अहरौरा (मीरजापुर) : हरदोई से पढ़ाई छोड़कर दो माह पहले वापस घर आकर जंगलों की खाक छान रही आस्कर एवार्ड विजेता स्माइल पिंकी अब फिर से पढ़ेगी। अब वह सेंट एग्नेश वी. कांवेंट स्कूल अहरौरा में पढ़ाई करेगी। विद्यालय के डायरेक्टर विजय सिंह ने गरीबी से जूझ रही पिंकी की पढ़ाई के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। बतौर विजय सिंह वे अब उसका पूरा खर्च वहन करेंगे ताकि वह पढ़ लिखकर देश का नाम रोशन कर सके। बताते चले कि 22 जनवरी 2008 को रामपुर ढबही गाव के खोरिया खटिक बस्ती के राजेंद्र सोनकर की पुत्री तब चर्चा में आयी जब जीएस मेमोरियल प्लास्टिक सर्जरी हास्पिटल एवं ट्रामा सेंटर महमूरगंज वाराणसी के चिकित्सक डा. सुबोध कुमार सिंह ने उसके कटे होठों का आपरेशन किया और मेगन माइलन ने उसपर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनायी। यह डाक्यूमेट्री आस्कर अवार्ड के लिए चयनित हुई और 22 फरवरी 2009 को पिंकी एवं उसके पिता राजेंद्र सोनकर डा. सुबोध के साथ अमेरिका शहर के लांस एंजिल्स सीटी के कोडेक थियेटर में पहुंचे, जहां स्माइल पिंकी डाक्यूमेंट्री फिल्म को आस्कर अवार्ड मिला और पूरा देश खुशियों से झूम उठा। उसके ओठ का आपरेशन हुआ और उसका सलेक्शन स्माईल पिंकी फिल्म के किरदार के रूप में हो गया। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खिया बटोर चुकी पिंकी अब पढ़ाई लिखाई छोड़कर 2 माह से अपने गांव रामपुर ढबही के सगहा पुरवा पर दिन भर घूमकर लकड़ियां बटोरने के साथ ही बकरियां चरा रही है। देश- विदेश के प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोग खोरिया में पहुंचकर उसके घर से सीधा प्रसारण करने लगे । पिंकी जब 28 फरवरी 09 को वापस लौटी तो शासन-प्रशासन से लेकर आम जनता स्वागत में खड़ी थी लोग तरह-तरह के वादे कर रहे थे। तमाम आश्वासन मिल रहे थे लेकिन एक वर्ष में ही सब समाप्त हो गया और पहाड़ों नदियों के किनारे बकरी चराने वाली पिंकी पुन: 'पिंकिया' बन गयी है। अब उसका भविष्य चौपट हो गया है। अब वह पढ़ने के बजाय घूम रही है, और उसके पिता काम की तलाश में भटक रहे है लेकिन कोई उसकी सुधि लेने वाला नहीं है।
आज-कल बकरी चराने में मशगूल है पिंकी
अहरौरा (मीरजापुर) : दिन शुक्रवार, समय सुबह 10 बजे, स्थान रामपुर ढबही का खोरिया पुरवा स्थित स्माइल पिंकी अवार्ड की किरदार पिंकी का घर। गुलाबी सूट पहने पिंकी के बाल बिखरे थे। बच्चों के साथ बांस की सीढ़ी पर चढ़ उतर रही थी। जब पूछा गया कि स्कूल नहीं गयी, तो पता चला कि नाम नहीं लिखवाया है। कभी-कभी प्राथमिक विद्यालय सगहा चली जाती है, आज नहीं गयी।
उसके पिता राजेंद्र सोनकर ने बताया कि माधोगंज पब्लिक स्कूल हरदोई में पिंकी एलकेजी में पढ़ रही थी। 2 माह पूर्व रावटर््सगंज में एक कार्यक्रम था जिसमें पिंकी को जाना था। वहां से आने के बाद अब तक वापस नहीं गयी। अब पिंकी को यहीं पढ़ाने की इच्छा है।
राजेंद्र ने बताया कि हरदोई में पिंकी को नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था थी लेकिन खान पान का खर्चा लगता था। वहां कमरा मिला था, विद्यालय में मेरी चपरासी की नौकरी लगी थी, साढ़े चार हजार मिल जाता था, लेकिन उतने में खर्च नहीं चल पा रहा था। इसलिए वहां से वापस आ गए, अब यहीं रहेंगे।
पिंकी की मां शिमला देवी ने बताया कि वह भी एक बार गयी थी लेकिन विद्यालय के लोग सफाई का काम दे रहे थे। इसलिए वह काम नहीं किया। पांच बच्चे हैं। सभी की देखरेख करनी है।
पिंकी से बड़ी उसकी एक बहन अंजू है जिसकी उम्र (12) है। इसके बाद पिंकी से छोटा भाई लालू (8), सुनील (5) व रिंकी (2) है। सभी घर पर ही रहते हैं।
धूल फांक रही है पिंकी की लाइब्रेरी
डा. सुबोध द्वारा 6 दिसंबर 2008 को पिंकी को 'स्माइल पिंकी' के नाम से पुस्तकालय उपलब्ध कराया गया था, जो अब धूल चाट रहा है। बहुत सी किताबें भी गायब हो गयी हैं।
उस समय डा. सुबोध ने कहा था कि यह देश के सबसे कम उम्र के बच्ची द्वारा संचालित पुस्तकालय होगा और इसका लाभ गांव के गरीब बच्चों को मिलेगा। कम उम्र में बच्चे अपनी चीजों का जो हश्र करते हैं वहीं पिंकी के पुस्तकालय का आज
आज-कल बकरी चराने में मशगूल है पिंकी
अहरौरा (मीरजापुर) : दिन शुक्रवार, समय सुबह 10 बजे, स्थान रामपुर ढबही का खोरिया पुरवा स्थित स्माइल पिंकी अवार्ड की किरदार पिंकी का घर। गुलाबी सूट पहने पिंकी के बाल बिखरे थे। बच्चों के साथ बांस की सीढ़ी पर चढ़ उतर रही थी। जब पूछा गया कि स्कूल नहीं गयी, तो पता चला कि नाम नहीं लिखवाया है। कभी-कभी प्राथमिक विद्यालय सगहा चली जाती है, आज नहीं गयी।
उसके पिता राजेंद्र सोनकर ने बताया कि माधोगंज पब्लिक स्कूल हरदोई में पिंकी एलकेजी में पढ़ रही थी। 2 माह पूर्व रावटर््सगंज में एक कार्यक्रम था जिसमें पिंकी को जाना था। वहां से आने के बाद अब तक वापस नहीं गयी। अब पिंकी को यहीं पढ़ाने की इच्छा है।
राजेंद्र ने बताया कि हरदोई में पिंकी को नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था थी लेकिन खान पान का खर्चा लगता था। वहां कमरा मिला था, विद्यालय में मेरी चपरासी की नौकरी लगी थी, साढ़े चार हजार मिल जाता था, लेकिन उतने में खर्च नहीं चल पा रहा था। इसलिए वहां से वापस आ गए, अब यहीं रहेंगे।
पिंकी की मां शिमला देवी ने बताया कि वह भी एक बार गयी थी लेकिन विद्यालय के लोग सफाई का काम दे रहे थे। इसलिए वह काम नहीं किया। पांच बच्चे हैं। सभी की देखरेख करनी है।
पिंकी से बड़ी उसकी एक बहन अंजू है जिसकी उम्र (12) है। इसके बाद पिंकी से छोटा भाई लालू (8), सुनील (5) व रिंकी (2) है। सभी घर पर ही रहते हैं।
धूल फांक रही है पिंकी की लाइब्रेरी
डा. सुबोध द्वारा 6 दिसंबर 2008 को पिंकी को 'स्माइल पिंकी' के नाम से पुस्तकालय उपलब्ध कराया गया था, जो अब धूल चाट रहा है। बहुत सी किताबें भी गायब हो गयी हैं।
उस समय डा. सुबोध ने कहा था कि यह देश के सबसे कम उम्र के बच्ची द्वारा संचालित पुस्तकालय होगा और इसका लाभ गांव के गरीब बच्चों को मिलेगा। कम उम्र में बच्चे अपनी चीजों का जो हश्र करते हैं वहीं पिंकी के पुस्तकालय का आज
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