आईपीओ
इनीशियल पब्लिक ऑफर को संक्षेप में आईपीओ कहते हैं। किसी निजी कंपनी द्वारा अपने शेयरों को आम लोगों के लिए खरीदारी की पहली पेशकश को आईपीओ कहते हैं। आईपीआ कंपनी अपनी पूंजी में विस्तार के लिए करती है। लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं है। बड़ी कंपनी भी पब्लिकली ट्रेडिंग के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ऐसे पेशकश दे सकती है। जो भी कंपनी आईपीओ जारी करती है वह यह घोषित करती है कि वह किसी तरह के सिक्योरिटीज जारी करेगी। सिक्योरिटीज की बेहतरीन पेशकश कीमत कितनी होगी। सिक्योरिटीज को बाजार में लाने का समय क्या होगा। इसे कभी-कभी संक्षेप में पब्लिक ऑफरिंग भी कह देते हैं। हालांकि आईपीओ को एक जोखिम भरा निवेश माना जाता है।
किसी भी वयक्तिगत निवेशक के लिए किसी कंपनी के शेयर के बारे में अनुमान लगाना एक मुश्किल काम होता है। खासकर ऐसी परिस्थितियों में जब किसी निवेशक ने नई-नई ट्रेडिंग शुरू की हो तब उसके लिए शेयरों के रूख के बारे में अनुमान लगा पाना आसान काम नहीं होता है। उनके लिए निकट भविष्य में शेयरों के रूख कैसे रहेंगे, का पता करना मुश्किल होता है। दरअसल आईपीओ अक्सर नई या छोटी कंपनियां बाजार में लाती हैं इसलिए निवेशकों के पास कंपनी विशेष के शेयरों के विश्लेषण के लिए कोई ऐतिहासिक आंकड़े मौजूद नहीं होते हैं।
आईपीओ लॉक-अप
किसी कंपनी द्वारा अपने शेयर पब्लिक के बीच जारी करने की आरंभिक प्रक्रिया के बाद एक निश्चित समय सीमा के बाद अनुबंध के तहत आपत्ति सूचना जारी की जाती है। आमतौर पर यह समय सीमा 90 दिन से लेकर 180 दिनों की होती है।
ट्रेडिंग के शुरूआती दिनों में कंपनी के अंदर के लोग या जिनके पास कंपनी के शेयर ज्यादा होते हैं, उनके शेयर बेचने पर मनाही होती है। लॉक अप अवधि की समाप्ति के बाद ही शेयर बेचे जा सकते हैं। इसलिए इसको अक्सर लॉक-अप पीरियड भी कहते हैं। आईपीओ लॉक-अप पीरियड की व्यवस्था इसलिए की जाती है ताकि बाजार में बहुत कम समय में किसी कंपनी के शेयरों की बाढ़ नहीं आ जाए। इसे ध्यान में रखकर कंपनियों द्वारा लाए जा रहे आईपीओ के 20 फीसदी शेयरों में आमलोगों को निवेश करने की छूट दी जाती है। सामान्य तौर पर लॉक-अप पीरियड के खत्म होने के बाद शेयरों की कीमत में 1-3 फीसदी की गिरावट स्थाई तौर पर आ जाती है।
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