोड़ रुपये) था.
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक यूरोप में ऋण संकट के साथ विश्व अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति से देश में एफडीआई प्रवाह पर असर पड़ा है.
एक अर्थशास्त्री ने कहा, ‘वैश्विक आर्थिक सुधार बहुत मजबूत नहीं है और यह एफडीआई को प्रभावित कर रहा है.’
वर्ष 2010 में जनवरी-नवंबर के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 39 अरब डालर का निवेश किया.
जिन प्रमुख क्षेत्रों में एफडीआई आया, उनमें सेवा क्षेत्र, दूरसंचार, बिजली, निर्माण गतिविधियां, कंप्यूटर साफ्टवेयर और हार्डवेयर तथा आटोमोबाइल उद्योग शामिल हैं.
देश में सबसे ज्यादा एफडीआई मारिशस से आया. उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, जापान और साइप्रस का स्थान है.
उद्योग मंत्रालय के हाल के आंकड़ों के मुताबिक 2009 में पहले 11 महीने में एफडीआई 25.5 अरब डालर (123,795 करोड़ रुपये) था.
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक यूरोप में ऋण संकट के साथ विश्व अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति से देश में एफडीआई प्रवाह पर असर पड़ा है.
एक अर्थशास्त्री ने कहा, ‘वैश्विक आर्थिक सुधार बहुत मजबूत नहीं है और यह एफडीआई को प्रभावित कर रहा है.’
वर्ष 2010 में जनवरी-नवंबर के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 39 अरब डालर का निवेश किया.
जिन प्रमुख क्षेत्रों में एफडीआई आया, उनमें सेवा क्षेत्र, दूरसंचार, बिजली, निर्माण गतिविधियां, कंप्यूटर साफ्टवेयर और हार्डवेयर तथा आटोमोबाइल उद्योग शामिल हैं.
देश में सबसे ज्यादा एफडीआई मारिशस से आया. उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, जापान और साइप्रस का स्थान है.
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