Monday, January 31, 2011

करमापा को 'जासूस' बताने पर भड़का चीन, कहा- भरोसे लायक नहीं है भारत

धर्मशाला. तिब्बती धर्मगुरु करमापा लामा पर हिमाचल प्रदेश पुलिस का शिकंजा कसता ही जा रहा है। मठ में मिली विदेशी मुद्रा और विदेशी सिमकार्डों पर पुलिस ने करमापा से सीधी पूछताछ की है लेकिन करमापा के जवाब से पुलिस संतुष्‍ट नहीं है और उनसे फिर पूछताछ हो सकती है।

पूरे मामले में जहां दलाई लामा ने करमापा का साथ दिया है, वहीं चीन ने भारत को निशाने पर ले लिया है। दलाई लामा का कहना है कि करमापा के मामले की पूरी जांच हो, लेकिन उन्‍होंने करमापा को बदले जाने की संभावना से साफ इनकार कर दिया। करमापा बौद्ध धर्म गुरू हैं और आने वाले समय में 75वर्षीय दलाई लामा का स्‍थान ले सकते हैं।

उधर, चीन ने इस बात से इनकार किया है कि करमापा उसका जासूस है। चीन का कहना है कि भारत ने करमापा पर चीन के लिए जासूसी करने का शक जाहिर कर यह दिखा दिया है कि उसे चीन पर भरोसा नहीं है। ऐसे में भारत भी चीन के भरोसे के लायक नहीं रह जाता।

रविवार को सिद्धबाड़ी स्थित ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय के अस्थायी निवास में ऊना के एएसपी केजी कपूर और डीएसपी सुरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम की पूछताछ के दौरान करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे ने कहा कि उन्‍हें यह रकम चढ़ावे के तौर मिली है। उन्‍होंने कहा, ‘मैं बौद्ध भिक्षु हूं। बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने और अनुयायियों को आशीर्वाद देने तक ही मेरी दिनचर्या सीमित है। अनुयायियों के चढ़ावे और उपहारों का हिसाब मैं नहीं, बल्कि लवरंग तशरुफू में तैनात अधिकारी और कर्मचारी रखते हैं।’

पुलिस ने करमापा दोरजे से विदेशी मुद्रा और जमीन खरीद-फरोख्त मामले में 50 सवाल पूछे। अधिकतर सवालों के जवाब में करमापा ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा, इनके जवाब वित्त अधिकारियों को ही मालूम होंगे। करमापा ने पुलिस को स्पष्ट कहा कि हिसाब में गड़बड़ी है तो इसके लिए वित्त शाखा जिम्मेदार है। किस अनुयायी ने कब कितनी राशि उपहार या दान में दी, मैंने कभी इसका हिसाब नहीं किया। एएसपी कपूर ने करमापा के जवाबों पर असंतोष जताते हुए कहा कि उनसे इस मामले में दोबारा पूछताछ की जा सकती है।

करमापा दोरजे हैं चीनी एजेंट!

इस बीच करमापा के चीनी कनेक्शन के भी पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं। इस मामले में अबतक दो लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
मठ में मिली विदेशी करेंसी और विदेशी सिमकार्ड ने तिब्बती धर्म गुरु करमापा को शक के पुख्ता घेरे में खड़ा कर दिया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक करमापा के चीन से संबंध पर शक करने के लिए कई वजहें हैं।

करमापा का पीएलए यानी चीनी सेना के तीन रसूखदार लोगों से संबंध हैं। खुफिया एजेंसियों ने करमापा की बातचीत भी इंटरसेप्ट की है। करमापा के पास 5 अलग-अलग नामों से सिमकार्ड मिले हैं, उनमें 2 सिमकार्ड चीन के हैं।

करमापा के पास जो पैसा आया, वो म्यांमार और नेपाल के जरिए हवाला से आया, जहां पर चीन लगातार हावी हो रहा है। मठ से बरामद लैपटॉप और दस्तावेजों में दलाई लामा की यात्रा, उनकी मीटिंग का ट्रैक रिकॉर्ड है. साथ ही भारत की विदेश नीतियों का भी जिक्र है।  

हालांकि करमापा को चीनी एजेंट बताने के आरोपों को निराधार करार देते हुए करमापा कार्यालय प्रशासन के सलाहकार एवं मंगोलिया के पूर्व राजदूत और सिक्किम के पूर्व सांसद करमा टोपदेन ने रविवार को कहा कि चीनी दबाव के चलते ही करमापा वर्ष 2000 में चीन अधिकृत तिब्बत से चोरी-छिपे शरण लेने भारत पहुंचे थे। चीन सरकार का उन पर दबाव था कि वह दलाईलामा की इच्छाओं के विरुद्ध चीन सरकार की ओर से निर्वाचित पंचेन लामा को मान्यता की घोषणा करें। ऐसे में उन पर एक दशक बाद यह आरोप लगाना सरासर गलत है। रविवार को सिद्धबाड़ी परिसर में करमा टोपदेन और सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेश माथुर ने प्रेस वार्ता में माना कि ऊना पुलिस द्वारा गाड़ी से बरामद एक करोड़ रुपए का भुगतान करमापा कार्यालय की ओर से गठित कारमे गारचिन ट्रस्ट के जरिये करमापा के लिए सिद्धबाड़ी में भूमि खरीदने की खातिर दिल्ली में किया गया था, जिसकी उनके पास रसीद है।

अक्टूबर 2010 में सिद्धबाड़ी में भूमि खरीदने का सौदा ढाई करोड़ रुपए में हुआ था, जिसमें से 90 और 75 लाख रुपए का भुगतान चेक के माध्यम से और एक करोड़ रुपए का भुगतान नकद किया गया था। इन्होंने माना कि करमापा ने भूमि खरीदने और उनको दान में मिलने वाली विदेशी मुद्रा को बैंक खातों में जमा करवाने के लिए फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट 1976 (एफसीआरए) के तहत आवेदन किया है, लेकिन अभी तक गृह मंत्रालय ने इसकी अनुमति नहीं दी है। सिद्धबाड़ी में भूमि खरीदने के लिए एसेंसिलिटी सर्टिफिकेट और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ टैनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट की धारा 118 के तहत जिला राजस्व अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था, जिसकी अनुमति अपेक्षित थी। इसके चलते ही भूमि बेचने वाले को राशि का भुगतान किया गया है।

करमापा ने वर्ष 2003 में चंदे के रूप में मिलने वाली विदेशी मुद्रा के सरस्वती ट्रस्ट का गठन कर आवेदन किया था, जिसे भारत सरकार ने रिजेक्ट कर दिया था। करमापा मठ से बरामद विदेशी और भारतीय मुद्रा की जानकारी प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी थी। मठ में आने वाले एक-एक रुपए का हिसाब-किताब लवरंग तर्शुफू द्वारा रखा जाता है। उन्होंने कहा, करमापा कारोबारी नहीं हैं जो मठ में आने वाली राशि का लेखा-जोखा खुद रखें। करमापा ने धार्मिक शिक्षा पूरी करने और दलाईलामा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ही भारत में शरण ली थी। प्रेस वार्ता में दलाईलामा केंद्रीय प्रशासन के वित्त मंत्री छेरिंग थुंडुप और सिक्किम स्थित रुमटेक लवरंग के प्रबंधक भी उपस्थित थे।

फर्जी था अथॉरिटी लैटर

उना के मैहतपुर बैरियर पर स्कोर्पियो गाड़ी से बरामद एक करोड़ रुपए को बिना किसी दिक्कत धर्मशाला पहुंचाने के लिए कॉपरेरेशन बैंक के सीनियर मैनेजर डी.के. धर ने कारोबारी के.पी. भारद्वाज के नाम से फर्जी अथॉरिटी लैटर जारी किया था। 25 जनवरी को बैंक से भारद्वाज के नाम कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुई है। एसपी संतोष पटियाल ने बताया कि जांच में पता चला है कि लैटर फर्जी था। इस सिलसिले में पुलिस ने अंबाला के कॉपरेरेशन बैंक के सीनियर मैनेजर डी.के. धर और धर्मशाला के कारोबारी के.पी. भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है।

धर को पुलिस शनिवार देररात अंबाला से पकड़ कर ऊना लाई। जबकि भारद्वाज को बगलामुखी के पास से हिरासत में लिया गया। इनके खिलाफ सदर थाने में भादंसं की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत केस दर्ज किया गया है। इससे पहले पुलिस संयोग दत्ता, आशुतोष और कारमे गारचिन ट्रस्ट के प्रबंधक रावजी चौसांग को गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में अब तक पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस ने दिल्ली स्थित मजनू का टीला से एक तिब्बती महिला को पूछताछ के लिए तलब किया है। इसके नाम का अभी खुलासा नहीं किया है। एसपी संतोष पटियाल के मुताबिक धर्मशाला के कारोबारी के आवास तथा अन्य प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की छापामारी में महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं। इनकी जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी और गिरफ्तारियां होने के संकेत दिए हैं।

मजनूं टीला से हुआ था भुगतान
सूत्रों के मुताबिक मैहतपुर बैरियर पर पकड़ी एक करोड़ की नगदी का भुगतान 25 जनवरी को कारमे गारचिन ट्रस्ट के प्रबंधक रावजी चौसांग ने मजनू का टीला से किया था। इस मामले में पुलिस ने दिल्ली के एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और पीएनबी बैंकों की डिटेल को खंगाला।

चीन पर दागे आरोप

तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा, करमापा लापा के अस्थायी निवास से विदेशी मुद्रा बरामद होने के पीछे चीन का हाथ हो सकता है। दलाई लामा ने रविवार को चित्रदुर्ग में कहा कि धर्मशाला में चीन के बहुत से अनुयायी रहते हैं। संभव है कि पैसा बरामदगी में उनकी भूमिका हो। फिर बेंगलुरू के नेशनल कॉलेज ग्राउंड में धर्मगुरु ने कहा, चीन सरकार के दमन के बावजूद वहां बौद्ध धर्म के अनुयायी बढ़ते जा रहे हैं। चीन निवासी तिब्बतियों के अनुसार वहां कम से कम 30 करोड़ बौद्ध हैं।’ उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था खुलने और विकास के बाद मजबूरी में चीन को धार्मिक रूप से सहिष्णु होना पड़ा है।

आपकी बात
करमापा के मठ से दबिश के दौरान मिली विदेशी मुद्राओं में चीनी मुद्रा युआन की बरामदगी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जब निर्वासित तिब्बती चीनी सामान का बहिष्कार करने के लिए विश्व समुदाय से भी अपनी अपील करते हैं तो करमापा अवतार के पास चीन की यह मुद्रा किस प्रकार और क्यों बौद्ध मठ में पहुंची? जिस प्रकार से करमापा अवतार के अनुयायियों की गतिविधियां बढ़ी है उसको लेकर दलाईलामा के अनुयायी भी असमंजस में हैं। आप क्‍या सोचते हैं इस मुद्दे पर? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखकर दुनिया भर के पाठकों से शेयर कर सकते हैं..

महाराष्ट्र में तेल माफियाओं के खिलाफ छापे, 180 गिरफ्तार

मुंबई।। अडिशनल कलेक्टर यशवंत सोनवणे को जिंदा जलाकर मारने के विरोध में महाराष्ट्र के करीब 18 लाख सरकारी कर्मचारी गुरुवार को हड़ताल पर हैं। तेल माफिया के हाथों अपने एक अडिशनल कलेक्टर की शहादत के बाद और सरकारी कर्मचारियों के दबाव में आखिरकार महाराष्ट्र सरकार जागी है। गुरुवार को राज्य की करीब 200 जगहों पर महाराष्ट्र सरकार ने तेल में मिलावट के कारोबार पर लगाम कसने के मकसद से छापेमारी की है। इस कार्रवाई में अब तक 180 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उधर, पुलिस ने इस हत्याकांड के सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि तेल माफियाओं की कमान प्रदेश के राजनेताओं के हाथों में है।

उधर, नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में तेल कंपनियों के अधिकारी और अन्य सीनियर अधिकारी भाग ले रहे हैं। इस बैठक का मकसद देश भर में पेट्रोल में चल रहे मिलावट के गोरखधंधे पर लगाम लगाने के लिए योजना बनाना है।

इसके पहले बुधवार को महाराष्ट्र के नासिक जिले में अडिशनल कलेक्टर यशवंत सोनावणे को जिंदा जला दिए जाने के मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपी पोपट शिंदे मुंबई के सरकारी अस्पताल में भर्ती है। अधिकारी को जिंदा जलाने के समय शिंदे भी झुलस गया था और उसकी हालत गंभीर बताई जाती है।

गौरतलब है महाराष्ट्र के नासिक जिले में केरोसिन माफियाओं ने अडिशनल कलेक्‍टर यशवंत सोनावणे को जिंदा जलाकर मार डाला था।

घोटाले में फंसे लोगों को मुआवजा देगा सिटी बैंक

सुगाता घोष
मुंबई।। सिटी बैंक ने धोखेबाज रिलेशनशिप मैनेजर शिवराज पुरी के सताए ग्राहकों को मुआवजा देने का फैसला किया है। बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर पुरी ने कई रईस ग्राहकों को करोड़ों का चूना लगाया है।

बैंक फिलहाल एचएनआई ग्राहकों के अकाउंट सेटलमेंट में लगा है, जिन्होंने पुरी पर भरोसा करके फर्जी निवेश स्कीम में अपनी जमा पूंजी लगा दी थी।

पुरी के कुल 40 ग्राहकों में 12-13 लोगों से सिटी बैंक अगले कुछ दिनों में औपचारिक सेटलमेंट नियमों के साथ संपर्क करेगा, ताकि उन्हें मूल रकम वापस मिल सके। इसके बाद बैंक नुकसान उठाने वाले दूसरे ग्राहकों के साथ बातचीत करेगा। जाने-माने वेंचर कैपिटलिस्ट संजीव अग्रवाल और हीरो ग्रुप के मेंबर शायद सिटी बैंक से मुआवजा पाने वाले ग्राहकों की पहली सूची में नहीं हैं।

बैंकिंग सर्कल के मुताबिक, बैंक अगले चरण में इन ग्राहकों से संपर्क कर सकता है, क्योंकि उनके खातों में बड़ा निवेश होने के साथ कई बार लेनदेन हुआ है। बकौल अग्रवाल, मुझे पुरी की जालसाजी से 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मामले की जांच कर रही गुड़गांव पुलिस का कहना है कि हीरो ग्रुप के मेंबर ने पुरी की फर्जी स्कीम में 250 करोड़ रुपये का निवेश किया था। पुरी फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है।

पुरी के ग्राहकों को मुआवजा देने से इस मल्टीनैशनल बैंक को करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। पुरी इन ग्राहकों से चेक लेकर अपने दादा प्रेमनाथ के नाम पर खोले गए कस्टोडियन अकाउंट में डालता था।

इस जालसाजी के मास्टरमाइंड ने अपनी चालाकी से 400 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। उसे शुक्रवार को स्थानीय अदालत के निर्देश पर 14 दिन की ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया गया। इससे पहले वह 14 दिन तक पुलिस हिरासत में था।

नोटों पर सोते हैं मध्य प्रदेश के सरकारी अफसर

सुचंदना गुप्ता ।। भोपाल
बीमारू राज्य मध्य प्रदेश में सरकारी अफसरों के बैंक लॉकर नकदी और सोने से ठसाठस भरे हुए हैं। यहां के एक आईएएस दंपती के पास 25 फ्लैट और 400 एकड़ जमीन है। एक मिडल लेवल इंजीनियर की पत्नी के पास तीन मकान हैं और उनके बैंक लॉकर से 10 किलो सोना मिला है। और जब भी आयकर विभाग के अधिकारी छापा मारते हैं तो इतनी नकदी मिलती है कि उसे गिनने के लिए काउंटिंग मशीन मंगवानी पड़ती है।

इस हफ्ते आयकर विभाग ने लोकायुक्त और राज्य सरकार को दो रपटें सौंपी हैं जिनमें इन छापों के बारे में जानकारी दी गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएएस दंपती अरविंद और टीनू जोशी के आधिकारिक आवास पर 4 फरवरी 2010 को मारे गए छापे में 360 करोड़ की संपत्ति का पता चला है। इस छापे में बड़ी मात्रा में नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद हुई जिसे हाथों से गिनना संभव नहीं था और काउंटिंग मशीनें मंगवाई गईं। मशीन से गिनती में 3 करोड़ रुपये की नकदी और 7 लाख रुपये विदेशी मुद्रा का पता चला। एक सूटकेस में 67 लाख रुपये की कीमत का सोना भी बरामद हुआ।

छापे में जब्त कागजात से पता चला कि 1979 में आईएस बने इन मध्य प्रदेश काडर के अफसर दंपती ने 25 फ्लैट खरीदे हैं। इस परिवार ने जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के रूप में 3.5 करोड़ रुपये दिए, 274 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी की और 3 करोड़ रुपये कुछ शेयरों में लगाए। छापे के बाद इस दंपती को सस्पेंड कर दिया गया।

पिछले सोमवार को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अफसरों ने एक पीडब्ल्यूडी इंजीनियर अशोक कुमार जैन की बीवी के नाम पर दो बैंक लॉकर खुलवाए तो उसमें 7.8 किलो सोना (ज्यादातर छड़ें) और 1.6 करोड़ रुपये नकदी बरमद हुए। एक साल पहले तक नरसिंहपुर जिले में तैनात इस इंजीनियर की सैलरी 20 हजार रुपये महीने थी। अशोक जैन पर आय से अधिक संपत्ति का केस चलाया जा रहा है।


साढ़े तीन साल पहले स्वास्थ्य घोटाले में पड़े छापों में और चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। पूर्व स्वास्थ्य निदेशक योगराज शर्मा के घर पर वॉशिंग मशीनें, अलमारियां, रजाइयां, चादरों, तकियों और मसाले के डब्बे भी नोटों से अटे पड़े थे। शर्मा का परिवार नोटों से भरे गद्दों पर सोता था। मशीनों से हुई नोटों की गिनती में 1.75 करोड़ रुपये भारतीय नोट और 6 लाख की विदेशी मुद्रा का पता चला।

Sunday, January 30, 2011

IAS कपल 30 साल से कमा रहा है 12 करोड़ सालाना

ललित वत्स
नई दिल्ली।। पिछले साल फरवरी में इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट ने रेड कीं, तो आईएएस कपल के यहां करीब तीन करोड़ रुपए कैश और जमीन-जायदाद वगैरह के अनगिनत कागजात मिले। तब भी हैरत हुई थी। अब छानबीन पूरी होने पर तैयार 7000 पेज की रिपोर्ट की जानकारी भी आम आदमी के लिए ही नहीं, सरकारी गलियारों में भी कितनों के ही लिए हैरत पैदा कर रही है।

रिपोर्ट के आधार पर जो जानकारी सामने आई है, उस हिसाब से वह आईएएस कपल सर्विस जॉइन करने के पहले ही साल से 12 करोड़ रुपए औसतन हर साल कमा रहा था, हालांकि उनके जॉइनिंग के साल 1979 में सैलरी 17-18 हजार रुपए महीना थी। गौरतलब है कि इस समय उस लेवल के एक आईएएस अफसर की सालाना सैलरी तकरीबन एक लाख रुपए महीना और 12 लाख रुपए सालाना है। यानी दोनों की सैलरी मिला कर 24 लाख रुपए सालाना।

खूब चर्चा हुई थी और हैरानी भी थी, जब 1979 बैच के आईएएस अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के निवास पर भोपाल में पिछले साल रेड हुई। सूत्रों के अनुसार, कहें तो एक छोटी ही टीम रेड में गई थी। लेकिन जब पिटारा खुलता गया, तो उतने कर्मियों को जांच में लगाना पड़ा, जितने कि आमतौर पर 15-20 लोगों के केसों में लगाए जाते हैं।

विदेशों में छानबीन

इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट की रिपोर्ट आने के बाद जोशी कपल को एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट (ईडी) ने भी हाल ही में नोटिस दिया है। विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन की जांच करने वाले ईडी के अफसर भी हैरान हैं। हैरान कि क्या हौसला है? आईएएस अरविंद जोशी की दो बहनें बरसों से विदेशों में रह रही हैं। इसकी छानबीन की गई है और कराई जा रही है। जोशी ने काफी बड़ी ऐग्रिकल्चर लैंड विदेश में रह रही दोनों बहनों के नाम से भी ले रखा था। अफसरों का कहना है कि नाम बहनों का, लेकिन पैसा जोशी दंपती का ही लगा है। उस जमीन को खरीदने के लिए नियमों का उल्लंघन कर पैसा बाहर गया और आया।

क्या सिर्फ नोट उगा रहे थे?

बहरहाल, इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस कपल की अपने नाम में और बेनामी धनदौलत करीब 360 करोड़ रुपए की आंकी है। कहा जा सकता है कि पहले सस्ते में खरीदी गई जमीन की कीमत अब बढ़ कर कहीं ज्यादा हो गई है, इसलिए आज के रेट पर मामले को नहीं देखा जाना चाहिए। इसे मान लिया जाए, तो भी सरकारी गलियारे हैरान हैं। उन गलियारों में कितने ही जानकारों का सवाल है कि क्या यह कपल रोजाना सरकारी कामकाज करने के बजाए सिर्फ नोट उगाने का ही काम करता था, जो इतनी बड़ी धन दौलत बन गई? इतनी बड़ी कमाई को कैसे-कब गिनता था?

जो भी हो, अभी और जांच होनी है। कई कोण जुड़ने हैं। कई जानकारों का कहना है कि यह जानना दिलचस्प होगा कि किस डील में इस कपल ने कब क्या हासिल किया?

400 एकड़ जमीन, 25 फ्लैट, जेवरात, बैंक बैंलेंस, बड़ी इंश्यारेंस पॉलिसी, और बहुत कुछ? यह सब किस फार्म्युले से किस-किस एवज में हासिल कर लिया गया? गौरतलब है कि राज्य में तैनात रहने के अलावा पति-पत्नी केन्द्र में भी अहम पदों पर रहे हैं। टीनू जोशी तकरीबन बीस साल पहले प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में भी थीं। अरविंद जोशी कारगिल युद्ध के दिनों में रक्षा मंत्रालय में थे।

सलमान ने बिग बी को पीछे छोड़ा

सलमान खान ने अमिताभ बच्चन को टेलीविजन के सबसे चर्चित रियलटी शो बिग बॉस में रिप्लेस किया है और लगता है की अमिताभ की जगह सलमान का चुनाव सही भी साबित हो रहा है|कम से कम शो की टीआरपी देखकर तो यही लगता है|
सलमान के द्वारा होस्ट किया गया बिग बॉस-4 इस समय 3.6 % की टीआरपी बटोर रहा है जबकि अमिताभ के समय इस शो की टीआरपी 3 % थी|यहां तक की सलमान ने अपने पिछले शो दस का दम की टीआरपी को भी पीछे छोड़ दिया है|
मगर हो सकता है बिग बी सलमान से फिर अपनी नंबर वन की कुर्सी हथिया लें क्योंकि अगले हफ्ते उनका शो कौन बनेगा करोड़पति एक बार फिर शुरू होने जा रहा है|

आईपीएल की कीमत चुका रहा है ईडन गार्डन


कोलकाता. यहां के ऐतिहासिक ईडन गार्डन स्‍टेडियम में वर्ल्‍ड कप मैच की मेजबानी को लेकर खींचतान जारी है। इस मैदान पर वर्ल्‍ड कप के भारत और इंग्‍लैंड के बीच 27 फरवरी खेला जाने वाला मैच आयोजित नहीं कराने के रुख पर आईसीसी कायम है तो बीसीसीआई ने इस मैच को बेंगलुरू में कराए जाने का विकल्‍प सुझाया है।

दरअसल पिछले साल फरवरी में इस मैदान पर भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्‍ट मैच हुआ था। इसके बाद करीब एक महीने तक इस मैदान पर आईपीएल के सात मैच खेले गए। इनके एवज में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) को तीन करोड़ रुपये तो मिले लेकिन मैदान को वर्ल्‍ड कप के मैचों के माफिक तैयार करने का वक्‍त नहीं मिल सका।

कोलकाता के उलट मुंबई आईपीएल के मैचों को वानखेडे स्‍टेडियम के बजाय ब्रेबोर्न और डीवाई पाटिल स्‍टेडियम में कराता रहा। इस वजह से वानखेडे में वर्ल्‍ड कप की मेजबानी की तैयारी जोरों पर हैं और आईसीसी भी इस काम से संतुष्‍ट नहीं है।

कैब के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा है कि एसोसिएशन आनन फानन में अपनी जेब भरने की कीमत चुका रहा है। स्‍टेडियम की तैयारी में हुई देरी के लिए केवल ठेकेदारों को ही जिम्‍मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कैब बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी के सदस्‍य एस पाल ने कहा, ‘हमें ईडन पर पिछले साल आईपीएल के मैच नहीं आयोजित करने चाहिए थे। भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्‍ट मैच और इसके बाद कोलकाता नाइटराइडर्स के सात मैचों के चलते ठेकेदारों को स्‍टेडियम में तैयारी का काम रोकना पड़ा था।’ 

ईडन गार्डन से मैच छीने जाने को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। वित्‍त मंत्री और पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता प्रणब मुखर्जी ने आईसीसी प्रेसिडेंट और अपने सहयोगी कैबिनेट मंत्री शरद पवार से इस मामले में बात करने का भरोसा दिया है। हालांकि आईसीसी ने साफ कर दिया है कि वह ईडन गार्डन से भारत-इंग्लैंड वर्ल्‍ड कप मैच की मेजबानी छीनने के अपने फैसले पर फिर से विचार नहीं करेगी। आईसीसी ने बीसीसीआई की उस अपील को भी खारिज कर दिया है, जिसमें उसने ईडन में नवीकरण कार्यों की समयसीमा सात फरवरी तक बढ़ाने का अनुरोध किया था। 

आईपीएल4: गांगुली को खेलने का मौका मिलेगा या नहीं, फैसला 4 दिन बाद

मुंबई. आईपीएल के लिए पिछले महीने हुई नीलामी में किसी टीम का हिस्‍सा नहीं बन सके सौरव गांगुली की तकदीर का फैसला अब चार फरवरी को होगा। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की गवर्निंग काउंसिल की उसी दिन मुंबई में एक बैठक होगी जिसमें यह फैसला किया जाएगा कि टीम कोच्चि गांगुली को साइन कर सकती है या नहीं।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सभी फ्रेंचाइजी को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि यदि कोई टीम नीलामी के दौरान नहीं बिक सके खिलाडियों को साइन करना चाहता है तो उन्‍हें कोई आपत्ति तो नहीं है।

बीसीसीआई के इस कदम से आईपीएल की नीलामी के दौरान नहीं बिक सके भारतीय खिलाडियों में गांगुली के अलावा वसीम जाफर और वीआरवी सिंह को भी फायदा होगा। बोर्ड ने यह कदम टीम कोच्चि की ओर से गांगुली को साइन करने का इरादा जाहिर किए जाने के बाद उठाया है।

आईपीएल के सीओओ सुंदर रमन की ओर से सभी फ्रेंचाइजी को भेजे गए मेल के मुताबिक, ‘आईपीएल नीलामी के नियमों से साफ है कि जिन खिलाडियों पर किसी ने बोली नहीं लगाई, वो किसी खिलाड़ी के टीम से बाहर होने की स्थिति में ही खेल सकते हैं। गवर्निंग काउ‍ंसिल ने भी इस मसले पर विचार किया है और आप सभी का इरादा जानना चाहती है कि यदि कोई टीम किसी ऐसे खिलाड़ी को खरीदना चाहता है तो आप सभी को कोई आपत्ति तो नहीं है।’

रमन ने साफ कर दिया कि ऐसी ही फ्रेंचाइजी किसी खिलाड़ी को उनके बेस प्राइस के मुताबिक साइन कर सकती है जिसकी जेब में पर्याप्‍त धनराशि हो। फ्रेंचाइजी को तीन फरवरी तक इस मसले पर सोचने की मोहलत दी गई है।

इस बीच, कोच्चि टीम प्रबंधन ने भी गांगुली को शामिल किए जाने में दिलचस्‍पी दिखाई है। कोच्चि टीम के मुताबिक, ‘हमने आईपीएल से इजाजत मांगी है कि क्‍या हम गांगुली को साइन कर सकते हैं। हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं।’ हालांकि टीम ने यह भी कहा है कि यदि गांगुली को टीम में शामिल किया जाता है तो उन्‍हें टीम की कमान सौंपी जा सकती है।

आईपीएल के पिछले तीन संस्‍करणों में कोलकाता नाइटराइडर्स का हिस्‍सा रहे गांगुली को पिछले दिनों आईपीएल के अगले संस्‍करणों के लिए हुई नीलामी में किसी टीम ने नहीं खरीदा था।

आपकी बात

2जी:समिति ने रिपोर्ट सौंपी

न्यायमूर्ति (सेवा निवृत्त) शिवराज वी पाटिल ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपी.
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले पर सेवा निवृत्त न्यायमूर्ति शिवराज वी पाटिल की एक सदस्यीय समिति ने 150 पन्नों की रिपोर्ट सोमवार को दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को सौंप दी है.
रिपोर्ट में कुछ अधिकारीयों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है.
न्यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया में खामियां थीं. इसका उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है.
दूरसंचार मंत्रालय ने शिवराज वी पाटिल को 2जी स्पेक्ट्र घोटाले की जांच करने को कहा था.
2001 से 2009 तक मोबाइल के लिए जारी किए गए स्पेक्ट्रम लाइसेंसों की जांच की गई.
जस्टिस शिवराज वी पाटिल सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए हैं.
रिपोर्ट मिलने के बाद दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल संचार भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बारे में जानकारी देंगे.

सिद्धार्थ देंगे दीपिका को 60 करोड़ का तोहफ़ा

सूत्रों के मुताबिक सिद्धार्थ माल्या जल्द ही दीपिका के लिए एक फिल्म फाइनेंस करने वाले हैं.
प्यार की दीवानगी क्या होती है ये कोई सिदार्थ माल्या से पूछे जी हां खबर है कि दीपिका को 16 करोड़ का फ्लैट गिफ्ट करने वाले सिद्धार्थ माल्या अब अपनी प्रेमिका को एक और तोहफ़ा देने जा रहे हैं.
इस फिल्म का बजट लगभग 60 करोड़ रुपए होने का अनुमान है. बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ एक प्रोडक्शन हाऊस भी खोलने वाले हैं.
इस प्रोडक्शन हाऊस का नाम उनकी कंपनी किंगफिशर के नाम पर रखा जा सकता है.

सिद्धार्थ इस प्रोडक्शन हाउस के तहत सबसे पहले अपनी प्रेमिका की फ़िल्म को फ़ाइनेंस करना चाहते हैं.
सूत्रों की मानें तो सिद्धार्थ अपने प्रोडक्शन हाऊस के बैनर तले एक एक्शन फिल्म बनाने की योजना बना रहे हैं.फ़िल्म में दीपिका एक्शन रोल में नजर आयेंगी.

बढ़ सकती हैं मोबाइल की कॉल दरें

विशेष संवाददाता
नई दिल्ली ।। तैयार रहिए, आने वाले समय में मोबाइल की कॉल दरें बढ़ सकती हैं। सरकार ने घोटाला रोकने के लिए टेलिकॉम सेवाओं के लाइसेंस के साथ स्पेक्ट्रम देने की पॉलिसी को खत्म कर दिया है। नए ऑपरेटरों को टेलिकॉम सेवाएं देने का लाइसेंस अलग से लेना होगा और स्पेक्ट्रम अलग से। स्पेक्ट्रम मार्केट कीमत पर दी जाएगी। पहले यह दोनों एक साथ दी जाती थी।

इसके अलावा जिन मौजूदा आपरेटरों के पास प्रति सर्कल 6.2 मेगाहर्ट्स से ज्यादा स्पेक्ट्रम है, उन्हें अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की कीमत देनी होगी। यह भी मार्केट कीमत के हिसाब से ली जाएगी। दोनों बदलाव को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

इन बदलावों की घोषणा टेलिकॉम मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को की। उन्होंने बताया कि भारती, वोडाफोन और आइडिया कंपनियों के पास अतिरिक्त स्पेक्ट्रम है। सिब्बल ने कहा, जिन मौजूदा ऑपरेटरों के पास 4.4 मेगाहर्ट्स का स्पेक्ट्रम है, वे अगर इसे बढ़ाकर 6.2 मेगाहर्ट्स तक ले चाहते हैं तो उन्हें 1.8 मेगाहर्ट्स भी मार्केट रेट पर दिया जाएगा।

सिब्बल ने साफ तौर पर कहा, भविष्य में लाइसेंस के साथ स्पेक्ट्रम नहीं दिया जाएगा। टेलिकॉम कंपनियों को जारी किया जाने वाला लाइसेंस यूनिफाइड यानी एकीकृत होगा। इस लाइसेंस के जरिए कंपनियां टेलिकॉम से जुड़ी सभी सेवाएं दे सकेंगी।

इधर मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि इससे कई कंपनियों पर वित्तीय भार बढ़ जाएगा। ट्राई के पूर्व सदस्य आर. एन. प्रभाकरण का कहना है कि पुरानों के साथ नए ऑपरेटरों के लिए यह घोषणा काफी महंगी साबित होगी। जिनके पास अतिरिक्त मेगाहर्ट्स हैं, उन्हें काफी मोटी राशि सरकार को देनी होगी। अभी 3 जी स्पेक्ट्रम के लिए कई स्लॉट बाकी हैं। 4 जी सेवाएं भी शुरू करने की बात हो रही है। नए और पुराने ऑपरेटरों के लिए स्पेक्ट्रम लेना काफी महंगा हो जाएगा। कंपनियां इसका भार आम ग्राहकों पर डालने की कोशिश करेंगी।

क्या है स्पेक्ट्रम
- स्पेक्ट्रम रेडियो वेव यानी हवा की तरंगों की फ्रीक्वेंसी है जिसके जरिए सिग्नल भेजे जाते हैं। मोबाइल से बातचीत इसी रेडियो वेव के जरिए मुमकिन होती है। सरकार ने पूरे देश को 22 सर्किल में बांटा हुआ है। कंपनियों को हर सर्कल में रेडियो वेव का इस्तेमाल करने के लिए सरकार से इसे यानी स्पेक्ट्रम को खरीदना पड़ता है।

मौजूदा नियम
मौजूदा नियमों के अनुसार कोई भी कंपनी 1650 करोड़ रुपये देकर टेलिकॉम सेवा शुरू करने का लाइसेंस ले सकती है और 22 सर्किल में मोबाइल में 2 जी सेवा शुरू कर सकती है। शुरू में उसे 4.4 मेगाहर्ट्स का स्पेक्ट्रम दिया जाता है। बाद में इसे बढ़ाकर 6.2 मेगाहर्ट्स कर दिया जाता है।

क्या है घोटाला
साल 2008 में सरकार ने 2 जी स्पेक्ट्रम को 'पहले आओ और पहले पाओ' की तर्ज में बांटा था। इसमें तय नियमों का खुलकर उल्लंघन किया गया है। कई कंपनियों को, जो इसे पाने की शर्तों को पूरा नहीं करती थीं, उन्हें भी 2 जी स्पेक्ट्रम दे दिया गया। कई कंपनियों को प्रति सर्कल 6.2 मेगाहर्ट्स से ज्यादा स्पेक्ट्रम दे दिया गया। इसके बाद 2010 में 3 जी स्पेक्ट्रम आवंटन नीलामी के जरिए किया गया। इससे सरकार को करीब 67 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। तभी यह सवाल उठा कि अगर 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई होती तो सरकार को भारी राशि मिल सकती थी। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में काफी गड़बड़ी की गई। इससे सरकार को करीब 1.76 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी।

भारत में गांधी से बड़े ब्रैंड हैं सचिन तेंडुलकर!

नई दिल्ली।। अगर आपसे कोई यह पूछे कि भारत की कौन-सी शख्सियत देश का सबसे भरोसेमंद ब्रैंड है, तो शायद आप राष्ट्रपिता महात्म गांधी का नाम लेंगे। लेकिन एक ताजा सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सचिन तेंडुलकर इस मामले में महात्मा गांधी से काफी आगे हैं। इसके मुताबिक, भारतीयों के लिए प्रॉडक्ट के तौर पर सबसे भरोसेमंद ब्रैंड नोकिया है, जबकि शख्सियत के मामले में सबसे भरोसेमंद ब्रैंड सचिन तेंडुलकर हैं।

भरोसेमंद ब्रांड की इस लिस्ट में नोकिया जहां नंबर वन है, वहीं सचिन 59वें नंबर पर हैं। महात्मा गांधी का नंबर 232वां है और आमिर खान 242वें नंबर पर हैं। आश्चर्यजनक रूप से अमिताभ बच्चन का नाम लिस्ट से गायब है।

'द ब्रैंड ट्रस्ट रिपोर्ट, इंडिया स्टडी-2011' नामक इस सर्वे में 16 हजार से अधिक ब्रैंड की स्टडी की गई। 61 कसौटियों पर इन ब्रैंडों को परखा गया और 9 शहरों के 2361 लोगों से इन कसौटियों पर राय पूछी गई।

इस सर्वे में 10 टॉप ब्रैंड में नोकिया के बाद टाटा, सोनी, एलजी, सैमसंग, रिलायंस, मारुति, एलआईसी, एयरटेल और टाइटन शामिल हैं।