Sunday, February 20, 2011

जीत का जज्बा और जोश का तूफान

वासंती रंग में रंगी सड़कें, दौड़े सभी जीती काशी -बच्चे, बूढ़े और जवान मन में उमंगों का उफान
वाराणसी, प्रतिनिधि : रविवार की प्रभात काशी की हर सड़क खिली-खिली थी। बात जज्बे की थी और इसके लिए बच्चे, बूढ़े और जवान दौड़े जा रहे थे। तन पर वासंती परिधान और मन में उमंगों का उफान। हर चेहरे पर मुस्कान और भाव एक, लो झुका दिया आसमान।
हालांकि विजेताओं की सूची में कुछ ही लोगों को स्थान मिला लेकिन जीती काशी और सभी बने सिकंदर। न हम जीते न तुम हारे सा भाव। मैराथन की राह में प्रेम, सद्भाव व जज्बे का तूफान उमड़ा और इसके आगे लोग नतमस्तक थे। शहर में था हर तरफ उत्सवी नजारा। बच्चों की उमंग, युवाओं की तरंग ,बुजुर्गो का संग मगर सभी एकरंग। न कोई छोटा-न कोई बड़ा। एक रंग में रंगी काशी की अनूठी छटा देख सभी मुग्ध थे। तालियां बजाकर लोगों ने 'दैनिक जागरण' के मैराथन में शामिल लोगों के जज्बे को सलाम किया। मां जाह्नवी के तट से निकट तो बाबा विश्वनाथ के दर से गुजरते लोगों ने उद्देश्य की पूर्ति के लिए मन्नतें भी मांगीं। साथ ही नगर के ह्रदय गोदौलिया से काफिले का गुजरना नगर की धमनियों में दैनिक जागरण के सामाजिक सरोकार स्वस्थ समाज का संचार कर गया। विधायक अजय राय का 10 किलोमीटर दौड़ में सहभाग लोगों को रिझा गया।
सवेरे से ही मानो हर गली-सड़क का दूसरा छोर सिगरा स्टेडियम से जुड़ गया हो। पीली टी शर्ट और टोपी धारण किए प्रतिभागी। मानो पूरा मैदान वासंती छटा के साथ सरसो के फूल सा खिल आया हो। प्रतिभागियों की आतुरता देखने लायक थी। हरी झंडी के साथ ही जैसे सड़कों पर उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। इधर रवानगी और उधर 10 किलोमीटर का रास्ता पार। प्रथम विजेता को इस दूरी को पूरा करने में मात्र 27.38 मिनट लगे। दो किलोमीटर की दौड़ में भी यही नजारा रहा। पुरस्कार पाकर सभी के चेहरे खिल उठे। साथ ही नृत्य व संगीत की धुन पर मैदान थिरकता रहा।

माया को मिल गई पुरानी मकान मालकिन

बागपत। कभी मुख्यमंत्री मायावती की मकान मालकिन और नजदीकी सहेली रहीं डा. दयावती ने सोचा नहीं था कि अचानक इस तरह उनसे मुलाकात हो जाएगी, अगर होगी भी तो वह पहचान जाएंगी। डॉ. दयावती बागपत में जिला कुष्ठ रोग अधिकारी के पद पर तैनात हैं। सीएचसी के निरीक्षण के दौरान दोनों का आमना-सामना हुआ। उनके नमस्कार करते ही मायावती फौरन उन्हें पहचान गई। निरीक्षण के बीच ही दोनों पुरानी सहेलियों के बीच गुफ्तगू हुई। बहरहाल, सूबे की मालकिन अपनी पुरानी मालकिन को देख कुछ पल के लिए सब कुछ भूल गई।
डॉ. दयावती: नमस्कार
मायावती: नमस्कार, आप यहीं हो?
डॉ.दयावती: जी।
मायावती: कैसी हो?
दयावती: ठीक हूं?
इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ने के बाद रुक गया। कैबिनेट सचिव कार से उतरते हैं और दूसरी ओर खड़े डॉक्टर समूह की तरफ हाथ हिलाकर आने को कहते हैं। सीएमओ डॉ. आर्य आगे बढ़ते हैं।
शशांक सिंह: आप नहीें, डॉ. दयावती
डॉ.दयावती: आप से बहुत बात करनी है?
मायावती: बोलो।
दयावती: मेरा ट्रांसफर नोएडा कर दो, मुझे नोएडा से आने में परेशानी होती है। साथ ही पारिवारिक परेशानी का हवाला दिया।
मायावती: हो गया समझो, एप्लीकेशन कहां है?
दयावती: वो तो अभी नहीं लिखी।
मायावती: एप्लीकेशन डीएम को दे देना, वे उसे मेरे पास पहुंचा देंगे, तुम्हारा ट्रांसफर हो गया।
बकौल दयावती, मायावती ने 1976-78 के दौरान उनके मायके रैदासपुरी, मुजफ्फरनगर में पार्टी गतिविधियों के लिए किराये पर कमरा ले रखा था। उन दिनों मायावती से उनकी अच्छी दोस्ती थी, साथ खाती-सोती थीं, तमाम मुद्दों पर रात भर बातें होती रहती थीं। कुछ दिनों बाद दयावती की शादी नोएडा में हो गयी। मुख्यमंत्री बनने पर लखनऊ जाकर कई बार मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों की पहली मुलाकात है।

Saturday, February 19, 2011

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: कलैग्नार टीवी चैनल पर सीबीआई का छापा



चेन्नई। सीबीआई ने करोडों रूपए के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में निजी सेटेलाइट चैनल कलैग्नार टीवी के परिसरों पर छापे मारे। खबरों के अनुसार, सीबीआई की पांच सदस्यीय एक टीम ने टीवी चैनल के परिसरों पर छापे की कार्रवाई की।
छापे की कार्रवाई उन रिपोर्टो के आधार पर की गई जिनमें टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ली गई कथित रिश्वत में से 200 करोड रूपए कलइनार टीवी को दिए जाने की बात कही गई थी। हालांकि चैनल ने यह स्वीकार किया है कि उसे 200 करोड रूपए की धनराशि मिली थी, लेकिन उसने कहा कि यह राशि उसने ऋण के रूप में ली थी और इस धन राशि को ब्याज के साथ लौटा दिया गया था।
बताया जाता है कि करीब पांच घंटे तक चली छापे की कार्रवाई के दौरान चैनल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि की पत्नी राजाती अम्माल और उनकी पुत्री एवं राज्यसभा 

बांग्‍लादेश ने ललकारा, तो धोनी ने कहा नहीं दोहराएंगे 2007 की गलती


मीरपुर. मीरपुर के शेर-ए-बांग्‍ला राष्‍ट्रीय स्‍टेडियम में भारत और बांग्‍लादेश की टीमें आमने-सामने हैं। 

उधर, दोनों टीमों के खिलाड़ी आक्रामक मुद्रा में हैं। इस बार वर्ल्‍ड कप खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही मेजबान टीम इंडिया आज बांग्लादेश के खिलाफ यहां के शेरे बांग्ला स्टेडियम में अपने अभियान की शुरुआत करने उतरेगी तो उसका पूरा जोर पिछले हिसाब चुकता करने पर होगा, वहीं बांग्लादेश भी एक बार फिर भारत के खिलाफ उलटफेर करने के मूड में होगी। 2007 में इसी बांग्लादेश टीम के हाथों सनसनीखेज हार झेलकर भारतीय टीम विश्व कप से बाहर हो गई थी।

वैसे भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने साफ कर दिया है कि टीम इंडिया कतई इस मैच को हल्के में नहीं ले रही है और 2007 की गलती नहीं दोहराएंगे। वहीं बांग्‍लादेश के कप्‍तान साकिब अल हसन ने भारतीय टीम को ललकारते हुए कहा है कि खिलाडियों ने इस मैदान पर काफी दबाव भरे मुकाबले खेले हैं, इसलिए यह कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। उन्‍होंने कहा, ‘हम एक समय सिर्फ एक मैच के बारे में ही सोच रहे हैं जिससे हमारा सारा ध्यान केवल इस मुकाबले पर केन्द्रित है।’

धोनी ने कहा कि इस बार टीम इंडिया 2007 से बेहतर स्थिति में हैं जबकि विपक्षी टीम के कप्‍तान ने कहा कि वह सिर्फ भारत से मैच के बारे में नहीं सोच रहे, बल्कि उनकी नजर पूरे टूर्नामेंट पर है।

जहीर फिट, नेहरा बाहर

तेज गेंदबाज जहीर खान इस मैच में खेलने के लिए फिट हो गए हैं। जहीर अपने कंधे की चोट के कारण ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ अभ्यास मैचों में नहीं खेल पाए थे जिसके कारण भारतीय तेज गेंदबाजी को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे थे। तेज गेंदबाज आशीष नेहरा चोटिल हो गए हैं। उनका आज खेलना संदिग्‍ध लग रहा है। उनके स्थान पर शांतकुमारन श्रीसंथ को मौका मिल सकता है।

7 खून माफ: नारी मनोविज्ञान का चित्रण


मुख्य कलाकार : प्रियंका चोपड़ा, नील नितिन मुकेश, जॉन अब्राहम, इरफान खान, अनु कपूर, नसीरुद्दीन शाह, विवान शाह, कोंकणा सेन शर्मा।
निर्देशक : विशाल भारद्वाज
तकनीकी टीम : निर्माता- विशाल भारद्वाज, गीत- गुलजार, संगीत- विशाल भारद्वाज
विशाल भारद्घाज  की हर फिल्म में एक अंधेरा रहता है, यह अंधेरा कभी मन को तो कभी समाज का तो कभी रिश्तों का होता है। 7 खून माफ में उसके मन के स्याहकोतों  में दबी ख्वाहिशें और प्रतिकार है। वह अपने हर पति में संपूर्णता चाहती है। प्रेम, समर्पण और बराबरी का भाव चाहती है। वह नहीं मिलता तो अपने बचपन की आदत के मुताबिक वह राह नहीं बदलती, कुत्ते का भेजा उड़ा देती है। वह एक-एक कर अपने पतियों  से निजात पाती है। फिल्म के आखिरी दृश्यों में वह अरूण  से कहती है कि हर बीवी अपनी शादीशुदा जिंदगी  में कभी-न-कभी आपने शौहर से छुटकारा चाहती है। विशाल भारद्घाज  की 7  खून माफ थोड़े अलग तरीके से उस औरत की कहानी कह जाती है, जो पुरूष  प्रधान समाज में वंचनाओं  की शिकार है।
सुजैन एक सामान्य लड़की है। सबसे पहले उसकी शादी मेजर एडविन से होती है। लंग्ड़ा  और नपुंसक एडविन सुजैन  पर शक करता है। उसकी स्वछंदता  पर पाबंदी लगाते  हुए सख्त स्वर में कहता है कि तितली बनन े की कोशिश मत करो। सुजैन  उसकी हत्या कर देती है, इसी प्रकार जिम्मी,  मोहम्मद, कीमत, निकोलाई  और मधूसूदन  एक-एक कर उसकी जिंदगी  में आते हैं। इन सभी के दुर्गुणों और ज्यादती से तंग  आकर सुजैन  उनकी हत्याएं करती जाती है। उसे मनचाहा पुरूष  नहीं मिलता। उसकी जिंदगी  में अरूण  भी है। अरूण  उससे किसी किशोर की तरह प्रेम करता है, लेकिन जब रूस से पढ़कर लौटने के बाद वह सुजैन  से मिलता है और सुजैन अपने प्रेम का इजहार करती है तो वह बिदक जाता है। चोट खाई सुजैन  आत्महत्या के प्रयास में असफल होती है। बाद में वह अपना जीवन यीशु को समर्पित कर सुजैन  की हत्या कर देती है।
ऐसा लगता  है कि विशाल भारद्घाज  7  खून माफ में कोई मर्डर मिस्ट्री या सीरियल कीलिंग  की कहानी कहेंगे, लेकिन यह फिल्म सुजैन  के मनोभाव और मनोदशा के साथ नारी मनोविज्ञान का अच्छा  चित्रण करती है। फिल्म में गति और रोमांच बना रहता है। यह लेखक-निर्देशक विशाल भारद्घाज  की खूबी है कि हम सुजैन  से नफरत नहीं होती। हम उसके साथ जीने लगते  हैं। हमें उसके जीवन में आया हर पुरूष  बीमार, लालची, कामपिपासु, धोखेबाज और अपूर्ण नजर आता है। विशाल ने सुजैन  की जिंदगी  में आए पुरूषों  के माध्यम से एक खास काल की भी कथा कहते हैं। बहुत खूबसूरती से टीवी, समाचार पत्र और रेडियो के जरिए देश की बड़ी खबरों के कवरेज  से वे सुजैन  की जिंदगी  की घटनाओं का समय निर्धारण भी करते जाते हैं। फिल्म का रंग  और शिल्प विशाल की पहली फिल्मों से अधिक अलग नहीं है। वैसे भी विशाल की फिल्मों में तकनीक का चमत्कार नहीं होता. उनकी कहानियां गुंफित रहती हैं, जो आगे-पीछे के क्रम में नहीं आतीं। उनकी हर फिल्म में अनेक किरदार होते हैं, जो मिलकर कहानी पूरी करते हैं। इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा समेत अनेक अभिनेता प्रमुख भूमिकाओं में हैं। नील नितिन मुकेश, इरफान, अनु कपूर और नसीरूद्दीन  शाह ने अपने किरदारों में जान भर दी है। इन चारों ने सुजैन  के साथ और भिडं़त के दृश्यों में प्रभाव छोड़ा है। फिल्म के सूत्रधार बने अरूण  की भूमिका में विवान  साधारण रहे हैं। उनकी आवाज ज्यादा असरदार है। अगर  वही असर अभिनय में आ जाता तो यह फिल्म उनके लिए भी उल्लेखनीय हो जाती। फिल्म के केन्द्र में प्रियंका चोपड़ा हैं। उन्होंने सुजैन  के व्यक्तित्व के दंश, द्घंद्घ  और दुविधाओं को बहुत खूबसूरती और बारीक तरीके से अभिव्यक्त किया है। उन्हें निर्देशक का पूरा सहयोग  मिला है। मनोगत  और एकल दृश्यों में वह उभरी हैं। योग्य और अनुभवी अभिनेताओं  के सामने वह ज्यादा निखरी नजर आती हैं।
विशाल भारद्घाज  की 7  खून माफ मुख्य रूप  से प्रियंका चोपड़ा के अभिनय के लिए याद रखी जाएगी। प्रियंका ने फिर से साबित किया है कि सधा निर्देशक उनके अभिनय को नया आयाम देता है। 7 खून माफ विशाल भारद्घाज  के प्रिय लेखक रस्किन  बांड भी एक दृश्य में दिखाई पड़ते हैं। यह फिल्म उनकी कहानी सुजैन ज  सेवन हस्बैंड्स  पर आधारित है।

चीन के पास नहीं हैं हमसे ज्यादा ताकतवार लड़ाकू विमान !!!

वाशिंगटन. अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा है कि चीन हालिया स्टील्थ जेट लड़ाकू विमानों के परीक्षण के बावजूद अमेरिकी शीर्ष लड़ाकू विमानों के मामले में काफी पीछे है।

उन्होंने सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने कहा, ‘मुझे लगता है कि चीन को अभी लंबा सफर तय करना होगा।’ गेट्स ने कहा, ‘जब मैं चीन में था तो राष्ट्रपति हू जिंताओ और पीएलए ने जे-20 लड़ाकू विमान की योजना बनाई थी। हमें लगता है कि लगभग छह महीने, एक साल या उससे पहले वह इसका प्रायोगिक परीक्षण कर सकते हैं।’

उन्होंने कहा, 2020 तक वे लगभग पचास जे-20 विमान तैनात करेंगे और 2025 तक यह संख्या 200 हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘2016 के अंत तक हमारे पास एफ-35 लड़ाकू विमानों की संख्या 325 होगी। अगर समीक्षा के बाद तैयार कार्यक्रम को देखें तो हमारे पास पांचवी श्रेणी के 500 से अधिक लड़ाकू विमान होंगे। 2020 तक हमारे पास एफ-35 की संख्या 850 हो जाएगी।

अरब देशों में विरोध प्रदर्शनों की आग


 पूरे अरब जगत में लोग सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. शुक्रवार की नमाज के बाद हजारों लोगों ने अपनी देश की सरकारों के खिलाफ अपना गुस्सा जताया. यमन, बहरीन और लीबिया में इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों की पुलिस और सुरक्षाबलों से झड़प हुई है. यमन में टेस शहर मे प्रदर्शनकारियों की भीड़ में एक हैंड ग्रेनेड फटने से दो लोगों की मौत हो गई. बहरीन की राजधानी मनामा को सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया है. यहां दंगा नियंत्रक पुलिस ने एक सरकार विरोधी शिविर पर हमला किया है. इन झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई. लीबिया में सेना और पुलिस मिल कर प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण करने की कोशिश में है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक लीबिया में अब तक 24 लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा कुवैत, ओमान और जॉर्डन की राजधानी अम्मान में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं.


क्यों बोला आडवाणी ने 'सॉरी', भन्नाए हैं पार्टी वाले


नई दिल्ली काले धन के मामले में भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेने पर खेद जताया है।

आडवाणी ने 16 फरवरी को सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें सोनिया गांधी को दुख पहुंचाने का बेहद अफसोस है। सोनिया गांधी ने 15 फरवरी को आडवाणी को खत लिखा था कि उनका व उनके परिवार के किसी सदस्य का विदेशी बैंक में खाता नहीं है और भाजपा की ओर से ऐसे आरोप लगाए जाने से उन्हें बहुत कष्ट पहुंचा है। आडवाणी के करीबी सूत्रों ने इसे पार्टी के शीर्ष नेता का बड़प्पन करार दिया है, मगर भाजपा में इस पर विवाद खड़ा हो गया है।

पार्टी के कई सांसदों व नेताओं ने दबी जुबान में उनके खेद जताए जाने को गैर-जरूरी करार दिया।

इन नेताओं का कहना था कि संसद सत्र से ठीक पहले आडवाणी के इस कदम से भ्रष्टाचार पर घिरी कांग्रेस का पलड़ा भारी हो गया है और पार्टी के अभियान पर पानी फिरने का खतरा है। संघ के वरिष्ठ सूत्रों ने भी आडवाणी के कदम पर हैरानी जताई है। एक अन्य नेता ने पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी इस मामले में गठित टास्क फोर्स पर थोप दी जिसकी रिपोर्ट में सोनिया व राजीव गांधी का नाम लिया गया है

आजमगढ़ में सिपाही की गोली मारकर हत्या



आजमगढ़: मेहनगर थाना क्षेत्र के विषहम गांव के समीप गुरुवार की रात लकड़ी माफियाओं की घेराबंदी के दौरान उनकी गोली से गंभीरपुर थाने का एक सिपाही शहीद हो गया। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जिले की एसओजी व कप्तानगंज थानाध्यक्ष की संयुक्त टीम ने अलग-अलग स्थानों से इस घटना में शामिल तीन लोगों को असलहा सहित गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक भगवान स्वरूप श्रीवास्तव ने पत्रकारों को बताया कि गंभीरपुर पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र में सक्रिय वन माफिया शीशम का पेड़ काटकर लकड़ी ले जाने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस ने बताये गये स्थान पर दबिश दी लेकिन माफिया वहां से पिकअप वैन पर लकड़ी लादकर निकल चुके थे। थानाध्यक्ष ने क्षेत्र में गश्त कर रहे सिपाहियों को फोन से सूचित कर रास्ते में अवरोध खड़ाकर वैन को रोकने का निर्देश दिया। उधर थानाध्यक्ष पंकज सिंह हमराहियों के साथ खुद माफियाओं की तलाश में निकले थे। टेकमलपुर गांव के पास सड़क पर अवरोध देख लकड़ी लदी पिकअप के चालक ने वाहन को बैक किया और मेंहनगर क्षेत्र के विषहम गांव की ओर भागने लगा। इसी बीच सिपाही नित्यानंद सिंह वाहन चालक की ओर वैन का गेट पकड़कर लटक गया। उसी दौरान चालक के बगल में बैठे वन माफियाओं ने सिपाही पर लक्ष्य कर असलहे से फायर कर दिया। गोली नित्यानंद की कनपटी में लगी और वह गिर पड़ा। इसके बाद माफिया मौके से फरार हो गये। कुछ देर बाद ही गंभीरपुर थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और सड़क पर घायलावस्था में अचेत पड़े सिपाही को यह जानकर अपने वाहन पर लादा कि वह वाहन के धक्के से घायल हुआ है। आनन-फानन में जिला अस्पताल लाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के उच्चाधिकारी भी अस्पताल पहुंच गये। मृत सिपाही के सिर का एक्सरे कराया गया तो उसे गोली लगने की पुष्टि हुई। इस घटना से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गयी।
पुलिस अधीक्षक भगवान स्वरूप ने इस घटना को अंजाम देने वालों की गिरफ्तारी के लिए जिले की एसओजी टीम व कप्तानगंज थानाध्यक्ष को लगाया। पुलिस टीम ने घटना में शामिल पिकअप वैन चालक अशहद पुत्र नूर मोहम्मद को उसके मुहम्मदपुर थाना गंभीरपुर स्थित आवास से गिरफ्तार कर वाहन को भी कब्जे में ले लिया। उससे पूछताछ के दौरान जानकारी मिलने पर मुख्य आरोपी मोहम्मद हारुन उर्फ पप्पू व तवरेज उर्फ निरहू निवासी कस्बा मुहम्मदपुर थाना क्षेत्र गंभीरपुर को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त 32 बोर रिवाल्वर भी बरामद कर लिया। पकड़े गये लोगों की निशानदेही पर पुलिस ने क्षेत्र के चीउटहीं ग्राम स्थित एक पोखरे से पानी में छिपाये गये शीशम के सात बोटे बरामद कर लिये। मामले का राजफाश करने वाली पुलिस टीम को पुलिस उपमहानिरीक्षक द्वारा 12 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है।
सिपाही का शव पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन परिसर लाया गया जहां उसे अंतिम विदाई दी गयी। घटना की जानकारी पाकर सिपाही के परिजन भी मौके पर पहुंच गये थे। देर शाम शव उसके घर गाजीपुर भेज दिया गया।



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Thursday, February 17, 2011

Bahrain Turmoil Poses Fresh Test for White House

अटैची में पैसे नहीं लेते हैं सट्टेबाज, बैंक खाते खुलवाकर पैसे जमा करवाते हैं रकम

नई दिल्ली. भारत में सट्टेबाजी ने 1983 में भारत के क्रिकेट विश्व कप जीतने के साथ जोर पकड़ा। क्रिकेट की लगातार बढ़ती लोकप्रियता के चलते मैचों के टीवी पर सीधे प्रसारण होने लगे और इसके साथ मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी का खेल भी अपने शबाब पर आने लगा। इस बार हो रहे विश्व कप क्रिकेट में 14 टीमें खेल रही हैं, जिसका सीधा मतलब है कि ज़्यादा मैच और उनपर सट्टा लगाने के ज़्यादा मौके। सट्टेबाज किस तरह से करोडो़ं-अरबों का धंधा चलाते हैं, यह ज़्यादातर लोगों के लिए एक रहस्य रहता है।

एक मशहूर पत्रिका ने हाल ही में एक पूर्व सट्टेबाज से बातचीत के जरिए यह जानने की कोशिश की थी कि सट्टेबाज किस तरह से पैसे का लेनदेन करते हैं और उनके कारोबार के तौर तरीके क्या हैं। पत्रिका के मुताबिक क्रिकेट सट्टेबाजी में पैसे लगाने वाले मुंबई के कारोबारी ने कहा, 'ऐसे धंधे (सट्टेबाजी) में कोई काग़ज़ी कार्रवाई नहीं होती है। लोग भरोसे के आधार पर धंधा करते हैं। इसी भरोसे के आधार पर पूरा सिस्टम काम करता है। मेरे लेनदेन में कभी कोई गड़बड़ी नहीं होती है।' सट्टेबाज लेन-देन के तौरतरीकों को बदलते रहते हैं। यही वजह है कि जांच एजेंसियों के लिए सट्टेबाजों को पकड़ना और मुश्किल हो जाता है।

पहले सट्टेबाज कर चुके और अब पुलिस के मुखबिर गुलजार उर्फ दानिश पटेल के मुताकि, 'सट्टेबाज अब अटैची में नोट भरकर न तो लेते हैं और न ही देते हैं। अब पैसे लगाने वालों से कहा जाता है कि वह किसी खास बैंक अकाउंट में पैसे जमा करें। इसके बाद सटोरिया उस पैसे को बैंक से निकालता है। अकाउंट किसी सटोरिए के नाम नहीं होता है।' गुलजार का कहना है, 'सट्टेबाज किसी भी ऐसे शख्स के जरिए बैंक में अकाउंट खुलवाते हैं, जिसे पैसे की जरूरत है। सट्टेबाज ऐसे शख्स को अपने नाम पर खाता खुलवाने के लिए करीब 10,000 रुपये देते हैं। जब पैसे लगाने वाला इस अकाउंट में पैसे डाल देता है तो सट्टेबाज सारी रकम निकालकर खाता बंद करवा देते हैं। गुलजार के मुताबिक देश भर के नामी बैंकों में ऐसे 13 लाख खाते हैं,

मिस्र गई महिला पत्रकार के सारे कपड़े फाड़े और...

मिस्र में चल रहे भारी उथलपुथल के बीच एक बुरी खबर प्रकाश में आई है। मिस्र में पिछले दिनों पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच एक महिला पत्रकार के यौन उत्पीडन की खबर है।

सीबीएस चैनल की इस महिला पत्रकार का नाम लारा लोगन है। बताया जा रहा है कि लोगन मुबारक के सत्ता छोड़ने के बाद हुए जश्न के दौरान तहरीर चौराहे पर मौजूद थीं, कि तभी उनके दल और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को भीड़ ने घेर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी अफरा-तफरी के दौरान भीड़ ने लोगन के कपडे फाड़ डाले और उनके साथ बदसलूकी की।बहरहाल बाद में सेना के जवानों ने लोगन को भीड़ से बचाया।