Sunday, February 6, 2011

वेदांत-केयर्न: 15 अप्रैल की डेडलाइन

नई दिल्ली।। तेल सचिव ने उम्मीद जताई है कि केयर्न-वेदांता डील मामले का बेहतर नतीजा निकल सकता है। वेदांता रिसोर्सेज ने केयर्न ग्रुप की भारतीय इकाई केयर्न इंडिया में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने का एलान किया है।

9.6 अरब डॉलर वाली केयर्न-वेदांता डील अधर में फंसी हुई है और ऐसे वक्त में तेल सचिव एस सुंदरेशन का बयान काफी मायने रखता है। केयर्न और वेदांता ने इस सौदे को पूरा करने के लिए15 अप्रैल की समयसीमा तय की है। इस मामले में अंतिम निर्णय देश के तेल मंत्री एस जयपाल रेड्डी को लेना है। पिछले साल अगस्त में केयर्न एनर्जी अपनी भारतीय इकाई केयर्न इंडिया की 40 से 51 फीसदी हिस्सेदारी वेदांता रिसोर्सेज को बेचने के लिए राजी हो गई थी। हालांकि इस सौदे में सरकार और केयर्न इंडिया की राजस्थान ब्लॉक में हिस्सेदार ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की ओर से देरी हो रही है। सुंदरेशन ने पश्चिमी राजस्थान के ऑयल ब्लॉक के सभी पक्षों के साथ रविवार को बैठक की। इस बैठक के बाद सुंदरेशन ने संवाददाताओं से कहा, 'हमारी केयर्न और वेदांता के प्रतिनिधियों से काफी सकारात्मक बातचीत हुई। हमें उम्मीद है कि इस मसले का सकारात्मक हल निकल आएगा।'

सुंदरेशन ने कहा कि इस सौदे को पूरा करने के बारे में कदम उठाए गए हैं, लेकिन उन्होंने इस बारे में समयसीमा तय करने से इनकार कर दिया।दूसरी ओर, केयर्न इंडिया ने भी रविवार को तेल सचिव के साथ हुई बैठक को काफी सकारात्मक बताया है। कंपनी ने कहा है कि उसे 15 अप्रैल तक सौदे के पूरा होने की उम्मीद है। सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद यह सौदा देश में तेल और गैस सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा विलय और अधिग्रहण सौदा होगा। सरकारी कंपनी ओएनजीसी की केयर्न इंडिया के राजस्थान ब्लॉक में 30 फीसदी हिस्सेदारी है।

ओएनजीसी ने कहा था कि वह प्रस्तावित डील की राह में रोड़ा नहीं अटकाएगी, लेकिन कंपनी ने मांग की थी कि इस सौदे से पहले रॉयल्टी के मसले को हल किया जाना जरूरी है। ओएनजीसी राजस्थान ब्लॉक से होने वाले कुल उत्पादन पर रॉयल्टी का भुगतान करती है। सरकार कह चुकी है कि वह इस सौदे के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह ओएनजीसी के हितों को भी सुरक्षित रखना चाहती है।

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