आज से दुनियाभर में इंटरनेट के काम करने का तरीका बदल जाएगा। दरअसल आज से अंकों के रूप में दिखने वाले आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) पते उपलब्ध नहीं होंगे क्योंकि इस प्रकार के उपलब्ध सभी आईपी पते आवंटित किए जा चुके हैं।
लेकिन इससे इंटरनेट काम करना बंद नहीं करेगा क्योंकि पुराने आईपी एड्रेस वर्जन-4 के स्थान पर एक नई प्रणाली इंटरनेट प्रोटोकॉल वर्जन-6 (आईपीवी6) को उपयोग में लाया जाएगा। जहां आईपीवी-4 की क्षमता सिर्फ 32 बिट थी वहीं आईपीवी-6 की क्षमता को 128 बिट तक ले जाया गया है।
मोटे तौर पर यह हुआ कि किसी डाक प्रणाली में अभी तक 32 डाकिए लगे हुए थे तो अब उसी प्रणाली में 128 लोग कार्य करेंगे। इस तरह से आईपी खत्म होने की समस्या जो एक बड़ी समस्या बन सकती थी वह इंटरनेट प्रणाली के लिए समस्या से ज्यादा वरदान बनकर आई। इससे अरबों अरब आईपी और उपलब्ध हो जाएंगे।
मालूम हो कि इंटरनेट से जुड़े प्रत्येक कम्प्यूटर को एक आईपी एड्रेस आवंटित किया जाता है। अब जबकि लाखों फोन ऑनलाइन हो चुके हैं, आईपी एड्रेस को संख्या के रूप में आवंटित करने में काफी दिक्कत हो रही है।
इंटरनेट प्रोटोकाल (आईपी) वर्जन4 की शुरुआत 80 के दशक में की गई थी। उस समय इसे 4.1 अरब आईपी पतों के लिए तैयार किया गया था। ऐसा माना जा रहा था कि यह संख्या कभी कम नहीं पड़ेगी क्योंकि वेब का विकास करने वालों ने शुरुआती चरण में सोचा था कि इंटरनेट का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
आईपीए एड्रेस फोन नम्बर के तौर पर काम करता है। इसके माध्यम से सर्फ करने वाला व्यक्ति वेबसाइटों तक पहुंचता है और साथ ही ईमेल भी प्राप्त करता है। यह सर्फ करने वालों को अपने गंतव्य पर पहुंचने में मदद करता है।
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