Monday, January 31, 2011

'शुक्र है कोई बॉलीवुड स्टार या नेता नहीं बना वर्ल्डकप का हीरो'

दुबई. भारत की विश्वविजेता टीम के कप्तान कपिल देव ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर को 19 फरवरी से भारतीय उपमहाद्वीप में शुरू हो रहे विश्वकप का ब्रांड एंबेसेडर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की सराहना की है।

कपिल के हवाले से गल्फ न्यूज ने कहा, मैं सचिन को विश्वकप का ब्रांड एंबेसेडर बनाने के लिए आईसीसी का आभारी हूं। सचिन ही इस पद के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति थे। मुझे खुशी है कि आईसीसी ने किसी फिल्म स्टार, गायक या राजनेता को यह काम नहीं सौंपा। क्रिकेट जैसे शानदार खेल के लिए अपने किसी साथी खिलाडी को ब्रांड एंबेसेडर के तौर पर देखना सुखद एहसास है।

उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि क्रिकेटरों को ही इस खेल को बढावा देना चाहिए और इसके प्रचार प्रसार में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। आईसीसी के फैसले से मैं गदगद हूं। मुझे नहीं लगता है कि इस पद के लिए सचिन से बेहतर कोई और हो सकता है।

कपिल ने कहा, सचिन पर हर किसी को गर्व होना चाहिए। जिस तरह उन्होंने २क् वर्ष से भी अधिक समय तक क्रिकेट खेला है वह बेमिसाल है। वह सही मायनों में इस युग के सर्वश्रेष्ठ खिलाडी हैं।

घर में खेलने के दबाव से नहीं डरते 'दबंग' पठान

नई दिल्ली. विस्फोटक मध्यक्रम बल्लेबाज यूसुफ पठान अपने पहले विश्वकप के लिए कमर कस रहे हैं। इस बार ये क्रिकेट का महासंग्राम उप-महाद्वीप में हो रहा है। ऐसे में भारतीय टीम पर घरेलू दर्शकों की उम्मीदों का भारी दबाव रहेगा। लेकिन पठान को इसकी फिक्र नहीं है।

पठान ने कहा, "इतने बड़े टूर्नामेंट में आप किसी दबाव के बारे में विचार करते हुए नहीं खेल सकते। हम अपने घर में विश्वकप खेल रहे हैं और ये लाजमी है कि जनता को हमसे ज्यादा उम्मीदें होंगी, लेकिन हम इस बारे में नहीं सोच रहे हैं। हमने विश्वकप के लिए अच्छी तैयारी की है और पिछले कुछ समय से हम एक टीम के रूप में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वर्ल्डकप में भी टीम इसी लय में रहेगी।"

28 साल के पठान अपने धुआंधार बल्लेबाजी और उपयोगी फिरकी गेंदबाजी के कारण सभी क्रिकेटप्रेमियों के चहेते बन गए हैं। पठान ने पहले घरू जमीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार शतक जमाया था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर भी अंतिम वनडे में पठान ने अपना पराक्रम दिखाते हुए धुआंधार 105 रन की पारी खेली थी।

अपने शानदार फार्म पर यूसुफ का कहना है, "मैं बहुत खुश हूं कि मेरी बल्लेबाजी से टीम को मदद मिल रही है। मुझे टीम में एक भूमिका दी गई है और मैं अपनी योग्यता के मुताबिक उसे निभाने का प्रयास करता हूं।"

गुरू गैरी हैं बेस्ट

यूसुफ पठान टीम के मौजूदा कोच गैरी कर्स्टन के बहुत बड़े फैन बन गए हैं। पठान ने गैरी की सराहना करते हुए कहा, "मैं बहुत भाग्यशाली हूं जो मुझे कर्स्टन जैसे दिग्गज खिलाड़ी के मार्गदर्शन में खेलने का मौका मिला है। अभ्यास सत्र के दौरान वो हर खिलाड़ी पर बराबरी से ध्यान देते हैं। मेरे नियमित अभ्यास सत्र के बाद भी वो अतिरिक्त प्रेक्टिस सत्र के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।"

"उनका क्रिकेट सिखाने का तरीका और खिलाड़ियों की कमी को दूर करने का तरीका बहुत बेहतरीन है। एक क्रिकेटर के रूप में मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। वो अभी हमारे साथ काम कर रहे हैं और मैं इसके आगे कुछ नहीं सोचना चाहता," पठान ने कहा।

गेंदबाजी पर देते हैं ध्यान

पठान सिर्फ बल्ले से ही नहीं बल्कि गेंद से भी टीम की बराबर मदद करते हैं। अपनी ऑफ ब्रेक गेंदबाजी के बारे में पठान ने कहा, "मैंने हमेशा अपनी गेंदबाजी को गंभीरता से लिया है। अभ्यास सत्र में मैं हमेशा उसे सुधारने का प्रयास करता रहता हूं। मैंने गेंदबाजी पर बहुत मेहनत की है, और उसी का फल मुझे मिल रहा है।"

पठान पिछले 45 वनडे मुकाबलों में 30 विकेट चटका चुके हैं।

1 IAS + 1 IAS = 350 करोड़..गिनती अभी जारी है ।

भोपाल. फरवरी 4, 2010.........मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राजनितिज्ञों और अफसरों की पॉश कालोनी, 74 बंगला क्षेत्र अचानक सुर्ख़ियों में आ जाता है। एक आईएएस दंपत्ति के यहां छापा डालते ही आयकर विभाग के अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। आईएएस दंपत्ति अरविंद जोशी और टीनू जोशी के निवास पर मारे गए इस छापे में तीन करोड़ रुपए से अधिक की नकद राशि संबंधित विभाग जब्त करता है।

एक साथ इतने कैश की उम्मीद शायद आयकर विभाग को भी नहीं थी सो विभाग को बाकायदा नोट गिनने की मशीन लगानी पड़ी। दिनभर चली इस कवायद में विभाग के हाथ जोशी दंपत्ति से संबंधित करोड़ों की नामी बेनामी संपत्ति का ब्योरा मिलता है।

फरवरी 5,2010.......भ्रष्टाचार की इस गंगोत्री का पता लगते ही सरकार में एक अजीब सी खलबली मच जाती है। नतीजा ....चौबीस घंटे के अंदर ही इंकमटेक्स के जाल में फंसे प्रमुख सचिव अरविंद जोशी और टीनू जोशी को राज्य सरकार द्वारा सस्पेंड कर दिया जाता है।

धन-कुबेर निकली आईएएस जोड़ी

प्रमुख सचिव अरविंद जोशी और टीनू जोशी मामले की जांच में जुटे आयकर विभाग ने साल 2010 जाते-जाते इस दंपत्ति की 350 करोड़ की नामी बेनामी संपत्ति का खुलासा किया।आयकर विभाग की अप्रेजल रिपोर्ट बताती है कि जोशी दंपत्ति उन्होंने ने यह संपत्ति 1989 से 2010 के दौरान बनाई।

1979 बैच के आईएएस अधिकारी अरविन्द और टीनू जोशी ने 30 वर्षों के प्रशासनिक सफ़र में कई विभागों की कमान संभाली। इन पदों पर रहते हुए इस दंपत्ति ने कई बड़े ठेकों को पास कराया। माना जाता है कि ठेकों को पास कराने की आड़ में इस दंपत्ति ने कमीशन के तौर पर खासी रकम जमा कर ली थी।

इसी रकम को इस दंपत्ति ने चरणबद्ध तरीके से रियल स्टेट और अन्य दीगर कामों में लगाया। मैनेजमेंट की शिक्षा प्राप्त इस दंपत्ति को काले को सफेद करने में खासी महारत हासिल थी।

यही कारण था कि विभिन्न जगहों पर निवेश किए काले धन में इन्होनें फर्जी नाम और पतों का जमकर इस्तेमाल किया। आपको बता दें कि टीनू जोशी नें जहाँ बिज़नस मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया है।वहीं अरविंद जोशी ने भी ऑस्ट्रेलिया की ही यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉलोन्गॉन्ग से एमबीए किया है।

आईये नज़र डालें फर्जी बाडे़ की पूरी दास्तान पर.....

रक्षा मंत्रालय में रहते खरीदी 121 एकड़ जमीन:

सूत्र बताते हैं कि 1999 से 2004 के बीच रक्षा मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी रहते हुए जोशी ने भोपाल और आसपास 121 एकड़ कृषि भूमि खरीदी। 2004-05 में उन्होंने 58 एकड़ जमीन खरीदी। यह जमीन बिलकिसगंज, मूलखेड़ी, सागोनीकला,मेंडोरी, दीवानगंज,बैरसिया,गोडावर, चिकलोद,खरमई व आसपास के गांवों में क्रय की गई।

आसाम से शुरू हुआ निवेश का खेल

जोशी ने जमीनों में निवेश की शुरूआत आसाम के कामरू जिला के मौजा रामचारी से की। 2001 से 2004 के बीच भोपाल में सात प्लॉट खरीदे गए। उन्होंने 2005 से 2008 के बीच रियल एस्टेट में करीब पांच करोड़ का निवेश किया। जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव रहते हुए जोशी ने तवा, बरगी, बाणसागर और हंसदेव बांधों का ठेका दिया और सवा करोड़ का लेन-देन किया।

तीन करोड़ 55 लाख का प्रीमियम

जोशी दंपती आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल में 3 करोड़ 55 लाख का सालाना प्रीमियम जमा करती है। इसमें 50 लाख अरविंद जोशी,70 लाक ईशान जोशी,75 लाख आसमी जोशी,51 लाख एचएम जोशी और 1 करोड़ 10 लाख निर्मला जोशी के नाम से जमा होता है। ईशान और आसमी पढ़ाई कर रहे हैं और निर्मला ग्रहणी हैं। हर बीमा पॉलिसी में खुद को छुपाने के लिए जोशी ने फर्जी पते और गलत नाम दिए।

जिन पतों पर यह पॉलिसी पाई गईं वे थे ई-15/3 ,एफ-68 मिनाल रेसीडेंसी (सीमा जायसवाल का पता) एफ-95 इंद्रप्रस्थ राज होम्स (सीमा जायसवाल के भाई मिराज अली का पता)। सभी पॉलिसी में नॉमिनी या तो जोशी खुद है या उनके परिवार के सदस्य।

शेयरों में भी किया निवेश

जोशी ने अपने नाम से 274 करोड़ की फ्यूचर ऑप्शन शेयर ट्रेडिंग की है। अरविंद और टीनू जोशी के नाम से 3 करोड़ रुपए के शेयर मिले हैं। अरविंद जोशी के क्रेजी इंफोटेक में 50 हजार शेयर,होन्किल इंडिया लिमिटेड में 10 हजार सहित सेंचुरी,भारतीएयरटेल,आइडिया,एनडीटीवी,आईसीआईसीआई,यूटीआई बैंक,आईडीबीआई बैंक,देना बैंक,पीएनबी,केएस आइल,एचडीएफसी और टाटा स्टील कंपनी में शेयर हैं। टीनू जोशी के पास हिंडाल्को के 1500,जेपी के 1600,इंडियन होटल के 1000 और यूको बैंक के 2000 शेयर हैं।

गुवाहाटी में 18 फ्लैट

अरविंद जोशी के पास गुवाहाटी के कामरूप हाउसिंग प्रोजेक्ट में 18 फ्लैट हैं। 1999 से 2004 के बीच रक्षा विभाग में संयुक्त सचिव रहते हुए जोशी श्रीदेव शर्मा ग्रुप के संपर्क में आए। दोनों ने गुवाहाटी में 15 बीघा जमीन खरीदी। कामरुप हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा लिमिटेड, नई दिल्ली के नाम से कंपनी बनाई गई।

जोशी के भोपाल में छह फ्लैट और सात प्लॉट हैं। इतना ही नहीं बेटे ईशान जोशी के नाम से इथोस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई और 100 एकड़ कृषि भूमि खरीदी। जोशी ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, बालाघाट, कान्हा और बांधवगढ़ में करीब 400 एकड़ जमीन खरीदी।

80 बैंक खातों में करोड़ों का लेन-देन

आयकर विभाग की अप्रेजल रिपोर्ट में अरविंद जोशी के निवास से 80 बैंक खातों की जानकारी मिली थी। इन खातों से करोड़ों रुपए का लेन-देन किया गया है। आईसीआईसीआई बैंक में उनके केवल एक खाते नंबर 00551029336 के लेन-देन ने ही उनके भ्रष्टाचार के तमगे में चार चांद लगा दिए हैं।

खाते में ओपनिंग बैलेंस था 38500 रुपए। इसके बाद खाते में शायद ही कभी एक लाख से कम का लेन-देन हुआ। 2006 में इस खाते के खुलने के बाद नोटों की ऐसी झड़ी लगी कि मानों इसमें खुद-ब-खुद पैसा जमा हो रहा हो। मात्र चार साल में इस बचत खाते में आए दिन हो रहे लाखों के ट्रांजेक्शन से बैंक भी इतना खुश था कि खाते को विशेष ए श्रेणी दी गई।

अब हो सकती है सात साल जेल

आयकर विभाग निलंबित आईएएस दंपति अरविंद और टीनू जोशी के खिलाफ प्रीवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की अनुशंसा करने जा रहा है। इस कानून में अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। जोशी के घर से विदेशी मुद्रा और विदेशी शराब मिलने के मामले में रिजर्व बैंक ने उन्हें हाल ही में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

शर्म से झुक गया पिता का सर
अरविन्द जोशी की भ्रष्टाचार में संलिप्तता का सबसे बुरा असर उनके पिता की साख पर पड़ा। गौरतलब है कि अरविन्द जोशी के पिता एचएम जोशी मध्य प्रदेश सरकार में पुलिस महानिदेशक रह चुके है। अरविन्द जोशी से उलट उनके पिता की ईमानदार छवि के किस्से आज भी प्रदेश भर में मशहूर हैं।लेकिन अरविन्द और टीनू जोशी प्रकरण ने न सिर्फ एचएम जोशी बल्कि पूरी 'प्रशासनिक सेवा' की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया दिया है।

बॉलीवुड में टूटा सबसे ज्यादा 'किस' करने का रिकॉर्ड

अरुणोदय सिंह और अदिति राव ने अभिनेत्री मल्लिका शेरावत के ख्वाहिश फिल्म में सबसे ज्यादा (17) किस करने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।

सूत्रों के मुताबिक सुधीर मिश्रा की आगामी फिल्म 'ये साली जिंदगी' में इन दोनों के बीच 22 गर्मागरम किस सीन शूट किए गए हैं। अरुणोदय सिंह जो मिर्च फिल्म में राइमा सेन के साथ चुंबन दृश्य करने के लिए काफी चर्चित हुए थे। वहीं अदिति सिंह को आप राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म 'दिल्ली-6' में सोनम कपूर की बुआ के किरदार में देख चुके हैं।

सुधीर मिश्रा ने बताया कि फिल्म 'ये साली जिंदगी' की कहानी दिल्ली में रहने वाले कपल पर आधारित है जिसमें जब भी अदिति-अरुणोदय में झगड़ा होता वे किस करते हैं और वे फिल्म में कई पर झगड़ते हैं।

मिश्रा का कहना है कि फिल्म में 20 या 22 किस सीन है लेकिन वे सभी स्क्रिप्ट की डिमांड

नशे में धुत होकर माही ने की फिल्म की शूटिंग!

हमारे बॉलीवुड सितारे फिल्म में अपने किरदार को सफल बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं|कुछ ऐसा ही करने के चक्कर में पिछले दिनों माही गिल के साथ एक दिलचस्प वाक्या हुआ|



तिग्मांशु धूलिया की आनेवाली फिल्म 'साहिब,बीवी और गेंगस्टर' में माही को एक सीन में शराब के नशे में धुत हुआ दिखाया जाना था|माही इस सीन को लेकर बहुत नर्वस थीं वह इस सीन को ठीक से नहीं कर पा रही थीं| इसलिए उन्होंने फैसला किया वह वोदका पीने के बाद ही इस सीन को शूट करेंगी ताकि वह इस सीन के साथ न्याय कर पाएं|



उन्होंने वोदका के एक नहीं छह पैक लगाए और सीन को करने के लिए पहुंच गईं| उन्होंने वह शॉट भी बखूबी दिए मगर बाद में उन्हें इससे थोड़ी परेशानी भी हुई और वह अपने होटल के रूम में कुछ देर आराम करने के लिए चली गईं और फिर आगे की शूटिंग में हिस्सा लिया

बदहाल हंगल की मदद को आगे आए बिग बी

बॉलीवुड के बीते दौर के जानेमाने अभिनेता ए. के. हंगल के साथ फिल्म 'शोले' और 'शराबी' में काम कर चुके बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इससे पहले आमिर खान भी हंगल की मदद करने की घोषणा कर चुके हैं ।

अमिताभ ने अपने ब्लॉग 'बिगबी डॉट बिगअड्डा डॉट काम' पर लिखा है, "यह काफी पीड़ादायक है कि बॉलीवुड के बहुत निष्ठावान एवं समर्पित कलाकारों में से एक श्री ए. के. हंगल की हालत काफी खराब चल रही है। वह इस समय बहुत ही बदहाली और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं । मुझे वेबसाइट्स के जरिये इसकी जानकारी मिली।"

उन्होंने लिखा है, "मैने अपने कार्यालय से उन्हें तुरंत सहायता उपलब्ध कराने को कहा है। व्यक्ति, बंधुत्व और मानवता के नाते तो हम ऐसा कर ही सकते हैं।"

उल्लेखनीय है कि 68 वर्षीय अमिताभ हंगल के साथ 'अभिमान', 'शोले' और 'शराबी' में काम कर चुके हैं। अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर यह स्वीकार किया है कि उन्हें 95 वर्षीय हंगल की हालत के बारे में सुनकर काफी दुख हुआ।

जिस्मफरोशी : मजबूरी से हाईप्रोफाइल धंधे तक

बदनाम गली का नाम आते ही ढेर सारे ख्याल और सवाल आने लगते हैं। आखिर क्यों करती हैं ऐसे गंदे काम? यह सवाल तो आपके ख्याल में भी सबसे पहले आया होगा। वह दौर और था जब वक्त के थपेड़ों से घायल होकर अक्सर मजबूर लड़कियां कोठे की शिकार होती थीं, अब तो महज भौतिक संसाधनों की खातिर इस धंधे में लोग उतर चुके हैं। किसी को महंगी कार की चाहत है तो कोई इसे सफलता की शॉर्टकट तरीका मानता है।

जिस्मफरोशी दुनिया के पुराने धंधों में से एक है। बेबीलोन के मंदिरों से लेकर भारत के मंदिरों में देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति का आदिम रूप है। गुलाम व्यवस्था में उनके मालिक वेश्याएं पालते थे। अनेक गुलाम मालिकों ने वेश्यालय भी खोले। तब वेश्याएं संपदा और शक्ति की प्रतीक मानी जाती थीं। मुगलों के हरम में सैकड़ों औरतें रहती थीं। मुगलकाल के बाद, जब अंग्रेजों ने भारत पर अधिकार किया तो इस धंधे का स्वरूप बदलने लगा। इस समय राजाओं ने अंग्रेजों को खुश करने के लिए तवायफों को तोहफे के रूप में पेश किया जाता था। आधुनिक पूंजीवादी समाज में वेश्यावृत्ति के फलने-फूलने की मुख्य वजह सामाजिक तौर पर स्त्री का वस्तुकरण है। यह तो पूराने दौर की कहानी है, जहां आपको मजबूरी दिखती होगी।

पुराने वक्त के कोठों से निकल कर देह व्यापार का धंधा अब वेबसाइटों तक पहुंच गया है। इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के मामले में पिछड़ी पुलिस के लिए इस नेटवर्क को भेदना खासा मेहनत वाला सबब बन गया है। सिर्फ सर्च इंजन पर अपनी जरूरत लिखकर सर्च करने से ऐसी दर्जनों साइट्स के लिंक मिल जाएंगे। कुछ वेबसाइटों पर लड़कियों की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। यहां कालेज छात्राएं, मॉडल्स और टीवी व फिल्मों की नायिकाएं तक उपलब्ध कराने के दावे किए गए हैं।

इस कारोबार में विदेशी लड़कियों के साथ मॉडल्स, कॉलेज गर्ल्स और बहुत जल्दी ऊंची छलांग लगाने की मध्यमवर्गीय महत्वाकांक्षी लड़कियों की संख्या भी बढ़ रही है। अब दलालों की पहचान मुश्किल हो गई है। इनकी वेशभूषा, पहनावा व भाषा हाई प्रोफाइल है और उनका काम करने का ढंग पूरी तरह सुरक्षित है। यह न केवल विदेशों से कॉलगर्ल्स मंगाते हैं बल्कि बड़ी कंपनियों के मेहमानों के साथ कॉलगर्ल्स को विदेश की सैर भी कराते हैं।सेक्स एक बड़े कारोबार के रूप में परिवर्तित हो चुका है। इस कारोबार को चलाने के लिए बाकयादा ऑफिस खोले जा रहे हैं। इंटरनेट और मोबाइल पर आने वाली सूचनाओं के आधार पर कॉलगर्ल्स की बुकिंग होती है। ईमेल या मोबाइल पर ही ग्राहक को डिलीवरी का स्थान बता दिया जाता है। कॉलगर्ल्स को ठेके पर या फिर वेतन पर रखा जाता हैं।

यह भी सच है

भारत में जिस्मफरोशी का धंधा लगातार बढ रहा है। 1956 में पीटा कानून के तहत वेश्यावृत्ति को कानूनी वैद्यता दी गई, पर 1986 में इसमें संशोधन करके कई शर्तें जोड़ी गई। इसके तहत सार्वजनिक सेक्स को अपराध माना गया। इसमें सजा का भी प्रावधान है। वूमेन एंड चाइल्ड डेवलेपमेंट मिनिस्ट्री ने 2007  में एक रिपोर्ट दिया, इसके मुताबिक, 30  लाख औरतें जिस्मफरोशी का धंधा करती हैं। इममें 36 फीसदी तो नाबालिग हैं। अकेले मुंबई में 2 लाख सेक्स वर्कर का परिवार रहता है, जो पूरे मध्य एशिया में सबसे बड़ा है। भारत में सबसे बड़े रेड लाइट एरिया कोलकाता में सोनागाछी, मुंबई में कामथीपुरा, दिल्ली में जी.बी. रोड, ग्वालियर में रेशमपुरा, वाराणसी में दालमंडी, सहारपुर (यूपी) में नक्कास बाजार, मुजफ्फरपुर (बिहार) में छतरभुज स्थान, मेरठ (यूपी) में कबाड़ी बाजार और नागपुर में गंगा-यमुना हैं।

हाल ही में कई सेक्स रैकेट का खुलास हुआ है। इसमें दक्षिण भारत के बेंगलूरू और हैदराबाद में बड़े-बड़े रैकेट पकड़े गए हैं। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही बड़े सेक्स रैकेट खुलासों पर -

सेक्स रैकेट में शामिल हैं कई साउथ इंडियन फिल्मों की हिरोइन

बेंगलूरू के सेक्स रैकेट ने तो पूरे देश को हिला रखा है। एक पांच सितारा मशहूर होटल से दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री यमुना के साथ दलाल सुमन और एक आईटी कंपनी के सीईओ वेणुगोपाल को गिरफ्तार किया गया था। जो शहर के तमाम बड़े होटलों में बड़ी-बड़ी पार्टियों के बहाने सेक्स रैकेट चलता था। जांच से पता चला है कि यमुना, सोची-समझी नीति के तहत करती थी, ताकि पकड़े जाने पर वह आपसी सहमति से सेक्‍स की दलील देकर खुद को रैकेट में शामिल होने के आरोप से बचा सके। यह रैकेट किसी कोठे पर नहीं थ्री स्‍टार और फाइव स्‍टार होटलों में ही चलता था। रैकेट में मजबूर नहीं ग्‍लैमरस महिलाएं शामिल हैं। बड़ी और नामी हिरोइन भी बडे़-बड़े अधिकारियों की ‘सेवा’ के लिए तैयार रहती हैं।

हैदराबाद में तेलुगू फिल्म अभिनेत्री सायरा बानू करती थी धंधा !

हैदराबाद में तेलुगू फिल्म अभिनेत्रियों सायरा बानू और ज्योति के साथ सात अन्य लोगों को रंगे हाथ पकड़कर वेश्यावृत्ति से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ किया गया। कुंदन बाग के एक नजदीकी इलाके के एक अपार्टमेंट से कथित तौर पर सायरा और ज्योति को उज्बेकिस्तान की एक महिला व उनके ग्राहकों के साथ गिरफ्तार किया गया। गिरोह में कुछ रईसों और जाने माने लोगों शामिल हैं।

पर्यटक स्थल बन चुके हैं धंधे का स्वर्ग

हाल ही में गोवा में एक सेक्स रैकेट पकड़ा गया है। यहां के पाउला क्षेत्र से दो दलालों सहित चार नेपाली लड़कियों को पकड़ा गया। इन लड़कियों से जबरन देह व्यापार कराया जा रहा था। इनमें से एक लड़की नाबालिग थी। पुलिस के मुताबिक इस तरह के रैकेट आई टी के मशहूर बैंगलोर में भी काफी संख्या में हैं। फिलहाल पुलिस के पास पुख्ता सबूत नहीं है इसलिए वो कुछ भी कहने से बच रही है।

सेक्स रैकेट चलाती थी भोजपुरी हिरोइन

21 जनवरी को अहमदाबाद के इनकम टेक्स चार रस्ता के नजदीक कॉमर्शियल सेंटर में आने वाले होटल देव पैलेस से सेक्स रैकेट में शामिल एक भोजपूरी हिरोइन को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान केवल जवान और अय्याश ही नहीं बच्चे भी शामिल थे।

कहीं पढाई का खर्च का चलाने के लिए तो कहीं महंगे शौक के लिए अब लड़कियां करती हैं देह का धंधा

एक सर्वेक्षण के मुताबिक ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले कई छात्राएं अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाने लिए देह व्यापार करती हैं। पिछले दस वर्षों में विद्यार्थियों में देह व्यापार तीन फ़ीसदी से बढ़कर 25 फ़ीसदी तक पहुंच गया है। ये सर्वेक्षण किंग्स्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉन रॉबर्ट्स ने सेक्स उद्योग से विद्यार्थियों के संबंध को जानने के लिए किया है। क़रीब 11 फ़ीसदी विद्यार्थी एस्कोर्ट का काम करने के विकल्प को मान लेते हैं या विचार करते हैं। हाई प्रोफाइल सेक्सकर्मी को एस्कोर्ट कहा जाता है। कॉलेज में ट्यूशन फीस ज़्यादा होने के वजह से विद्यार्थियों को ‘इंटरनेट पर अश्लील फ़िल्म’, ‘अश्लील बातें’ और ‘लैप डांस’ जैसा काम करना पड़ता है। सर्वेक्षण ब्रिटेन के एक ही विश्वविद्यालय में किया गया है। वहीं, कई अमीर लड़कियां अपने महंगे शौक को पूरा करने के लिए भी धंधा करती हैं।

आपकी राय

आज जिस्मफरोशी के धंधे का स्वरूप बदल रहा है। पहले मजबूरी और लाचारी में औरते इस धंधे में उतरती थी, पर अब मंहगे शौक को पूरा करने के लिए यह धंधा हाईप्रोफाइल बन चुका है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं? आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर कर सकते हैं। 

'मैं आज जो कुछ भी हूं सलमान की वजह से हूं'

अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी को कई अवार्ड समारोह में सर्वश्रेष्ठ नवोदित कलाकार के पुरस्कार से नवाजा जा रहा है। पिता शत्रुघ्न सिन्हा इस बात से बहुत खुश है लेकिन उन्होंने सोनाक्षी को कई बातों का ध्यान रखने की भी सलाह दी है।

शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि मुझे बहुत गर्व महसूस होता है जब मैं सोनाक्षी को स्टेज पर अवार्ड रिसीव करते हुए देखता हूं। लेकिन मैंने सोनाक्षी को कह रखा है कि अपने पैर जमीन पर रखे।

वहीं दूसरी तरफ अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा का कहना है कि आज मैं जो कुछ भी हूं सिर्फ अपने सह-अभिनेता सलमान खान की वजह से हूं। सोनाक्षी कहती है कि एक नवोदित कलाकार के लिए दबंग से अच्छे कोई फिल्म नहीं हो सकती।

सोनाक्षी आगे कहती है कि अरबाज खान और निर्देशक अभिनव कश्यप की भी आभारी हूं कि उन्होंने मुझे अपनी फिल्म में न सिर्फ काम करने का मौका दिया, बल्कि मेरा हौसला भी बढ़ाया।

'मेरे तो पहले से ही बच्चे हैं, मैं शादी क्यों करूं'


बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान कब शादी करेंगे यह सवाल उनके हर फैन के मन में उठता रहता है|सलमान का नाम कई अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा मगर बात किसी के भी साथ बात शादी तक नहीं पहुंच पाई|हाल ही में कैटरीना कैफ से भी उनके ब्रेकअप की ख़बरें आ चुकी हैं|
ऐसे में सब यही जानना चाहते हैं कि आखिर सलमान कभी शादी करेंगे भी या नहीं|हाल ही में डीएनए अख़बार को दिए इंटरव्यू में सलमान ने अपनी शादी पर खुलकर चर्चा की|
अपनी शादी के बारे में सलमान मजाक में बोले कि हो सकता है वह इस साल के अंत तक शायद शादी कर लें,मगर दूसरे ही पल बोले कि मैं तो न जाने कितनी बार शादी करने की बात कह चुका हूं|वैसे मैं शादी क्यों करूं|कोई शादी इसलिए करता है कि आगे चलकर उसके बच्चे हों मगर मेरे तो पहले से ही बच्चे हैं|मेरे भांजे भतीजियां ही मेरे बच्चे हैं|मैं बच्चों के लिए शादी कर सकता था मगर मेरे बच्चे हैं तो मुझे शादी करने की क्या जरुरत है|

मेरा काम आशीर्वाद देना है, पैसों का हिसाब-किताब रखना नहीं...


धर्मशाला ‘मैं बौद्ध भिक्षु हूं। मेरी दिनचर्या बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने और अनुयायियों को आशीर्वाद देने तक ही सीमित है। अनुयायियों से मिले चढ़ावे और अन्य उपहारों का हिसाब-किताब मैं नहीं रखता। यह हिसाब लवरंग तशरुफू के अधिकारी और कर्मचारी रखते हैं।’ यह जवाब करमापा ने विशेष जांच दल को दिया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति पर यह टीम करमापा से सिद्धबाड़ी स्थित ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय के अस्थायी निवास स्थान में करमापा से पूछताछ करने पहुंची थी। टीम का नेतृत्व ऊना के एएसपी केजी कपूर और डीएसपी सुरेंद्र शर्मा ने किया। पुलिस ने करमापा से उनके कार्यालय से बरामद विदेशी मुद्रा और जमीन खरीद-फरोख्त मामले में 50 सवाल पूछे। अधिकतर सवालों के जवाब में करमापा ने अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने सिर्फ यही कहा, ‘इसके जवाब वित्त अधिकारियों को ही मालूम होंगे। हिसाब-किताब में कोई गड़बड़ी है तो इसके लिए वित्त शाखा जिम्मेदार है।’ कपूर ने करमापा के जवाबों पर असंतोष जताते हुए कहा कि उनसे दोबारा पूछताछ संभव है।

 आईबी और रॉ की जांच शुरू:

जांच अधिकारियों ने बताया कि करमापा के खिलाफ विदेशी मुद्रा कानून के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है। इसके लिए आईबी और रॉ के अधिकारी धर्मशाला पहुंचकर जांच शुरू कर चुके हैं। पुलिस ने अब तक करमापा कार्यालय से जमीन खरीदी के दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, कंप्यूटर और लैपटॉप को कब्जे में लिया है। रविवार को ऊना पुलिस ने दिल्ली स्थित मजनूं का टीला, धर्मशाला के कुछ नामी-गिरामी होटलों और रेस्टोरेंट्स में दबिश दी। चंडीगढ़ से आईबी के आईआईटी विशेषज्ञों ने करमापा कार्यालय के कंप्यूटर और लैपटॉप में मिले डाटा की जांच की। दलाई लामा ने चीन पर दागे आरोपों के मिसाइल डीएनए नेटवर्क. बेंगलुरू तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि करमापा लापा के अस्थाई निवास से विदेशी मुद्रा बरामद होने के पीछे चीन का हाथ हो सकता है। दलाई लामा ने रविवार को चित्रदुर्ग में कहा कि धर्मशाला में चीन के बहुत से अनुयायी रहते हैं। संभव है कि पैसा बरामदगी में उनकी भूमिका हो। फिर बेंगलुरू के नेशनल कॉलेज ग्राउंड में धर्मगुरु ने कहा, ‘चीन सरकार के दमन के बावजूद वहां बौद्ध धर्म के अनुयायी बढ़ते जा रहे हैं। चीन निवासी तिब्बतियों के अनुसार वहां कम से कम 30 करोड़ बौद्ध हैं।’ उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था खुलने और विकास के बाद मजबूरी में चीन को धार्मिक रूप से सहिष्णु होना पड़ा है।

1500 करोड़ की बेनामी संपत्तियां

धर्मशाला। धर्मशाला के पास सिद्धबाड़ी स्थित करमा कग्यू बौद्ध पंथ के 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के अस्थायी निवास स्थान ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय के कार्यालय में करोड़ों रुपए की देशी और विदेशी मुद्रा बरामद होने से कांगड़ा जिला में बौद्ध मठों के नाम पर बनाई जा रही बेनामी संपत्तियों के मामले का खुलासा हुआ है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बेनामी संपत्तियों के बढ़ते मामलों के चलते इस संबंध में केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने विदेशी धन के इस्तेमाल की आशंका जताई थी। सीआईडी ने धर्मशाला सहित आसपास के क्षेत्रों में 1500 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्तियों को चिह्न्ति कर सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी थी।

इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मैक्लोडगंज सहित जिला कांगड़ा के विभिन्न स्थानों पर बौद्ध मठों के नाम पर खरीदी जा रही बेनामी भू-संपत्तियों के मामलों पर अपनी जांच शुरू की थी। ईडी ने जिला कांगड़ा मुख्यालय धर्मशाला, मैक्लोडगंज, बीड़, गोपालपुर, कोटला सहित अन्य क्षेत्रों में निर्वासित तिब्बतियों की ओर से 5 बौद्ध मठों और संस्थानों के नामों पर खरीदी गई बेनामी संपत्तियों के मामले में जिला राजस्व विभाग से की गई कार्रवाई, भू-राजस्व रिकॉर्ड और मालिकों के नाम और अन्य जानकारियां मांगी थी।

चीन से अमेरिका तक तानाबाना
ईडी के अनुसार इन बेनामी संपत्तियों की खरीद में चीन से आए धन का इस्तेमाल किया गया है। एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत चीन यह राशि पहले बैंकॉक और बैंकॉक से इस धन को अमेरिका हस्तांतरित किया गया है। अमेरिका के माध्यम से इस राशि को भारत में लाया गया है। मैक्लोडगंज स्थित निगमापा सेंटर और डिप छोलिंग सेलुक्पा बौद्ध मठ, 17वें करमापा का अस्थायी निवास स्थान ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय सिद्धबाड़ी, मैक्लोडगंज स्थित जमयांग छोलिंग ननरी और घरोह स्थित शुगसप ननरी के भू मालिकों और इस पर खर्च किए गए धन और त्रिलोकपुर के पास टीएसआर बौद्ध मठ की भूमि के मामले में की गई जांच की रिपोर्ट भी ईडी ने मांगी थी। वीरवार को की गई छापेमारी इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

ढाई हजार कनाल के बेनामी सौदे
धर्मशाला क्षेत्र में लगभग ढाई हजार कनाल के लगभग भूमि बेनामी सौदों के माध्यम से विदेशी या फिर बाहरी उद्योगपतियों की ओर से खरीदी गई है। इन बेनामी संपत्तियों में जहां मात्र एग्रीमेंट्स के माध्यम से ही सैकड़ों कनाल भूमि का लेन-देन होता है, वहीं सरकार को स्टांप ड्यूटी का लाखों रुपए का नुकसान होने के साथ-साथ इस डील में इस्तेमाल किए गए करोड़ों रुपए के धन के न तो स्रोतों की जानकारी मिल पाती है और न ही इन पर किसी तरह का टैक्स देय होता है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुलप्रकाश के नाम पर धर्मशाला के आसपास खाता नंबर 368 में 660.65 वर्ग मीटर जबकि सिद्धपुर में 0.10.18 हैक्टेयर भूमि है। सिद्धपुर में किए जा रहे बौद्ध मठ के लिए भूमि सौदे में सिद्धपुर की भूमि के संबंध में ही एग्रीमेंट होने की संभावना बताई जा रही है।

ऊना में पकड़े युवक रिमांड पर
एक करोड़ की नगदी के साथ गिरफ्तार किए गए संयोग दत्त और आशुतोष को सीजेएम कोर्ट ने एक फरवरी तक रिमांड पर भेज दिया है। तिब्बती ट्र्स्ट प्रबंधक रावजी चौसांग को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

फेरा और फेमा के तहत दर्ज हो सकता है मामला
ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय सिद्धबाड़ी स्थित करमापा के अस्थायी निवास स्थान के कार्यालय से करोड़ों रुपए की भारतीय के साथ विदेशी मुद्रा बरामदगी के बाद अब इस मामले में फारन एक्सचेंज मैनेजेंट एक्ट (फेमा) और फारन एक्सचेंज रेग्यूलेशन एक्ट (फेरा) की अवहेलना करने का मामला भी दर्ज हो सकता है। देश में विदेशी मुद्रा अधिनियम में विदेशी मुद्रा को लाने संबंधी नियम निर्धारित हैं, लेकिन इस मामले में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा मिलने के चलते पुलिस इस पर सीधे तौर पर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में अब फेरा और फेमा के तहत इस मामले में जांच की जाएगी। पांच जनवरी 2000 को धर्मशाला पहुंचे करमा कग्यू बौद्ध पंथ के 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे 28 दिसंबर 1999 को तिब्बत के तशुरफू बौद्ध मठ से अपने 5 अनुयायियों और बड़ी बहन नगदुप पेल्जोन सहित हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों की 1500 किलोमीटर पैदल यात्रा कर छिपते-छिपाते नेपाल होते हुए भारत पहुंचे थे, तब से लेकर वह मीडिया की सुर्खियां बने हुए हैं।

सूचनाओं की एवज में लाखों लेता था आईएसआई एजेंट

धर्मशाला। सीआईडी शिमला की विशेष टीम की ओर से गिरफ्तार आईएसआई एजेंट पूर्व सैनिक एवं पशुपालन विभाग में तैनात सहायक भगवान दास आईएसआई को सूचनाएं देने की एवज में मोटी रकम वसूलता था। सीआईडी ने उसके बैंक खातों सहित मोबाइल कॉल डिटेल से उसके आईएसआई से संपर्क होने का खुलासा किया है। सीआईडी की विशेष टीम ने भगवान दास के रजियाणा स्थित आवास से एक संदिग्ध डायरी भी बरामद की है जिसमें भगवान दास ने आईएसआई को भेजी सूचनाओं का ब्योरा दर्ज करने के साथ-साथ उसे सूचनाओं की एवज में मिले धन का लेखा-जोखा दर्ज किया है। भगवान दास को आईएसआई के ही एजेंटों ने ही स्वयं संपर्क साधकर पैसे के बदले सूचनाएं देने के लिए तैयार किया था। इसके लिए उसे बाकायदा धन का भुगतान उसके बैंक खाते के माध्यम से करने का प्रलोभन दिया गया था।

एक हफ्ते से सीआईडी का विशेष दल भगवान दास की गतिविधियों पर खुफिया नजर रखे हुए था। इसी कड़ी में वीरवार को विशेष दल ने उसे रजियाणा में दबोच लिया। भगवान दास की कब्जे में ली गई गाड़ी के दस्तावेज भी फर्जी पाए गए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में भगवान दास ने स्वयं सूचनाओं की एवज में पैसे के लेन-देन की बात स्वीकारी है।

वहीं उसके माध्यम से आईएसआई ने किन-किन क्षेत्रों की जानकारियां हासिल की हैं और उनके संपर्क में भगवान दास के माध्यम से कौन-कौन लोग थे इसकी जांच में सीआईडी जुट गई है। सीआईडी को भगवान दास के अन्य संपर्क सूत्रों की भी तलाश है। इस मामले में शीघ्र कुछ और गिरफ्तारियों की संभावना है। वहीं, कांगड़ा न्यायालय के न्यायाधीश ने आरोपी भगवान दास को चार दिन के सीआईडी रिमांड पर भेजने के आदेश जारी किए।