Tuesday, February 1, 2011

ये है दुनिया का सबसे महंगा नंबर प्लेट

आपने दुनिया की सबसे महंगी कारों के बारे में सुना तो होगा लेकिन हम आपको बताते हैं ऐसे नंबर प्लेट्स के बारे में जिनकी कीमत लग्जरी कारों से भी कहीं ज्यादा है। ये नंबर प्लेट इतने महंगे हैं कि इतनी रकम में तो कई लग्जरी कारें खरीदी जा सकती हैं।

दुनिया के सबसे महंगे नंबर प्लेटों के मामले में अबू धाबी सबसे ऊपर है। एक ब्रिटिश वेबसाइट के मुताबिक वहां सबसे महंगे नंबर प्लेट बिके हैं।

दुनिया में अब तक सबसे महंगे 50 नंबर प्लेटों में से 37 अबू धाबी में बिके हैं। इन 37 प्लेटों को खरीदने में वहां के लोगों ने छह करोड़ डॉलर यानी लगभग 270 करोड़ रुपए खर्च किए। इस हिसाब से हर प्लेट पर औसतन 16 लाख डॉलर खर्च किए गए।

भारत की तरह ही अबू धाबी में भी 1 नंबर रखने का क्रेज सबसे ज्यादा है। यहां 1 नंबर वाले नंबर प्लेट की कीमत चुकाई गई एक करोड़ 42 लाख डॉलर। यह किसी नंबर प्लेट के लिए चुकाई गई अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

ये है दुनिया का सबसे महंगा मोबाइल नंबर

महंगे मोबाइल फोन के चर्चे तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन हम आपको दुनिया के सबसे महंगे मोबाइल नंबर के बारे में बता रहे हैं। यह नंबर इतना महंगा है कि इतनी कीमत में आपको दर्जनों महंगे मोबाइल फोन मिल जाएंगे। इस नंबर की कीमत है 27.5 लाख डॉलर यानी करीब 12.69 करोड़ रुपए। और यह नंबर है 6666666।

दुनिया के इस सबसे महंगे मोबाइल नंबर को बेचने वाली कतर की दूरसंचार कंपनी क्यूटेल को गिनीज बुक आफ व‌र्ल्ड रिका‌र्ड्स में भी जगह मिली है। आपको बता दें कि दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मोबाइल नंबर बेचने का खिताब का चीन की एक दूरसंचार कंपनी के नाम पर दर्ज है। यह नंबर 4.8 लाख डालर यानी करीब 2 करोड़ 22 लाख रुपये में बेचा गया था। और यह नंबर है 8888-8888।

12 साल के इस बच्चे ने कर दिया कमाल

बारह साल की छोटी उम्र के बच्चे आपको आमतौर पर खेलते-कूदते ही नजर आते होंगे। लेकिन इस छोटी सी उम्र में ही ब्रिटेन के एक बच्चे ने जो कारनामा कर दिखाया, वो करना बड़े-बड़ों के लिए मुश्किल है।

दरअसल थॉमस गुडइनफ नाम के इस छोटे से बच्चे ने आईफोन के लिए एक अनोखा एप्लिकेशन तैयार किया है। थॉमस द्वारा तैयार किए एप्लिकेशन के जरिए आप अपने आईफोन में एयर एम्बुलेंस बना सकते हैं। यही नहीं आप इसके जरिए ‘वर्चुअल पायलट’ भी तैयार कर सकते हैं। ये एक तरह का मोबाइल गेम है।

आपको बता दें कि थॉमस गुडइनफ द्वारा तैयार किए गए इस एप्लिकेशन को आई ट्यून्स के जरिए मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। हालांकि अगर कोई चाहे तो अपनी मर्जी से इस एप्लिकेशन को डाउनलोड करने के एवज में कुछ रकम दान कर सकता है जिसका इस्तेमाल चैरिटी के लिए किया जाएगा।

आपको बता दें थॉमस द्वारा तैयार किए गए इस एप्लिकेशन को हर रोज 150 बार से ज्यादा डाउनलोड किया जा रहा है। इस पर थॉमस ने कहा, “ मुझे खुशी है कि लोग इसे पसंद कर रहे हैं। इस एप्लिकेशन को तैयार करने में मैंने काफी मेहनत की है।”

ये है दुनिया का सबसे महंगा फ्लैट

यूं तो आज के दौर में बिल्डर्स और प्रॉपर्टी डेवलपर्स एक से बढ़कर एक महंगे और लग्जरी फ्लैट्स बना रहे हैं लेकिन हम आपको जिस फ्लैट के बारे में बता रहे हैं वो बेहद खास है। वहज यह है कि ये दुनिया का अब तक सबसे महंगा फ्लैट है। यह फ्लैट, सेंट्रल लंदन के वन हाइट पार्क नाम के अपार्टमेंट में मौजूद है। इस आलिशान फ्लैट की खूबियों की लिस्ट काफी लंबी है। इसमें बुलेट प्रूफ शीशे और पैनिक रूम तो है ही साथ ही एक और खास बात यह है कि इस फ्लैट की सुरक्षा में लगे गार्ड्स को इंग्लैंड की सिक्योरिटी एजेंसी एयर सिक्योरिटी सर्विस फोर्स ने ट्रेनिंग दी है। सेंट्रल लंदन में बने इस फ्लैट के नीचे से एक सुरंग सीधे लंदन के मशहुर रेस्टोरंट ‘हेस्टन ब्लुमेंथल’ तक जाती है। यही नहीं यहां से एक सुरंग सीधे लंदन के मैंडेरियन ओरिएंटल होटल तक भी जाती है।


पर इस फ्लैट की खूबियां यहीं नहीं खत्म हो जाती हैं। इस फ्लैट को बनाने के लिए तुर्की, इटली, फ्रांस, बेल्जियम, ब्राजिल, चीन और इजिप्ट से मंगाए गए खास पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इस फ्लैट की कीमत है 14 करोड़ पाउंड।


वन हाइड पार्क अपार्टमेंट में अलग अलग साइज के कुल 86 फ्लैट्स बनाए गए हैं। और इस अपार्टमेंट के सबसे सस्ते फ्लैट की कीमत है 6.5 मिलियन पाउंड। आपको जानकर हैरानी होगी की इतनी उंची कीमत होने के बावजूद इस फ्लैट में सिर्फ एक बेडरुम है।


तो अगर आपकी जेब भी इस आलीशान फ्लैट को खरीदने की इजाजत देती है तो बुकिंग जल्दी करवा लीजिए क्योंकि वन हाइड पार्क अपार्टमेंट में कुल 86 फ्लैट ही बनाए गए हैं। जिनमें से करीब 60 फीसदी फ्लैट्स बुक किए जा चुके हैं।

जानिए क्या है - न्यू फंड ऑफर डॉक्यूमेंट


एनएफओ डॉक्यूमेंट यानी न्यू फंड ऑफर डॉक्यूमेंट। इस दस्तावेज में हर वह जानकारी होती है, जो एक निवेशक के लिए निवेश करने से पहले जानना जरूरी होती है। किसी नए म्यूचुअल फंड या स्कीम से पहले यह डॉक्यूमेंट लाया जाता है। म्यूचुअल फंड के जरिये आपका पैसा कहां लगाया जाता है,उसकी जानकारी यह एनएफओ डॉक्यूमेंट देता है। यह डॉक्यूमेंट सेबी के दिशा-निर्देशों के तहत जारी किया जाता है।

इसमें निवेश के उद्देश्य का जिक्र होना चाहिए। जोखिमों और खास प्रावधानों के बारे में इस डॉक्यूमेंट में जिक्र जरूरी है। खर्चे का संक्षिप्त विवरण, निवेश से संबंधित निर्देश। संगठन और पूंजी संरचना की जानकारी। लेनदेन के संबंध में टैक्स प्रावधान और दूसरी वित्तीय जानकारियों का जिक्र होना एनएफओ डॉक्यूमेंट में होना बेहद जरूरी है।

जानिए क्या है - आईपीओ , आईपीओ लॉक-अप


आईपीओ
इनीशियल पब्लिक ऑफर को संक्षेप में आईपीओ कहते हैं। किसी निजी कंपनी द्वारा अपने शेयरों को आम लोगों के लिए खरीदारी की पहली पेशकश को आईपीओ कहते हैं। आईपीआ कंपनी अपनी पूंजी में विस्तार के लिए करती है। लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं है। बड़ी कंपनी भी पब्लिकली ट्रेडिंग के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ऐसे पेशकश दे सकती है। जो भी कंपनी आईपीओ जारी करती है वह यह घोषित करती है कि वह किसी तरह के सिक्योरिटीज जारी करेगी। सिक्योरिटीज की बेहतरीन पेशकश कीमत कितनी होगी। सिक्योरिटीज को बाजार में लाने का समय क्या होगा। इसे कभी-कभी संक्षेप में पब्लिक ऑफरिंग भी कह देते हैं। हालांकि आईपीओ को एक जोखिम भरा निवेश माना जाता है।

किसी भी वयक्तिगत निवेशक के लिए किसी कंपनी के शेयर के बारे में अनुमान लगाना एक मुश्किल काम होता है। खासकर ऐसी परिस्थितियों में जब किसी निवेशक ने नई-नई ट्रेडिंग शुरू की हो तब उसके लिए शेयरों के रूख के बारे में अनुमान लगा पाना आसान काम नहीं होता है। उनके लिए निकट भविष्य में शेयरों के रूख कैसे रहेंगे, का पता करना मुश्किल होता है। दरअसल आईपीओ अक्सर नई या छोटी कंपनियां बाजार में लाती हैं इसलिए निवेशकों के पास कंपनी विशेष के शेयरों के विश्लेषण के लिए कोई ऐतिहासिक आंकड़े मौजूद नहीं होते हैं।


आईपीओ लॉक-अप
किसी कंपनी द्वारा अपने शेयर पब्लिक के बीच जारी करने की आरंभिक प्रक्रिया के बाद एक निश्चित समय सीमा के बाद अनुबंध के तहत आपत्ति सूचना जारी की जाती है। आमतौर पर यह समय सीमा 90 दिन से लेकर 180 दिनों की होती है।

ट्रेडिंग के शुरूआती दिनों में कंपनी के अंदर के लोग या जिनके पास कंपनी के शेयर ज्यादा होते हैं, उनके शेयर बेचने पर मनाही होती है। लॉक अप अवधि की समाप्ति के बाद ही शेयर बेचे जा सकते हैं। इसलिए इसको अक्सर लॉक-अप पीरियड भी कहते हैं। आईपीओ लॉक-अप पीरियड की व्यवस्था इसलिए की जाती है ताकि बाजार में बहुत कम समय में किसी कंपनी के शेयरों की बाढ़ नहीं आ जाए। इसे ध्यान में रखकर कंपनियों द्वारा लाए जा रहे आईपीओ के 20 फीसदी शेयरों में आमलोगों को निवेश करने की छूट दी जाती है। सामान्य तौर पर लॉक-अप पीरियड के खत्म होने के बाद शेयरों की कीमत में 1-3 फीसदी की गिरावट स्थाई तौर पर आ जाती है।

जानिए क्या होता है पुट ऑप्शन ,कॉल ऑप्शन

ऐसा ऑप्शन जो खरीदार या धारक को सारे शेयर को एक निर्धारित कीमत पर या फिर एक निश्चित तारीख के पहले बेचने का अधिकार देता है। विक्रेता या राइटर के लिए इसे खरीदना बाध्यकारी होता है। हर पुट ऑप्शन की एक एक्सरसाइज प्राइस होती है। यह वह प्राइस होती है जिस पर धारक ऑप्शन राइटर को शेयर बेचता है। अगर शेयर के दाम एक्सरसाइज प्राइस के नीचे होता है तो कॉल देने वालों को लाभ होता है। इस ऑप्शन को इन द मनी भी कहते हैं। इसका एक खास मूल्य भी होता है। यह एक्सरसाइज मूल्य और कॉल प्राइस का अंतर होता है।

कॉल ऑप्शन
कॉल ऑप्शन भी भी दो पक्षों के बीच एक तरह का अनुबंध है। इसके तहत किसी निर्धारित कीमत पर एक निर्धारित समय शेयर खरीदने का अधिकार दिया जाता है। हालांकि यह बाध्यकारी नहीं होता। इसमें विक्रेता शेयर बेचने को बाध्य होता है अगर खरीदार चाहे तो। इसके लिए खरीदार एक प्रीमियम अदा करता है। कॉल ऑप्शन उस समय फायदेमंद होता है जब शेयरों के दाम चढ़ रहे होते हैं।

जानिए क्या होती है डिलिस्टिंग

वर्ष 2003 के सेबी के निर्देशों के अनुसार किसी कंपनी के लिए स्टॉक एक्सचेंज से अपने को डिलिस्ट कराने के लिए कुछ शर्र्तें तय की गई थी। कोई कंपनी अपनी इच्छा से एक्सचेंज से अपना नाम डिलिस्ट करा सकती है। कंपनी द्वारा शेयरों का अधिग्रहण (कोई प्रमोटर कंपनी या फिर कोई व्यक्ति) किसी स्कीम या अन्य किसी व्यवस्था के तहत करता है और पब्लिक शेयर होल्डिंग, लिस्टिंग एग्रीमेंट में तय हुई एक निश्चित संख्या से गिरकर नीचे चली जाती हैतो परिणाम के तौर पर उसे डिलिस्ट किया जाता है। प्रमोटर कंपनियां भी अपनी इच्छा के आधार पर स्टॉक एक्सचेंज से अपने शेयरों को डिलिस्ट करा सकती है।

जानिए क्या होता है ग्लोबल डिपॉजिटरी सर्टिफिकेट

कंपनियों के शेयरों के बदले जो जारी सर्टिफिकेट जारी किये जाते हैं उसे ग्लोबल डिपॉजिटरी सर्टिफिकेट कहा जाता है। इसे संक्षेप में जीडीआर कहा जाता है और यह एडीआर की ही तरह होते हैं। दरअसल जिस विदेशी कंपनी के शेयर एक साथ कई देशों में जारी होते हैं और इसके एवज में जमा रकम के बदले सर्टिफिकेट के समतुल्य शेयर उस बैंक की विदेशी शाखा के पास रखे जाते हैं।

जानिए क्या है प्राइस बैंड, क्रेडिट कंट्रोल


प्राइस बैंड अमूमन आईपीओ पर चर्चा के दौरान प्राइस बैंड का भी जिक्र आता है। आईपीओ के दौरान जारी प्रोस्पेक्टस में शेयर के मूल्य का जिक्र होता है या फिर इसकी कीमतों की एक रेंज दी जाती है, जिसके अंदर निवेशक शेयर खरीदने के लिए बोली लगा (आवेदन) कर सकता है। प्राइस बैंड की आखिरी सीमा शेयर के फ्लोर प्राइस के 120 गुना से अधिक नहीं हो सकता है।


प्राइस बैंड में संशोधन हो सकता है लेकिन इसकी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज के जरिये प्रसारित की जा सकती है। इसे प्रेस रिलीज जारी कर बताना होगा। साथ ही बुक बिल्डिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले कारोबारी सदस्यों की वेबसाइट और ट्रेडिंग टर्मिनल पर भी इसकी जानकारी देनी होगी। अगर प्राइस बैंड में संशोधन होता है तो शेयर के लिए बोली लगाने (बिडिंग पीरियड) तीन तक बढ़ाई जाती है। हालांकि बिडिंग पीरियड दस दिन से ज्यादा का नहीं हो सकता। क्रेडिट कंट्रोल क्रेडिट कंट्रोल का इस्तेमाल वे कंपनियां करती हैं जो अपने कारोबारी कर्जदारों से समय पर इसका भुगतान चाहती हैं। क्रेडिट कंट्रोल कंपनियों के डूबत ऋण के जोखिम को काफी कम कर देता है। क्रेडिट कंट्रोल के दौरान कंपनियां कई मानदंडों का इस्तेमाल करती हैं। सबसे पहले उन ग्राहकों के ऋण क्षमता का अंदाजा लगाया जाता है। यह पता किया जाता है कि फलां ग्राहक को कितना कर्ज दिया जाए, जिसे वह समय पर चुका सके। साथ ही ऋण देने की शर्तें तय की जाती है।


ऋ ण चुकाने में ऐसे ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के लिए डिस्काउंट भी दिया जाता है। साथ ही बकाये रकम की मॉनिटरिंग की जाती है। साथ ही इसे रिकार्ड में भी रखा जाता है। दरअसल कारोबार मे ग्राहक कंपनियों का ऋण देना एक आवश्यक रणनीति है। हालांकि प्रभावी क्रेडिट कंट्रोल से डूबत ऋण का जोखिम काफी कम हो जाता है। इससे ऋण देने वाली कंपनी की लाभप्रदता और तरलता दोनों संतुलित रहती हैं। बैंक और वित्तीय संस्थान क्रेडिट कंट्रोल के लिए केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीतियों का इस्तेमाल करते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में खर्च का स्तर भी नियंत्रित किया जाता है। मौद्रिक नीतियों के जरिये भी सार्वजनिक व्यय में बढ़ोतरी की जाती है।

जानिए क्या होता है फ्रिंज बेनिफिट, क्रॉस लिस्टिंग


फ्रिंज बेनिफिट
किसी नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन के अलावे मिलने वाली सारी सुविधाओं को फ्रिंज बेनिफिट कहते हैं। कर्मचारियों की नियुक्ति के समय या उनके परफारमेंस के आधार पर कंपनी उन्हें वेतन के अलावे कई तरह की सुविधाएं देती हैं, जिसे फ्रिंज बेनिफिट कहते हैं।नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को फ्रिंज बेनिफिट कुछ खास परिस्थितियों में या यूं कहें कि कुछ शर्त के तौर पर मुहैया कराती है। इन सुविधाओं पर अगर कर लगाया जाता है तब इसे फ्रिंज बेनिफिट कहते हैं।फ्रिंज बैनिफिट के अन्तर्गत सामान्य तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस, ग्रुप टर्म लाइफ कवरेज, एजुकेशन रिइंबर्समेंट, चाइल्ड केयर, कैफेटेरिया या रेस्तरां के बिल, मनोरंजन पर किए जाने वाले खर्च, एम्पलॉयी डिस्काउंट, कंपनी द्वारा मुहैया कराई जाने वाली गाड़ी का व्यक्तिगत और ऑफिशियल इस्तेमाल तथा अन्य इस तरह की मिलती-जुलती भी सुविधाएं शामिल होती हैं।
क्रॉस लिस्टिंग
कोई भी कंपनी अपने को एक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कराती है और वही कंपनी अपने को दूसरे एक्सचेंज में लिस्ट कराती है तो इस स्थिति को क्रॉस लिस्टिंग कहते हैं। मान लीजिए एफएमसीजी सेक्टर की कोई कंपनी अपने को मुख्य तौर पर मुंबई में बीएससी या एनएससी में लिस्ट कराती है तो इसे ऑरिजनल लिस्टिंग और इसके साथ वह दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज में भी लिस्ट कराती है तो इसे प्राइमरी लिस्टिंग कहते हैं। ऐसा केवल अपने देश के दो अलग-अलग एक्सचेंज में ही नहीं बल्कि अलग-अलग मुल्कों के एक्सचेंज में करा सकते हैं।क्रॉस लिस्टिंग कई कंपनियों की बुनियादी जरूरत बन पड़ती है। कंपनी को क्रॉस लिस्टिंग की जरूरत शेयर की गणना, अकाउंटिंग पॉलिसी, फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करने के लिए और कंपनी के लिए राजस्व बढ़ाने के क्रम में होती है। क्रॉस लिस्टिंग की जरूरत अलग-अलग टाइम जोन और अलग-अलग देशों की मुद्रा की दिक्कतों को दूर करने के लिए करते हैं।

बचत खाताधारकों की आज से बल्ले बल्ले

अगर आप का बैंक में बचत खाता है तो आपके लिए अच्छी खबर है दरअसल रिजर्व बैंक के प्रमुख दरें बढ़ाने का असर अब बैंकों पर दिखना शुरु हो गया है कई बैंकों ने अपनी जमा दरें बढ़ा दी है यानि अगर आपका बैंक में बचत खाता है आपको आज से ब्याज ज्यादा मिलेगा। कई बैंकों ने अपनी सावधि जमा दरों में बढ़त की घोषणा कर दी है।

पीएनबी, पीएसबी और कॉर्पोरेशन बैंकों ने आज से अपनी जमा दरें 0.25% से एक फीसदी तक बढ़ा दी हैं। लेकिन इसका घाटा उन लोगों को उठाना पड़ेगा जो बैंकों से लोन लेना चाहते हैं। पीएनबी ने अपनी उधारी दरों में भी 0.5 फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। उधारी दर बढ़ने से सीधे तौर पर होम और ऑटो लोन महंगे हो जाएंगे। वही अब एफडी पर निवेशकों को 9.25 फीसदी तक का सालाना ब्याज मिलेगा।

इन बैंकों के अलावा आने वाले कुछ दिनों में दूसरे बैंक भी अपनी जमा दरों में बढ़ोतरी घोषणा कर सकते हैं जिसका फायदा उन लोगों को होगा जिनके बैंक में बचत खाते है लेकिन इससे लोन लेने वालों की मुसीबत बढ़ जाएगी।