वर्ष 2003 के सेबी के निर्देशों के अनुसार किसी कंपनी के लिए स्टॉक एक्सचेंज से अपने को डिलिस्ट कराने के लिए कुछ शर्र्तें तय की गई थी। कोई कंपनी अपनी इच्छा से एक्सचेंज से अपना नाम डिलिस्ट करा सकती है। कंपनी द्वारा शेयरों का अधिग्रहण (कोई प्रमोटर कंपनी या फिर कोई व्यक्ति) किसी स्कीम या अन्य किसी व्यवस्था के तहत करता है और पब्लिक शेयर होल्डिंग, लिस्टिंग एग्रीमेंट में तय हुई एक निश्चित संख्या से गिरकर नीचे चली जाती हैतो परिणाम के तौर पर उसे डिलिस्ट किया जाता है। प्रमोटर कंपनियां भी अपनी इच्छा के आधार पर स्टॉक एक्सचेंज से अपने शेयरों को डिलिस्ट करा सकती है।
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