इंटरनेट की आजादी पर जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन ने कहा, "अमेरिका दुनिया भर के लोगों के साथ बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, पिछले हफ्ते हमने ट्विटर पर अरबी और फारसी में संदेश भेजना शुरू किया, फ्रेंच और स्पेनिश में हम पहले से ही ऐसा कर रहे हैं. अब हिंदी, रूसी और चीनी भाषा में भी ये संदेश भेजने की व्यवस्था शुरू की जा रही है."'
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: क्लिंटन का कहना है कि इस सेवा के जरिए अमेरिका अब लोगों से हर वक्त दोतरफा और सीधी बातचीत कर सकेगा अगर किसी देश की सरकार ने इंटरनेट की आजादी पर पाबंदी नहीं लगाई है तो. अमेरिकी विदेश मंत्री ने इशारों इशारों में बता दिया कि चीन, क्यूबा, ईरान, म्यांमार, सीरिया और वियतनाम जैसे देशों में इंटरनेट पर सेंसरशिप है. हिलेरी ने कहा, "चीन में सरकार कंटेंट पर सेंसर लगाती है और इंटरनेट सर्च में मांगी गई पेज की जगह एरर आ जाता है. इसी तरह म्यांमार में स्वतंत्र न्यूज वेबसाइट की सेवा में बाधा खड़ी की जा रही है. क्यूबा की सरकार एक राष्ट्रीय इंटरनेट तैयार कर रही है और लोगों को ग्लोबल इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा." हिलेरी ने बताया कि वियतनाम में सरकार के खिलाफ लिखने वाले ब्लॉगरों को गिरफ्तार किया जा रहा है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है.
अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, "ईरान में सरकार विपक्षी पार्टियों औऱ मीडिया वेबसाइटों के अलावा स्थानीय सामाजिक मीडिया पर भी रोक लगा रही है. अपने ही लोगों को नीचा दिखाने के लिए पहचान से जुड़ी सूचनाओं की चोरी की जा रही है."
हिलेरी ने बताया कि सीरिया ने पिछले हफ्ते फेसबुक और यूट्यूब से प्रतिबंध हटा दिया लेकिन एक किशोरी पर जासूसी का आरोप लगा कर उसे पांच साल के लिए जेल भेज दिया गया. इस लड़की की गलती बस इतनी थी कि उसने अपने ब्लॉग पर राजनीतिक कविता लिखी थी. हिलेरी ने कहा, "अभिव्यक्ति का मंच हासिल करने की मांग तब तक पूरी नहीं होगी जब तक उन्हें इस्तेमाल करने वालों को जेल में डाला जाता रहेगा."
रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन
संपादनः महेश झा
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