पाकिस्तान में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जुलाई-सितम्बर 2010) में सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 9,473 अरब रुपये का हो गया.
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को ऋण नीति से संबंधित बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान पर 30 जून, 2010 तक 8,894 अरब रुपये का ऋण था, जो पिछले कारोबारी साल की तुलना में 16.6 फीसदी अधिक था.
सरकार ने वित्तीय जरूरतों के लिए घरेलू स्रोतों से 798 अरब रुपये और बाहरी स्रोतों से 189 अरब रुपये ऋण लिए.
सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से भी 271 अरब रुपये लिए. साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरने के कारण बाहरी स्रोतों से लिए ऋण पर उसे 200 अरब रुपये का नुकसान हुआ.
बयान में कहा गया कि वित्त वर्ष 2011 की पहली तिमाही (जुलाई-सितम्बर) में सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 9,473 अरब रुपये का हो गया.
सरकार ने वित्तीय जरूरतों के लिए घरेलू स्रोतों से 798 अरब रुपये और बाहरी स्रोतों से 189 अरब रुपये ऋण लिए.
सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से भी 271 अरब रुपये लिए. साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरने के कारण बाहरी स्रोतों से लिए ऋण पर उसे 200 अरब रुपये का नुकसान हुआ.
बयान में कहा गया कि वित्त वर्ष 2011 की पहली तिमाही (जुलाई-सितम्बर) में सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 9,473 अरब रुपये का हो गया.
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